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Hindi Kahani

new hindi kahani

dushyant shakuntala
dushyant shakuntala
Written by Hindibeststory

new hindi kahani स्वर्ग के द्वार पर बहुत भीड़ इकठ्ठा हो गयी थी . चित्र गुप्त को बुलाया गया .. चित्र गुप्त ने कहा की हमारे पास बस ३ लक्जरी कमरे बचे हुए हैं . सभी लोग अपने – अपने मरने की कहानी सुनाओ…जिसकी मरने की कहानी interesting होगी वही अन्दर जाएगा … पहला आदमी आया – वो मोटा सा अधेड़ उम्र का था और सूट बूट पहने हुए था . चित्रगुप्त ने पूछा – “तुम कैसे मरे ?” पहला आदमी – “मैं एक बिजनेसमैन हूँ ! मैंने पिछले साल एक खूबसूरत और जवान लड़की से शादी की . मैं दिन रात मेहनत करके पैसे कमाता हूँ , मुझे शक था की मेरी पत्नी का अपने बॉयफ्रेंड के साथ चक्कर है . मेरा अपार्टमेंट दस मंजिले का हैं और मैं पांचवी मंजिल पर रहता हूँ . आज सुबह मैंने एक आदमी को मेरे घर में आते देख लिया . मैंने एक्स्ट्रा चाभी से घर में घुसा और बेडरूम में गया . अपनी पत्नी की स्थिति देखकर मेरा शक यकीन में बदल गया . बस मैं उस आदमी को मारने के लिए ढूँढने लगा . मैंने पूरा घर छान मारा पर वो नहीं मिला , तभी मैंने देखा की वो अंडरवियर में मेरे बालकनी के रेलिंग से लटका हुआ है .. मैं दौड़ के उसका हाथ छुड़ाने लगा ताकि वो नीचे गिर के मर जाए … लेकिन वह एक नंबर का कमीना इंसान निकला .. वो हाँथ छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था .

मैं दौड़ के एक हथौड़ी ले आया और उसके हाँथ पर मारने लगा . इस बार उसका हाँथ छुट गया और वो पांच मंजिल नीचे जा गिरा . लेकिन मैंने देखा की वो लॉन पर गिरने की वजह से मरा नहीं है .. मैं दौड़ के घर का फ्रीज उठा लाया और उसके ऊपर फेंक दिया … फ्रीज उसके ऊपर गिरा और चकना चूर हो गया … लेकिन वो अभी भी जिंदा था … मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं भी ऊपर से कूद गया उसके ऊपर … पता नहीं क्या हुआ ? मैं तो मर कर यहाँ आ गया …” चित्रगुप्त ने कहा – “ तुम्हारी कहानी मजेदार है .. अन्दर आ जाओ … नेक्स्ट !!” दूसरा आदमी जो जवान और गठीला था आया – वो सिर्फ अंडरवियर में था . चित्रगुप्त ने पूछा – “तुम कैसे मरे ?” दूसरा आदमी – “मैं एक स्पोर्ट्समैन हूँ .. मेरा अपार्टमेंट दस मंजिले का हैं और मैं दसवीं मंजिल पर रहता हूँ .

आज सुबह मैं बालकनी में कसरत कर रहा था की किसी तरह से नीचे गिर गया “ चित्रगुप्त ने पूछा – “और तुम गिर के मर गए ?” दूसरा आदमी – “नहीं ! गिरते वक्त मैंने किसी नीचे वाली मंजिल के बालकनी की रेलिंग पकड़ ली . अभी मैं ऊपर चढ़ने की कोशिश कर ही रहा था की एक मोटा आदमी आया और मुझे बचाने की बजाय उल्टा मेरा हाथ रेलिंग से छुड़ाने लगा .. “ चित्रगुप्त ने पूछा – फिर तुम गिर गए और मर कर यहाँ पहुँच गए …- “नहीं ! मैंने कैसे भी करके अपना पकड़ बनाये रखा .. तभी वो कही से हथौड़ी ले के आया और मेरे हाथ पर ताबड़तोड़ हमला करने लगा … “ चित्रगुप्त ने पूछा – “ फिर तुम गिर कर कर मर गए ?” दूसरा आदमी – “नहीं ! मैं नीचे लॉन पर गिरा .. कुछ हड्डियाँ टूटी होंगी पर मरा नहीं … तभी वो पागल आदमी कही से फ्रीज उठा लगा और बालकनी से मेरे ऊपर फेंक दिया …” चित्रगुप्त ने पूछा – “और तुम दब के मर गए ?” दूसरा आदमी – “नहीं ! मैं फिर भी जिंदा था … तब तक मोटे आदमी को क्या सुझा और वो खुद ही मेरे ऊपर कूद गया … “ चित्रगुप्त ने पूछा – “और तुम मर गए ?” दूसरा आदमी – “ हाँ .. लेकिन वो मोटा भी नहीं बचा होगा … “ चित्रगुप्त ने कहा – “तुम्हारी कहानी भी मजेदार है .. अन्दर जाओ , बड़ा मजा आएगा … नेक्स्ट !!” तीसरा आदमी जो जवान पर हल्का फुल्का था वही खड़ा था और सबकी बाते बड़े ध्यान से सुन रहा था आगे बढ़ा. चित्रगुप्त ने पूछा – “और तुम कैसे मरे ?” तीसरा आदमी नीचे निगाहें किये हुए – “वो बात ये हैं ना … मैं वो … फ्रीज के अन्दर छुपा हुआ था … “ मित्रों आपको यह new hindi kahani कैसी लगी जरुर बताएं और new hindi kahani की तरह की और भी कहानी के लिए ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब करें और दूसरी कहानी के लिए निचे की लिंक पर क्लिक करें.

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