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Panchatantra story

panchatantra story कबूतर और चूहा

शिकार shekh chilli
शिकार shekh chilli
Written by Hindibeststory

panchatantra story कबूतर और चूहा एक बार की बात है. कबूतरों का एक दल आसमान में भोजन की तलाश में उड़ता जा रहा था. गलती से वह दल भटककर ऐसे प्रदेश के ऊपर से गुजरा, जहां भयंकर अकाल पडा था. कबूतरों का सरदार बड़ा चिंतित हुआ. कबूतर बहुत ही भूखे थे. कहीं खाने को कुछ नहीं दिख रहा था. हर जगह सिर्फ सिर्फ धुल ही उड़ रही थी. भयंकर अकाल था. कबूतरों के शरीर की शक्ति समाप्त होती जा रही थी. शीघ्र ही भोजन की आवश्यकता थी. दल का युवा कबूतर सबसे नीचे उड रहा था. भोजन नजर आने पर उसे ही बाकी दल को सुचित करना था. बहुत समय उडने के बाद कहीं वह सूखाग्रस्त क्षेत्र से बाहर आया. नीचे हरियाली नजर आने लगी तो भोजन मिलने की उम्मीद जगी. युवा कबूतर और नीचे उडान भरने लगा. तभी उसे नीचे खेत में बहुत सारा अन्न बिखरा नजर आया “चाचा, नीचे एक खेत में बहुत सारा दाना बिखरा पडा हैं. हम सबका पेट भर जाएगा ” वह ख़ुशी से चिल्लाया .

सरदार ने सूचना पाते ही कबूतरों को नीचे उतरकर खेत में बिखरा दाना चुनने का आदेश दिया. सारा दल नीचे उतरा और दाना चुनने लगा. वास्तव में वह दाना पक्षी पकडने वाले एक बहलिए ने बिखेर रखा था. बहेलिये ने पेड़ पर जाल फंसा रखा था. जैसे ही कबूतर दल दाना चुगने लगा, जाल उन पर आ गिरा. जाल गिरते ही सारे कबूतर फंस गए.

कबूतरों के सरदार ने माथा पीटा “ओह! यह तो हमें फंसाने के लिए फैलाया गया जाल था. भूख ने मेरी अक्ल पर पर्दा डाल दिया था. मुझे सोचना चाहिए था कि इतना अन्न बिखरा होने का कोई मतलब हैं. अब पछताए होत क्या, जब चिडिया चुग गई खेत?”

एक कबूतर रोने लगा “हम सब मारे जाएंगे.”

बाकी कबूतर तो हिम्मत हार बैठे थे, पर सरदार गहरी सोच में डूबा था. एकाएक उसने कहा “सुनो, जाल मजबूत हैं यह ठीक हैं, पर इसमें इतनी भी शक्ति नहीं कि एकता की शक्ति को हरा सके। हम अपनी सारी शक्ति को जोडे तो मौत के मुंह में जाने से बच सकते हैं.”

कबूतर और चूहा

युवा कबूतर फडफडाया “चाचा! साफ-साफ बताओ तुम क्या कहना चाहते हो. जाल ने हमें तोड रखा हैं, शक्ति कैसे जोडे?”

सरदार बोला “तुम सब चोंच से जाल को पकडो, फिर जब मैं फुर्र कहूं तो एक साथ जोर लगाकर उडना.”

सबने ऐसा ही किया .. तभी बहेलिया भागा भागा आया. जाल में कबूतरों के फंसा देख उसकी आँखों में चमक आ गयी. वह तेजी जाल की और दौड़ा.
बहेलिया जाल से कुछ ही दूर था कि कबूतरों का सरदार बोला “फुर्रर्रर्र!”

सारे कबूतर एक साथ जोर लगाकर उडे तो पूरा जाल हवा में ऊपर उठा और सारे कबूतर जाल को लेकर ही उडने लगे. यह देख बहेलिया हैरान रह गया. वह तेजी से उनके पीछे भागने लगा. कबूतर का सरदार समझ गया ज्यादा देर तक इस तरह हम नहीं उड़ सकते . हम शिकारी के हाथ फिर से आ जायेंगे. सरदार ने फिर दिमाग लगाया . वह झाड़ियों और काँटों के रास्तों से उड़ने लगा. अब यह बहेलिये के लिए संभव नहीं था. वह रास्ता बदलकर उनके पीछे दौड़ने लगा. निकट ही एक पहाडी पर बिल बनाकर उसका एक चूहा मित्र रहता था. सरदार ने कबूतरों को तेजी से उस पहाडी की ओर उडने का आदेश दिया. पहाडी पर पहुंचते ही सरदार का संकेत पाकर जाल समेत कबूतर चूहे के बिल के निकट उतरे.

सरदार ने मित्र चूहे को आवाज दी . चूहे ने पूछा , मित्र यह कैसे हुआ. सरदार ने संक्षेप में सारी बात बता दी . कुछ ही देर में चूहे ने जाल काट दिया. सरदार ने अपने मित्र चूहे को धन्यवाद दिया और सारा कबूतर दल आकाश की ओर आजादी की उडान भरने लगा. इस कथा से दो सीख मिलती है. पहली कि एकता में बहुत शक्ति होती है. एकता से बड़ी से बड़ी कठिनाई से पार पाया जा सकता है और दूसरी की मित्रता से बड़ा रिश्ता नहीं होता है. मित्रों आपको यह panchatantra story कबूतर और चूहा कैसी लगी जरुर बताएं और panchatantra story कबूतर और चूहा की तरह की कहानी के लिए इस ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब करें और दूसरी hindi kahani के लिए नीचे की लिंक पर क्लिक करें.

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