hindi panchatantra stories

Panchatantra Stories in hindi हिंदी पंचतंत्र की १४ खूबसूरत कहानियां

Panchatantra Stories hindi
Written by Abhishek Pandey

Top 14 Panchatantra Stories in Hindi – पंचतंत्र की कहानियां हिंदी में

 

 

 

Panchatantra Stories in hindi एक कंजूस धोबी के पास एक गधा था. धोबी उस गधे से खूब काम लेता, लेकिन गधे के चारे का कोई प्रबंध नहीं करता. बस रात को गधे को चरने के लिए खुला छोड़ देता. निकट में कोई चारागाह नहीं था.

 

 

 

जंगल में बड़े जानवरों का भय था. इससे गधा बहुत ही कमजोर हो गया था. एक रात उसकी मुलाक़ात एक गीदड़ से हुई. गीदड़ बोला, ” अरे, गद्धूराम तू तो बड़ा कमजोर हो गया है बे. तेरा मालिक खाने-पीने को कुछ नहीं देता है क्या?”

 

 

 

गधे ने दुखी स्वर में सारी रामकहानी कह सुनाई.गीदड़ को बड़ी दया आई. वह बोला, ” सुन भाई! आज से अपुन तेरा दोस्त है. अब समझ तेरे गरीबी के दिन ख़त्म हो गेले हैं.अभी अपुन जैसा बोलरेला है वैसा इच का. तू मस्त मोटा-तगड़ा आइटम हो जाएगा बॉस.”

 

 

 

गधा गीदड़ के पीछे चल पड़ा. एक गुप्त मार्ग से होते हुए दोनों एक सब्जी के बाग में आ पहुंचे. वहाँ तरह- तरह की सब्जियां उगी हुई थीं. खीरे, ककड़ी, टोरी, गाजर, बैगन की बहार थी. गधा तो दंग रह गया. उसने पेट भरकर सब्जिया खाई और डकार लेते हुए बोला,” भाई मज़ा आ गया. बड़े दिनों बाद पेट भरा है”.

 

 

 

अबे धीरे बोल नहीं तो इधर का वाचमैन लोग बहुत डेंजर है. इधर इच तेरी समाधि बना देंगा. अभी उन दोनों की यह रोज की आदत हो गयी. धीरे- धीरे गधे की तबियत सुधरने लगी. यह देखकर गधे का मालिक भी बड़ा खुश था. अब गधा दोगुना काम करता. वह अपनी भुखमरी के दिन भूल गया था.

 

 

 

एक रात गधे खूब छककर सब्जियां खायी. उसकी तबियत एकदम मस्त हो गयी.वह झूमने लगा और अपना मुंह ऊपर उठाकर कान फड़फडाने लगा. यह देखकर गीदड टेंशन में आ गया. वह बोला, “ब्रो, क्या होरेला है तुमको. तबियत तो बराबर है ना”.

 

 

“ओये यार, आज अपुन का गाने का मन कररेला है”. गधा बोला

 

 

ओये तुम तो हमारी भाषा बोलता है रे बाबा.बात इधर गाने का नहीं रे. तुमको अपुन बताया था ना इधर का वाचमैन लोग बहुत डेंजर है. सिर्फ खाने का पीने का मस्त रहने का. लेकिन गीदड़ के लाख समझाने पर भी गद्धूराम नहीं माना.

 

 

 

गधा गीदड़ से झगड़ा करने लगा. इधर गीदड़ को वाचमैनो के जागने का एहसास हो गया था. उसने गद्धूराम को बोला” भाई देख, अभी तक मैंने तेरा गाना कभी सूना नहीं. तू मेरे सामने पहली बार गायेगा तो तेरे सम्मान के वास्ते अपुन माला लेकर आता है.

 

 

 

मेरे आने के पहले तुम मत गाना.” यह कहकर गीदड़ तेजी से भागा और इधर गधे का तो मौसम बन गया था. उसने रेंकना शुरू किया. उसकी आवाज सुनकर चकिदार लाठी लेकर दौड़ पड़े और उसकी बड़ी पिटाई कर दी. अब गधा तो गया ही बेचारे गीदड़ का भोजन भी गया.

 

 

 Stories in Hindi – चतुर खरगोश और हाथी की कहानी – पंचतंत्र की कहानी

 

 

२-Panchatantra Stories in hindi- एक जंगल में हाथियों का एक झुण्ड रहता था. उनका सरदार बहुत ही समझदार और सुलझा हुआ हाथी था. एक बार बड़ा ही भीषण सूखा पड़ा. कई वार्षों तक बार्ष नहीं हुई. पेड़-पौधे सुखने लगे. धरती फट गयी. पुरे जंगल में हाहाकार मच गया.

 

 

 

हर कोई इधर – उधर भागने लगे. हाथियों ने अपने सरदार से कहा, ” कुछ कीजिये. ऐसे तो हम लोग मर ही जायेंगे.बच्चो की तड़प देखि नहीं जा रही है”. सरदार पहले से ही चिंतित था. उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या किया जाए.

 

 

 

 

वह गहरी सोच में डूब हया और अचानक चहक कर बोला, ” दादा जी बताते थे की यहाँ से पुरब की दिशा में एक बहुत ही बड़ा ताल है. वह भूमिगत जल से जुड़े होने कारण कभी नहीं सूखता है. हमें वहाँ चलना चाहिए”.

 

 

 

 

सभी हाथी उस तरफ चल दिए. कई दिनों के बाद वे वहाँ पहुंचे तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. वहाँ खूब पानी था. हाथियों ने खूब मजे से जलक्रीडा की.

 

 

 

 

उसी क्षेत्र में खरगोशों की बड़ी घनी आबादी थी. सैकड़ों खरगोश हाथियों के पैरों तले कुचल कर मर गए. बहुत से घायल हुए. उनके बिल रौंद गए. खरगोशों में हाहाकार मच गया.

 

 

 

एक खरगोश ने कहा हमें यहाँ से भाग जाना चाहिए. कई खरगोशों ने उसका समर्थन किया. उसमें एक बहुत ही चतुर खरगोश था. उसने कहा भागना उचित नहीं है.

