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Panchatantra kahaniya अक्लमंद हंस

panchatantra kahaniya अक्लमंद हंस
Written by Abhishek Pandey

panchatantra kahaniya अक्लमंद हंस एक जंगल में तालाव किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था. जिस पर बहुत सारे हंस रहते थे. उनमें एक बहुत ही अक्लमंद हंस था. बहुत ही चालाक, बहुत ही दूरदर्शी .

 

 

 

एक दिन उसने देखा कि एक नन्ही बेल पेड़ पर लिपट रही थी. उसने रात को जब सभी हंस आये तो उसने कहा कि देखिये यह बेल पेड़ से लिपट रही है. हमें मिल कर हमें इस बेल को नष्ट कर देना चाहिए , अन्यथा यह हमें नुकसान पहुचा सकती है.

 

 

 

 

उसपर एक युवा हंस चहक कर बोला ” अरे यह नन्ही से बेल हमारा क्या बिगाड़ लेगी. “

 

 

 

देखो अभी आप छोटे हो, युवा हो, लेकिन हमने दुनिया देखी है. एक दिन यह बेल बहुत ही मोती हो जायेगी और पेड़ से मजबूती से चिपक जायेगी. यूँ कहे तो यह एक तरह से सीढ़ी बन जायेगी और कोई भी शिकारी बड़ी ही आसानी से पेड़ पर चढ़ जाएगा.

 

 

 

अरी आप कुछ भी कह रहे हैं. यह छोटी सी बेल सीढ़ी बन जायेगी. ऐसा नहीं हो सकता… आप बस बेल को खींचकर लंबा कर रहे हो …..उस युवा हंस ने कहा

 

 

panchatantra kahaniya अक्लमंद हंस
panchatantra kahaniya अक्लमंद हंस

तभी अन्य हंस भी उसके हाँ में हाँ मिलाने लगे. कोई कहता इनकी बुद्धि कुछ ज्यादा ही तेज हो गयी है. कोई कहता है ये सठिया गए हैं.

 

 

 

किसी ने जब इस बात को सीरियस ना लिया तो वह अक्लमंद हंस चुप हो गया. उसने मन ही मन कहा ” भैंस के आगे बीन बजाना ” शायद इन्ही के लिए बना है. समय बीता. बारिश आई. बेल मोटी होती चली गयी.

 

 

 

लिपटते हुए वह ऊपर की शाखाओं तक पहुँच गयी. अक्लमंद हंस की बात सच होती गयी. वह एक मजबूत सीढ़ी बन चुकी थी. जिसपर बड़ी ही आसानी सी कोई चढ़ सकता था.अब बाकी के हंसों को भी अक्लमंद हंस की बात अब समझ में आ चुकी थी, लेकिन तब किया भी क्या जाए जब चिड़िया चुग गयी खेत .

 

 

 

एक दिन जब हंस दाना चुगने गए थे. तभी एक बहेलिया आया , जो कि कई दिनों से उन पर नजर रख रहा था. उसने पेड़ पर जाल लगा दिया. शाम को जब हंस आये तो एक एक करके सभी उसमें फंसते चले गए. सभी फड़फड़ाने लगे और उस जाल भी और भी अधिक फंसने लगे. सभी अक्लमंद हंस की बात ना मानने को लेकर शर्मिन्दा थे.

 

 

 

वह अक्लमंद हंस सबसे बहुत गुस्सा था और चुपचाप बैठा हुआ था. सभी अन्य हंस उससे माफ़ी मागने लगे. उन्होंने कहा कि हम मुर्ख थे और मुर्खता की वजह से हम यहाँ फंसे हुए हैं. अब आप ही हमें बचा सकते हैं.

 

 

 

सबके इस तरह बोलने के बाद अक्लमंद हंस ने कहा ठीक है, अब मेरी बात ध्यान से सुनो. सुबह जब बहेलिया आएगा तो सभी मुर्दों की तरह बनने का नाटक करना.

 

 

 

इससे बहेलिया हमें मुर्दा समझ कर एक एक कर निकालने लगेगा, लेकिन ध्यान रहे हमें तब तक नाटक करना होगा जब तक आखिरी हंस ना निकल जाए और जैसे ही आखिरी हंस निकलेगा मैं इशारा करूंगा और सभी एक साथ उड़ जाना.

 

 

 

सुबह बहेलिया आया और हंसों ने वही किया . बहेलिया उन्हें मरा समझकर बाहर निकलाता गया और अक्लमंद हंस का इशारा पाते ही सभी हंस उड़ गए और बहेलिया माथा पिटता रह गया.

 

 

 

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