 

 

 

हमें उनसे बात करनी चाहिए. एक हाथी बोला यह तो ठीक है, लेकिन हम क्या बात करेंगे? क्या हम उन्हें यहाँ से जाने को कहेंगे? क्या वे हमारी बात मानेंगे? इस पर चतुर खरगोश बोला, ” हाथी अन्धविश्वासी होते हैं. हम चंद्रवंशी है. तुम्हारे इस जघन्य अपराध से चंद्र देव तुम लोगों पर रुष्ट हो गए हैं. अगर तुम लोग यहाँ से नहीं गए तो वे तुम्हारा विनाश जरुर करेंगे.”

 

 

 

लेकिन अगर हाथी नहीं माने और बोले कहाँ हैं चन्द्रमा तो क्या होगा? एक खरगोश चिंतित स्वर में बोला.

 

 

 

उचित प्रश्न है. लेकिन मैं इसे आसानी से कर लूँगा. मैंने इसका भी प्लान तैयार रखा है. चतुर खगोश बोला.

 

 

 

चतुर खरगोश हाथियों के सरदार के पास गया और प्लान के मुताबिक़ सब कुछ कह डाला. लेकिन वही हुआ जिसका डर था. हाथियों के सरदार ने प्रश्न किया, कहाँ हैं चंद्र देव? मैं स्वयं उनका दर्शन कर उन्हें प्रणाम करना चाहता हूँ.

 

 

जैसा आप उचित समझे. आज की रात असंख्य मृत खरगोशों को श्रद्धांजलि देने के लिए चंद्र देव स्वयं ताल पर पधारेंगे. आप आईये और उनका आशीष लीजिये, लेकिन ध्यान रखियेगा वह आपसे और अन्य हाथियों से बहुत ही क्रुद्ध हैं और अगर आप नहीं आते हैं तो वे खुद यहाँ आयेंगे और सबका सर्वनाश कर देंगे” चतुर खरगोश बड़ी ही ऊर्जा से बोला.

 

 

 

हाथियों का सरदार इससे बहुत ही डर गया. वह रात्री में ताल पर आया . वहाँ का माहौल एक अजीब तरह का हो गया था. सभी खरगोशों में रोष और क्रोध था. यह सब पूरी तरह से प्लान किया गया था.

 

 

 

चतुर खरगोश हाथी को जल के पास ले गया और बोला चंद्र देव आपसे बहुत ही क्रुद्ध हैं. जैसे हाथी पानी के निकट पहुंचा उसके सूंड से निकली हवा से पानी में हलचल हुई और चाँद का प्रतिबिंब कई भागो में बंट गया और विकृत हो गया.

 

 

 

यह देखकर हाथियों का सरदार घबरा गया और पीछे हट गया. यह देखते ही सारे खरगोश चंद्रदेव की जयकार करने लगे. उनके जयघोष में उग्रता थी.

 

 

 

 

अब हाथियों का सरदार बेहद डर गया और उसके बाद समस्त हाथियों के साथ रातो रात पलायन कर गया. अब खरगोशो को शान्ति मिली. हाथियों के जंगल वापस लौटने के कुछ ही दिनों बाद तेज वर्षा हुई और पानी की समस्या का निवारण हो गया और हाथी भी ख़ुशी से रहने लगे. इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है की चतुराई से बलवान दुश्मन को भी हराया जा सकता है.

 

 

 

Panchatantra stories in Hindi with moral – पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानियां

 

 

 

३-Panchatantra Stories in hindi- एक गाँव में एक जुलाहा रहता था. वह बड़ा ही गरीब था.उसकी शादी बचपन में हो गयी थी. अब उसे अपनी बीवी को ससुराल से लाना था .बीवी के आने के बाद खर्चा बढ़ना सुनिश्चित था. यही चिंता उसे खाए जा रही थी.

 

 

 

 

उसपर इस साल अकाल पड़ गया था. बेचारा जुलाहा हैरान परेशान हो कुछ कमाने के लिए शहर को निकला. उसने शहर में छोटे – मोटे काम किये और कुछ पैसे जुटा लिए.

 

 

 

तब तक गाँव वालों से पता चला कि अच्छी बारिश हुयी है तो वह खुश हुआ और घर की तरफ चल पड़ा. रास्ते में उसे एक ऊंटनी नजर आई. वह बीमार और गर्भवती थी.

 

 

 

 

जुलाहे को उसपर दया आ गयी. वह उसे घर लाया और खूब सेवा की. ऊंटनी स्वस्थ हो गयी और एक ऊँट के बच्चे को जन्म दिया. ऊँट का बच्चा जुलाहे के लिए बहुत ही भाग्यशाली सिद्ध हुआ.

 

 

 

 

हुआ यूं की एक कलाकार गाँव के जीवन पर चित्र बनाने गाँव आया हुआ था तो पेंटिंग के ब्रश बनाने के लिए जुलाहे के यहाँ से ऊँट के बच्चे के दुम का बाल ले जाता.

 

 

 

 

 

इधर ऊंटनी भी अच्छा दूध देती तो जुलाहा उसे बेचता. कुछ दिनों बाद जब कारीगर ने पेंटिंग बेचीं तो उसे खूब पैसा मिला तो उसमें से काफी पैसा उसने जुलाहे को भी दिया.

 

 

 

जुलाहा ऊँट के बच्चे से बड़ा खुश था. उसने प्यार से बाजार से एक घंटी लाकर ऊँट के बच्चे को पहना दी. अब उसके पास खूब पैसे हो गए थे. उसने अपनी दुल्हन का गौना भी करा लिया.

 

 

 

वह अपना व्यापर बढ़ाना चाहता था तो उसने सोचा क्यों ना ऊँट का व्यापारी ही बना जाए. उसने अपनी पत्नी से बात की तो पत्नी भी सहमत हो गयी. जुलाहे ने कुछ ऊँट ख़रीदे और उसकी नसीब इतनी तेज थी की व्यापार चल निकला.

 

 

 

 

इन सब की वजह वह ऊँट के बच्चे को ही मानता था. धीरे – धीरे ऊँट का बच्चा जवान हो गया था. जुलाहे ने उसका नाम प्यार से घंटाधारी ऊँट रखा था.

 

 

 

 

घंटाधारी ऊँट को इससे घमंड हो गया था. वह टोली के एनी ऊंटों को भी बताने से नहीं चुकता की वह श्रेष्ठ है. जुलाहा जब भी ऊंटों को चरने के लिए छोड़ता तो घंटाधारी ऊँट दुसरे ऊंटों से दूर ही रहता.

 

 

 

चारागाह से जंगल थोड़े ही दूर पर था. एक शेर कई दिनों से ऊँटो की टोली पर नजर गडाए हुए था. शेर जब भी किसी जानवरों के झुण्ड पर आक्रमण करता है तो वह झुण्ड से अलग हुए जानवर को ही चुनता है और घंटाधारी ऊँट के घंटे तो और भी काम आसान कर दिया था.

 

 

 

 

जब शाम के समय टोली वापस आ रही थी. थोड़ा अन्धेरा हो चला था. मौक़ा पाकर शेर ने घंटाधारी ऊँट पर हमला कर दिया और उसे जंगल में खीच ले गया. सीख- जो स्वयं को श्रेष्ठ समझता है उसका अहंकार शीघ्र ही उसे ले डूबता है.

 

 

 

Story Of Panchatantra – बोलती गुफा स्टोरी – Bolati Gufa Story

 

 

४- Panchatantra Stories in hindi–  एक घने में जंगल में एक शेर रहता था. एक दिन उसके पैर में काँटा चुभ गया. काँटा चुभने के कारण उसका चलना मुश्किल हो गया और इस वजह से वह शिकार भी नहीं कर पा रहा था और वह काफी कमजोर हो गया.

 

 

 

शेर कभी भी मरा हुआ शिकार नहीं खाता, लेकिन मरता क्या न करता वह मरे हुए शिकार को खोज में भटकने लगा, जिससे भूख मिटाई जा सके, लेकिन उसकी नसीब बड़ी ही खराब थी.

 

 

 

उसे मरा हुआ जानवर भी नहीं मिला. चलते- चलते वह एक गुफा के पास आ पहुंचा. गुफा गहरी और संकरी थी. वह गुफा के अन्दर झाँका तो उसमें कोई नहीं था , लेकिन उसमें किसी जानवर के होने प्रमाण नजर आये. शेर सोचा वह जानवर बाहर गया होगा. क्यों ना इस गुफा में छुपकर बैठ जाता हूँ और जैसे ही जानवर आएगा, उसे खा जाऊँगा.

 

 

 

उस गुफा में एक सियार रहता था. वह बड़ा ही चालाक था. वह सूरज डूबने के साथ ही वापस लौटा तो उसे शक हुआ.उसने सोचा और एक तरकीब निकाली. गुफा के मुहाने से दूर जाकर सियार ने आवाज दी ” गुफा ओ गुफा” गुफा से कोई आवाज नहीं आई.

 

 

 

 

सियार ने फिर आवाज लगाईं ” गुफा ओ गुफा, क्या हो गया है आज तुझे? तू बोलती क्यों नहीं है?” भीतर शेर दम साधे बैठा था. भूख के मारे जान जा रही थी.

 

 

 

वह बस यही सोच रहा था कब सियार आये और वह उसे अपने पेट में पहुंचाए. तभी सियार फिर जोर से बोला “ओ गुफा, रोज मेरे पुकार का जवाब देकर तू अन्दर बुलाती थी. आज क्या हो गया तुझे? मैंने पहले कह दिया है तू मुझे अगर नहीं बुलाएगी तो मैं गुफा में नहीं आउंगा. मैं जा रहा हूँ?”

 

 

 

जाने की बात सुनते ही शेर हडबड़ाया. उसने सोचा लगता है गुफा सच में सियार को अन्दर बुलाती होगी. उसने तुरंत ही आवाज बदलकर बोला” सियार राजा, अन्दर आ जाओ.

 

 

 

मैं कब से तुम्हारी राह देख रही थी”. सियार शेर की आवाज पहचान गया और उसकी मुर्खता पर हंसता हुआ चला गया और फिर कभी लौटकर नहीं आया. मुर्ख शेर भूखा- प्यासा उसी गुफा में मर गया. सीख: सतर्क व्यक्ति को जीवन में कोई मार नहीं सकता है. 

 

 

 

Panchatantra stories in Hindi with moral values शरारती बन्दर की कहानी

 

 

Panchatantra Stories in hindi with moral

Panchatantra Stories in hindi

 

 

 

५- एक शहर में एक बहुत ही भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा था. मंदिर में लकड़ी का बहुत अधिक काम था सो बहुत सारे मजदूर काम पर लगे थे. इधर उधर लकड़ी के गट्ठर पड़े थे.

 

 

 

मजदूर तेजी से लकड़ी चीरने का काम कर रहे थे. एक दिन की बात है. वहाँ बंदरों एक झुण्ड रहता था जो बड़े ही ध्यान से मजदूरों के कार्य को देखता था, लेकिन उसमें एक बड़ा ही शैतान बन्दर था वह बहुत ही ध्यान से लकड़ी काटने के कार्य को देखता था.

 

 

 

एक दिन की बात है सभी मजदूर दोपहर में खाना खाने को गए और एक लकड़ी अधचिरा लठ्ठा वहाँ रखा हुआ था. उसमें मजदूरों ने एक कीला फंसा कर उसे रखा था, जिससे वापस आरी घुसाने में आसानी हो.

 

 

तभी बंदरों का झुण्ड वहाँ आ पहुंचा और उछल कूद करने लगा. शरारती बन्दर सभी चीजों से छेड़छाड़ करने लगा. बंदरों के सरदार सबको ऐसा करने से मना किया.

 

 

 

सारे बन्दर पेड़ों पर चढ़ गए , लेकिन वह शरारती बन्दर उसका आदेश नहीं माना और वहाँ रखे सामानों से छेड़छाड़ करने लगा. तभी उसकी नजर अधचिरे लठ्ठे पर पड़ी.

 

 

 

उसके दिमाग में खुराफात सोची.उसने वहाँ पड़ी आरी उठाई और उस लठ्ठे को काटना शुरू किया. उसमें से ” किर्र – किर्र” की आवाज आई . इससे वह चिढ गय्या और आरी पटक दी. तभी उसने सोचा इस लट्ठे में कीला क्यों घुसाया हुआ है. उसने उस कीले को निकालना शुरू किया.

 

 

 

वह खूब जोर आजमाइश करने लगा. कभी उचल कर उधर जाता तो कभी इधर. कीला बहुत ही मजबूती से लगाया जाता. इतनी आसानी से नहीं निकलता है.

 

 

 

लेकिन वह बन्दर इसे अपमान समझ लिया. उसने खूब जोर लगाया और कीला थोड़ा सा हिला. बन्दर को अपनी ताकत पर नाज हुआ. उसने ” खों – खों ” कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया.

 

 

उसके बाद उसने फिर से जोर लगाया और किला निकल गया, लेकिन दो पाटों के बीच उसकी पूंछ फंस गयी. वह जोर से चिल्लाया. तभी मजदूर वापस लौटे.

 

 

 

उन्हें देख वह डर गया और भागने के लिए उसने जोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गयी . वह चीखता चिल्लाता वहाँ से भागा. सीख – बिना सोचे – समझे कोई काम नहीं करना चाहिए.

 

 

Panchatantra ki Kahani पंचतंत्र की कहानी

 

 

 

6- Panchatantra Stories in hindi – एक वन में एक बहुत ही बड़ा और क्रूर अजगर था. वह जब भी बिल से निकलता तो सारे जानवर डरकर भागने लगते. एक बार अजगर शिकार की तलाश में था.

 

 

 

अगल बगल के सारे जानवर भाग निकले थे. वह गुस्से से लाल हो गया और फुफकार मारने लगा और इधर उधर आहार की खोज करने लगा. वही नजदीक में एक हिरणी अपने नवजात बच्चों को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर भोजन की तलाश में गयी थी.

 

 

 

अजगर की तेज फुफकार से पत्तियां उड़ने लगी और हिरणी के बच्चे दिख गए. इतना भयानक जानवर देख हिरणी के बच्चे सहम गए और देखते ही देखते अजगर उन्हें निगल गया.

 

 

 

तब तक हिरणी भी आ गयी थी. वह बेचारी असहाय कर भी क्या सकती थी. उसे बड़ा ही दुःख हुआ. उसी जंगल में उसकी दोस्ती एक नेवले से थी. उसने नेवले को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई.

 

 

 

 

इस पर वह बोला, ” बहन मेरा बस चलता तो अभी उस दुष्ट अजगर को मार डालता. लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ. वह तो मुझे एक झटके में मार देगा. लेकिन वहीँ पास में चीटियों की एक बाम्बी है. वहाँ की रानी चींटी मेरी मित्र है. मैं उससे बात क्कारता हूँ. शायद वह कुछ करे.”

 

 

 

हिरणी निराश होकर बोली” तुम तो इतने बड़े जानवर होकर उसका कुछ नहीं कर सकते तो चींटी भला क्या कर पाएगी.” इस पर नेवला बोला ऐसी बात नहीं है.

 

 

 

चींटी के पास बहुत ही बड़ी सेना है और संगठन में बड़ी शक्ति होती है. नेवले की बात से हिरणी को आशा नजर आई. दोनों चींटी के पास पहुंचे और सारी कहानी बताई.

 

 

 

चींटी से कुछ देर सोचा और बोली, ” ठीक है. हम तुम्हारी सहायता करेंगे. उस दुष्ट अजगार को सजा मिलनी ही चाहिए. चींटी ने कहा हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीला रास्ता है.तुम किसी तरह अजगर को उस रास्ते पर आने को मजबूर करो. बाकी काम हम कर लेंगे” नवाले को चींटी पर पूरा विश्वास था. वह तैयार हो गया.

 

 

 

 

अगले नेवला अजगर की बिल के पास और उसे बोली बोलकर उकसाने लगा. क्रोध में अंधा अजगर बिल से निकला. नेवला प्लान के मुताबिक़ उसी संकरे रास्ते की दिशा में दौड़ पड़ा.

 

 

 

 

अजगर भी पीछे चल पड़ा. अजगर जब रुकता तो नेवला उसे और गुस्सा दिलाता और क्रोध में अंधा अजगर फिर से उसे दौड़ाने लगता.इसी तरह नेवला उसे संकरे रास्ते पर आने को मजबूर कर दिया.

 

 

 

संकरे रास्ते से गुजरते ही अजगर की देह छिलने लगी. जब वह उस रास्ते से बाहर निकला तो उसका बदन्न काफी छिल गया था और काफी खून निकल रहा था.

 

 

 

तभी चींटियों की सेना ने अजगर पर हमला कर दिया. चींटियाँ उसके शारीर के नंगे मांस को काटने लगी. अजगर तड़प उठा. वह अपने शरीर को पटकने लगा और इससे उसे और भी घाव होने लगे और चींटियों ने हमला तेज कर दिया. कुछ ही देर में अजगर तड़प – तड़पकर पर गया.

 

 

सीख- संगठन की शक्ति बड़ों – बड़ों को धुल चटा देती है.

 

 

 

Short Stories in Hindi लघु कहानियां

 

 

७-Panchatantra Stories in hindi-  एक जंगल में एक बहुत ही विशाल पेड़ था. उस पेड़ पर बहुत सारे हंस रहते थे. उसमें एक हंस जो कि सबसे उम्रदराज था वह बहुत ही तेज दिमाग वाला और दूरदर्शी था. सभी हंस उसकी बहुत इज्ज़त करते थे.

 

 

 

एक उसने देखा कि एक नन्हीं सी बेल पेड़ से लिपट रही है. उसने अन्य हंसों से कहा कि इस बेल को दूर कर दो नहीं तो यह कभी भारी मुसीबत लाएगी.

 

 

इस पर एक युवा हंस बड़े ही जोश से बोला” अरे यह छोटी सी बेल हमारा क्यया बिगाड़ेगी. आप झूठे ही परेशान हो रहे हैं”

 

 

दूरदर्शी हंस ने उसे समझाया, ” बेटा हमने दुनिया देखी है. तुम अभी छोटे हो. तुम्हें इन सब का ज्ञान नहीं है. छोटी सी मुसीबत कल को बड़ी बन जाती है. हब यह बेल काफी बड़ी होकर और भी  मजबूती से पेड़ को लपेट लेगी तो यह सीढ़ी का काम करेगी और कोई भी इस पेड़ पर आ जाएगा”.

 

 

युवा हंस को बड़ा ही बुरा लगा. वह बोला आप खाली अपनी बात मनवाने की कोशिश कर रहे हो बस. ऐसा कुछ नहीं होता है.

 

 

 

“ठीक है भाई. अगर तुम्हे यही लगता तो जाने दो” दूरदर्शी हंस बोला

 

 

समय बीता और समय के साथ ही बेल मजबूती से पेड़ को लपेटने लगी. अब बाकी हंसों को इसकी चिंता होने लगी. उन्हें अपने किये पर पछतावा हो रहा था. अगर वे उसी दिन हंस की बात मां लेते तो ऐसा नहीं होता.लेकिन अब तो तीर कमान से निकल चुका था.

 

 

 

एक दिन जब हंस दाना चुगने गए तो एक बहेलिया आया और उसने पेड़ पर अपना जाल बिछा दिया. वह कई दिनों से उस पेड़ पर नजर रख रहा था. शाम को जब हंस वापस लौटे तो जाल में फंस गए और छटपटाने लगे.

 

 

दूरदर्शी हंस चुपचाप बैठा था. वह भी इन मुर्ख हंसों की वजह से फंस गया था. दुसरे हंस अपने किये पर शर्मिन्दा थे. एक ने उस दूरदर्शी हंस से बोला, ” हम अपने किये पर शर्मिन्दा हैं और माफ़ी माँगते हैं. अब आप ही हमें बचा सकते हो”.

 

 

 

दुसरे हंस भी मांफी माँगने लगे. वह युवा हंस रोने लगा. तब दूरदर्शी हंस बोला,” ठीक है. सभी मेरी को ध्यान से सुनो. जैसे ही बहेलिया आयेगा सभी लोग मरने का नाटक करना. बहेलिया एक एक हंस को जाल से बाहर आएगा. लेकिन तब तक कोई नहीं उड़ेगा जब तक आखिरी हंस बाहर ना आ जाए. जैसे ही आखिरी हंस बाहर आएगा मैं इशारा करूंगा और सभी लोग उड़ जाना”.

 

 

 

सुबह बहेलिया आया. हंसों ने ठीक वैसा ही किया. बहेलिया हंसों को मरा हुआ समझ जमीं पर रखने लगा. जैसे ही अंतिम हंस को बहेलिया जमीन पर रखा वैसे ही दूरदर्शी हंस इशारा किया और सभी हंस एक साथ उड़ निकले. बहेलिया हाथ मलता रह गया.

 

 

सीख:- छोटी मुसीबत ही बड़ी होती है. उसे छोटे पर ही ख़त्म कर देना चाहिए. 

 

 

 

Panchatantra Stories in Hindi with Moral

 

Panchatantra Stories

Panchatantra Stories in hindi

 

 

 

 

8- एक जंगल में विशालकाय हाथी रहता था. उसे अपनी ताकत पर बड़ा ही घमंड था. वह जिस तरफ से निकलता वहाँ पेड़ों को तोड़ देता, सामन इधर उधर फेक देता.

 

 

उसी जंगल में एक चिड़ा और चिड़ी का जोड़ा रहता था. वह बड़े ही खुश थे. चिड़ी अण्डों पर बैठी अपने नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती.

 

 

एक दिन वह मदमस्त हाथी उसी तरफ से गुजरा. उसने वहा खूब उत्पात मचाया. चिड़ा और चिड़ी ने तो उड़कर अपनी जान बचा ली, लेकिन उनके अंडे टूटकर चकनाचूर हो गए और उसी के साथ ही उनक्के सपने भी.

 

 

चिड़ी जोर जोर से रोने लगी. वह कुछ कर भी नहीं सकती थी. तभी वहाँ एक काठफोड़वी आई. वह चिड़ी की सहेली थी. उसने कहा हम ऐसे नहीं बैठ सकते. इस दुष्ट हाथी को सबक सिखाना ही होगा.

 

 

चिड़ी रोते हुए बोली ” हम कैसे इस विशालकाय हाथी से मुकाबला कर सकते हैं”.

 

 

कठफोड़वी ने उसे समझाया ” हमें अपनी शक्ति बढानी होगी. मेरा एक भवरा  मित्र है. हमें उसकी सलाह लेनी चाहिए”.

 

 

 

सभी भवरे के पास पहुंचे. उसने उन्हें हिम्मत दी और बोला ” हम जरुर बदला लेंगे. मेरा एक मित्र मेढक है. वह मेंढको का राजा है. हमें उसके पास चलना चाहिए. वह बहुत ही बुद्धिमान है. वह जरुर कोई उपाय बतायेगा”.

 

 

सभी मेंढक के पास पहुंचे और दुखभरी कहानी सुनाई. रूंधे हुए गले से मेंढक बोला मुझे ज़रा सोचने दो. कुछ समय बाद उसने कहा ” एक बहुत ही अच्छी योजना दिमाग में आई है, लेकिन इसमें सभी को मदद करनी होग”.

 

 

 

सभी तैयार हो गए. मेंढक ने योजना बतायी. सभी चहक उठे. सबने अपने किरदार को बखूबी समझ लिया और अपने मिशन पर जुट गए.

 

 

 

कुछ देर में वह मदमस्त हाथी तोड़फोड़ कर वापस लौट रहा था की इतने में भौरा उसके कान में जाकर गुनगुनाने लगा. राग सुनकर हाथी आँखे बंद कर झुमने लगा, इतने कठफोड़वी ने अपना काम कर दिखाया और उसने हाथी की दोनों आँखे फोड़ दी.

 

 

 

हाथी दर्द से कराह उठा और दिखाए नहीं देने से इधर उधर पागलों सा भागने लगा. इससे उसे चोटें लगीं और वह जोर जोर से चिंघाड़ने लगा और इससे उसे प्यास लगी.

 

 

वह पागलों की तरह इधर उधर भागने लगा. अब मेंढक की बारी थी. मेंढक ने अपनी सेना को एक बड़े और सूखे गड्ढे के किनारे बैठ कर टर्राने को कहा.

 

 

सभी मेंढक एक साथ टर्राने लगे. तर्राहट सुनकर हाथी ने सोचा यहाँ जरुर कोई तालाव या नदी है. वह बहुत ही वेग से आगे बढ़ने लगा और बड़े ही तेजी से उस गहरे और सूखे कुएं में जा गिरा और उसकी तड़प तड़प कर मृत्यु हो गयी.

 

 

सीख- एकता में बल होता है.

 

 

Hindi Panchatantra Stories चतुर खरगोश

 

 

9- Panchatantra Stories in hindi – एक जंगल में एक दुष्ट शेर रहता था. वह जब भी शिकार को निकलता तो बड़ी संख्या में जानवरों को मार डालता था. इससे जंगल में जानवरों की संख्या कम होने लगी.

 

 

इससे जंगल के अन्य जानवर बड़े ही चिंतित हुए. उन्होंने एक मीटिंग बुलाई और प्रस्ताव रखा की हम शेर महाराज से जाकर बात करेंगे कि वे एक साथ में इतने जानवरों को ना मारे. वह इतने जानवरों को खाते तो नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में  मारे जाने के कारण जंगल में जानवर बहुत ही कम बचे हैं.

 

 

 

लेकिन वह हमारी बात मानेंगे? एक जानवर ने आशंका जताई

 

 

“हमें उन्हें जाकर यह बात समझानी होगी और हम उन्हें कहेंगे की उन्हें शिकार करने की कोई आवश्यकता नहीं है. जंगल से रोज एक जानवर उनकी गुफा तक पहुँच जाएगा”  लोमड़ी ने कहा

 

 

 

” हाँ अगर ऐसा हुआ तो हम कुछ दिन और भी जी लेंगे ” निराश मन से सियार बोला.

 

 

 

तय समय पर सभी जानवर शेर की गुफा के पास पहुंचे. एक साथ इतने जानवर देखकर पहले तो शेर घबरा गया, लेकिन फिर साहस कर तेव्ज आवाज में बोला, ” क्या हुआ. सभी को आज ही मरना है क्या”?

 

 

तभी हिरन ने हिम्मत कर सारी बात बता दी. शेर ने सोचा बात तो सही है. अगर सारे जानवर मर गए तो मुझे भी भूखा रहना होगा और अगर ऐसा होता है तो मुझे मेहनत भी नहीं करनी होगी.

 

 

वह मान गया, लेकिन उसने चेतावनी दी अगर कीसी दिन कोई जानवर नहीं  आया तो पुरे जंगल के सभी जानवरों को मार दूंगा.

 

 

हिरन ने कहा ऐसा कभी नहीं होगा. इसके बाद नियमित तौर पर एक जानवर शेर के पास जाने लगा और शेर भी मस्त बिना मेहनत के खा खाकर मोटा हो गया.

 

 

 

एक दिन एक खरगोश का नंबर आया. वह बड़ा ही चालाक था.  उसने सोचा शेर के हाथों मरने से बढ़िया है बचने की कोई तरकीब निकाली जाए. उसने दिमाग लगाया और उसे एक  बहुत बढ़िया तरकीब मिल गयी.

 

 

 

वह बड़े ही आराम से उछल कूद करते हुए शेर के पास पहुंचा. तब तक काफी देर हो गयी थी. शेर भूख से तड़प रहा था. खरगोश को देखते ही वह गुस्से से बोला, ” लगता है जंगल के जानवर जीना नहीं चाहते हैं. बता तुझे इतना लेट क्यों भेजा. आज सभी जानवरों को मार डालूँगा. एक तो देर से भेजा ऊपर यह पिद्दी सा खरगोश”.

 

 

 

खरगोश ने उसे सलाम किया और बोला, ” इसमें उनका या मेरा कोई कसूर नहीं है. उन्होंने ने और भी छह खरगोश साथ में भेजे थे. लेकिन रास्ते में एक और शेर मिल गया उसने बाकी खरगोशों को मार कर खा गया”.

 

 

 

” एक और शेर ” शेर ने खरगोश की बात को बीच में ही काटकर बोला.

 

 

” जी राजा  साहेब. वह तो मुझे भी मार डालता, लेकिन मैंने उससे कहा कि मैं अपने राजा के पास जा रहा हूँ, तो वह हंसने लगा और बोला सिर्फ मैं ही इस जंगल का राजा हूँ, बाकी लोग मेरी प्रजा हैं. जा अपने राजा को बुलाकर ला.अगर वह डरकर नहीं आया तो कल से कोई भी जानवर उस तक नहीं पहुंचेगा ” खरगोश ने कहा.

 

 

 

गुस्से से लाल शेर बोला, ” चलो मुझे बताओ. कैन है वह दुष्ट? उसे अभी मज़ा चखाता हूँ “. शेर को अपने ताकत पर घमंड हो गया था और वह इस तरह आसानी से मिलने वाला भोजन गवाना नहीं चाहता था.

 

 

 

वह खरगोश के पीछे – पीछे चल दिया. खरगोश उसे एक कुए के पास ले गया और बोला, ” महाराज वह इसी गुफा में राता है. लगता है वह आप पर हमला करने के लिए घात लगा रहा है. आपको आगे बढकर देखना चाहिए “.

 

 

शेर जैसे ही आगे बढ़ा उसे कुएं के पानी में उसका ही प्रतिबिंब दिखा, जिसे वह शेर समझ बैठा. उसने गुस्से में दहाड़ लगाईं तो कुएं में आवाज गूंजी और इससे शेर को बहुत ही गुस्सा आया. उसे लगा अन्दर से दुसरे शेर ने दहाड़ लगाईं है.

 

 

 

वह हमला करने के उद्देश्य से कुएं में कूद गया और पहले कुएं की दीवाल से  टकराया और फिर पानी में गिर गया और उसकी मौत हो गयी. खरगोश जंगल वापस लौटा और सबको यह बात बताई. सभी जानवर खरगोश की जय – जयकार करते हुए खुशियाँ मनाने लगे.

 

 

Best Panchatantra Stories

 

 

१०-Panchatantra Stories in hindi- एक जंगल में एक शेर रहता था और गीदड़ उसका चमचा था. शेर को शेर की बिरादरी से निकाल दिया गया था. क्योंकि यह सबसे झगड़ा करता था.

 

 

शेर शिकार करता और उसे खाने के बाद बचा – खुचा गीदड़ के लिए छोड़ देता. गीदड़ के लिए तो इतना काफी था. वह दिन भर शेर की  चापलूसी करता और मस्त पड़ा रहता.

 

 

एक दिन शेर ने एक बिगडैल सांड से पंगा ले लिया. शेर ने जैसे ही हमला किया सांड ने ऐसी दुलत्ती मारी कि शेर एक पेड़ से जा टकराया. वह जब तक संभलता सांड से उसे सींघ में फंसाकर पेड से रगड़ दिया.

 

 

 

किसी तरह से शेर जान बचाकर वहाँ से भागा. सांड के हमले से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. ऐसे में उसका शिकार करना भी छूट गया. शिकार करना गीदड़ के बस की बात थी नहीं. अब तो फाकों का दौर चल पड़ा.

 

 

 

शेर को यह डर था कि खाने का जुगाड़ ना हो पाने पर गीदड़ उसका साथ ना छोड़ दे. शेर ने एक दिन गीदड़ से कहा, ” देख, मेरा जख्म काफी गहरा है. मैं शिकार कर नहीं सकता और तेरे से होगा…… चल छोड़ जाने दे तुझे बुरा लगेगा…वैसे मैं कह रहा था तेरे से तो शिकार हो ना पायेगा. तू एक काम कर, किसी मुर्ख जानवर को इधर ला. मैं झाड़ियों में छिपा रहूंगा और मौक़ा देखते ही काम तमाम कर दूंगा”.

 

 

 

 

गीदड़ को शेर ककी बात जम गयी. वह मुर्ख जानवर की तलाश में निकल पड़ा. इसी क्रम में वह एक कसबे के बाहर नदी के घाट पर पहुंचा. उसे वहाँ एक मरियल सा गधा दिखा, जो की शक्ल से ही मुर्ख दिख रहा था.

 

 

 

गीदड़ गधे के पास गया और बोला, ” नमस्ते चाचा. का हाल है? सब मस्त है न? बड़े कमजोर हो गए हो. खाना – वाना नहीं खाते हो का”?

 

 

 

आधा रुआंसा सा बोला, ” क्या बताऊँ, हमार मालिक बड़ा ही मक्खीचूस है. काम खूब कराता है और खाने को कुछ नहीं देता है”.

 

 

” का बात कर रहे हो चचा? अरे ई मालिक लोग खून चूस लेत हैं. एक काम करो, हमारे साथ जंगल चलो. वहाँ हरी – हरी घास खाकर देह तुम्हारी हरी हो जायेगी.

 

 

” अरे ना – ना, राम – राम… हम यहीं ठीक हैं. जंगल में तो जानवर ही हमको चबा जायेंगे. हम जंगल ना जाने वाले” गधे ने तपाक से उत्तर दिया.

 

 

 

” अरे चचा, तुम झूठे ही डर रहे हो. तुम तो जंगल के बाहर रहते हो. तुमको का खबर है जंगल की. जंगल में बाबा बगुला का प्रवचन हुआ था. अब सभी जानवर  शाकाहारी हो गए हैं. बहुत सारे गधे, भैसे और अन्य जानवर जंगल को और चले गए हैं. और बहुत गधियाँ भी गयी है. तुम्हारे लायक बहुत सारी हैं. देख ताक के जीवन बसा लेना”  गीदड़ तो चापलूसी में पीएचडी कर चुका था. उसका रंग गधे पर चढने लगा और गधियों के साथ सुनहरे सपने देखने लगा. कुछ देर सोचकर वह चलने को तैयार हो गया.

 

 

 

 

गीदड़ उसे लेकर उसी झाड़ियों के पास ले गया जहां शेर पहले से छिपा था. लेकिन शेर हमला कर पाता उसके पहले गधे ने शेर की नीली चमकती आँखे देख ली और तेजी से भाग निकला. शेर बोला ” भाई मैं पूरी तरह से तैयार नहीं था. एक बार फिर से कोशिश कर. तू कर लेगा. इस बार नहीं छोडूंगा उसे”.

 

 

 

गीदड़ उस गधे की तलाश में फिर से कसबे में पहुंचा. उसे देखते ही गधा बोला, ” भाई तुम तो कह रहे थे सभी जानवर शाकाहारी हो गए हैं. लेकिन वहाँ शेर क्या कर रहा था”.

 

 

 

” तुम एकदम से भोले ही हो. शाकाहारी हो गए तो क्या जंगल में शेर नहीं रहेंगे. शाकाहारी होने के कारण ही सभी जानवर एक साथ रहते हैं. कोई किसी से डरता नहीं है. वहीँ थोड़ी दूर पर गधी भी थी. तुमने तो उसके सामने गधा जाति की नाक कटवा दी”. गीदड़ ने बड़ी ही चालाकी से कहा.

 

 

 

 

” ओह! ऐसी बात थी. मैं समझ नहीं पाया. चलो चलते हैं. गधी से कुछ बहाना बना लेंगे ” गधे ने कहा.

 

 

गीदड़ ने मन ही मन सोचा ” यह तो महा गधा है” , फिर चलो और गीदड़ फिर से उसे उसी झाड़ियों के पास ले गया और शेर पहले से ही तैयार था. उसने गधे का काम तमाम कर दिया.

 

 

सीख:- किसी की बातों में ना आकर स्वविवेक का इस्तेमाल करना चाहिए.

 

 

 

Panchatantra Stories in hindi Matter पंचतंत्र की सर्वश्रेष्ठ कहानियां

 

 

 

११- एक पहाड़ की ऊंची छोटी पर एक बाज रहता था और पहाड़ की तराई में बरगद के पेड़ पर कौवा रहता था. वह बहुत ही चालाक और धूर्त था. वह हमेशा इसी कोशिश में रहता की बिना मेहनत किये भोजन मिल जाए.

 

 

पेड़ के आसपास खोह में खरगोश रहते थे. जब भी वे बाहर आते बाज तेजी से आता और किसी एक खरगोश को लेकर उड़ जाता. एक दिन कौवे ने सोचा, ” वैसे तो ये खरगोश मेरे हाथ आने से रहे. अगर इनका शिकार करना है तो बाज के जैसा शिकारी बनना होगा “.

 

 

दुसरे दिन कौवे ने भी बाज की तरह खरगोश को पकड़ने के लिए ऊँची उड़ान भरी. अब भला कौवा क्या बाज का मुकाबला करता. खरगोश ने उसे देख लिया और झट से चट्टान के पीछे छिप गया . कौवा खुद को संभाल नहीं पाया और सीधा चट्टान से जा टकराया और उसकी मृत्यु हो गयी.

 

 

सीख- नक्कल के लिए भी अकाल चाहिए होती है.

 

 

पंचत्रंत्र की कहानियां

 

 

 

१२-Panchatantra Stories in hindi-  एक राजा के शयनकक्ष में एक जूं  ने डेरा डाल रखा था. रोज रात को राजा के सोने बाद वह चुपके से निकलती और धीरे से राजा खून चूसकर वापस छिप जाती.

 

 

 

संयोग से एक दिन एक खटमल भी राजा के शयनकक्ष में आ गया. जूं जब उसे देखा तो कहा, ” तुम यहाँ से चले जाओ. यह मेरा क्षेत्र है “. खटमल भी चालाक था.

 

 

उसने कहा, ” मेहमान से ऐसे बात नहीं करते हैं. मैं आज की रात आपका मेहमान हूँ. कल मैं स्वयं चला जाऊंगा “. जूं उसकी बातों में आ गयी लेकिन उसने शर्त राखी की तुम राजा को नहीं काटोगे.

 

 

तब खटमल ने चालाकी से कहा, ” मैं आपका मेहमान  हूँ. मुझे खाने के लिए कुछ तो दोगी न और राजा के खून से बढियां और क्या हो सकता है”.

 

 

” ठीक है. चुपचाप राजा का खून चूस लेना, उसे तनिक भी पीड़ा का एहसास नहीं होना चाहिए ” जूं ने कहा .

 

 

” ठीक है ” खटमल ने उत्तर दिया.

 

 

रात हुई. राजा अपने शयनकक्ष में आया. खटमल ने राजा को काटा. उसे बहुत अच्छा स्वाद लगा. उसने कभी भी ऐसा स्वाद नहीं चखा था. वह जूं की सारी बात भूल गया और राजा को बार-बार काटने लगा.

 

 

 

इससे राजा को तेज खुजली हुई. उसने सेवको को बुलाया और खटमल को मारने को कहा. यह देख खटमल पलंग के पाए के नीचे छिप गया, लेकिन चादर के कोने में बैठी जूं पकड़ में आ गयी. सेवकों ने उसे वहीँ मार दिया.

 

 

 

सीख- कभी भी अजनबी पर विश्वास ना करें.

 

 

हिंदी पंचतंत्र स्टोरीज

 

 

१३- Panchatantra Stories in hindi-  एक जंगल में एक महान ऋषि थे. वह बहुत बड़े तपस्वी थे. उनका रोज का काम था कि वे प्रातः एक नदी पर आते, वहाँ स्नान करते और एक पत्थर के तुकडे पर आसन जमाकर तपस्या करते.

 

 

वहीँ नजदीक में उनकी कुटिया थी. वहाँ वे और उनकी पत्नी रहते थे. एक दिन उनके साथ एक अजीब सी घटना घटी. वे नित्य की भाँती जब पूजा करके अपने हाथ खोले ही थे एक नन्ही सी चुहिया उनके हाथ पर आ गिरी.

 

 

उन्होंने जैसे ऊपर एक चील उड़ती हुई जा रही थी. उनको यह समझते देर नहीं लगी कि यह चुहिया चिल के पंजों से ही छूटकर गिरी है. चुहिया  डर के मारे काँप रही थी.

 

 

ऋषि को कोई संतान नहीं थी और उन्हें यह भी ज्ञात था कि उनके जीवन में संतान सुख नहीं है. पत्नी के कहने पर वे झूठी दिलासा देते रहते थे जो भाग्य में होगा वही होगा.

 

 

उन्हें चुहिया पर दया आ गयी. उनके पास मौक़ा भी था. उन्होंने हाथ में जल लिया और उसे अभिमंत्रित कर चुहिया पर फेंका. चुहिया एक मानव बच्ची में परिवर्तित हो गयी.

 

 

वे उस नन्ही बच्ची को लेकर घर पहुंचे और पत्नी से बोले ” तुम सदा संतान की कामना करती थीं. आज प्रभु ने तुम्हारी प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और यह बच्ची भेज दी. इसे अपनी पुत्री समझकर इसका लालन – पालन करो “.

 

 

 

ऋषि पत्नी बच्ची को देख बहुत प्रसन्न हुई. उन्होंने उसका नाम मयूरी रखा. ऋषि ने अपनी पत्नी से चुहिया वाली घटना का जिक्र नहीं किया उस बच्चीके प्यार में वह भी उस घटना को भुलाने लगे.

 

 

 

ऋषि और उनकी पत्नी बच्ची से बहुत प्यार करते थे. ऋषि पत्नी तो उस बच्ची के प्यार में खुद को भी भूल गयी थीं. वे दिन – रात उसे खिलाने-पिलाने और उसके साथ खेलने में लगी रहतीं.

 

 

समय आने पर ऋषि ने मयूरी को उत्तम शिक्षा दी और अब वह समय आ गया जब मयूरी विवाह योग्य हो गयी. वे बात कर ही रहे थे कि तभी मयूरी वहाँ आ गयी.

 

 

उसने केशों में फूल गूँथ रहे थे. चहरे पर यौवन दमक रहा था. ऋषि ने सोचा पत्नी ठीक ही कह रही है. उन्होंने तपोबल से सूर्यदेव का आव्हान किया.

 

 

सूर्यदेव उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें प्रणाम करते हुए कहा, ” कहिये मुनिवर! क्या आज्ञा है?”

 

 

ऋषि ने मयूरी की और इशारा करके कहा, ” यह मेरी बेटी है. सर्व गुण संपन्न है. मैं चाहता हूँ  की आप इससे विवाह करें.”

 

 

” नहीं पिताश्री, यह तो अग्नि के सामान गर्म हैं और इनके प्रकाश से मेरी आँखे चुंधिया रही हैं. मैं तो ना कभी इनके निकट जा सकुंगी और ना ही इन्हें देख सकुंगी.”

 

 

ऋषिवर बोले, ” ठीक है. हम दूसरा वर देखते हैं”

 

 

उन्होंने सोचा, ” बादल इसमें उपयुक्त रहेगा. वह सूर्य को भी ढँक लेता है. मैं उसे बुलाता हूँ . ” यह सोचकर उन्होंने बादल का आह्वान किया . बादल गरजते हुए, बिजलियाँ चमकाते वहाँ पहुंचा.

 

 

लेकिन उसे देखते ही मयूरी ने कहा, ” पिताश्री! यह तो काले रंग का है और मैं गोरी हूँ और दूसरा यह बार बार बिजली चमका रहा और बिजली से मुझे भय लगता है. मैं इससे विवाह नहीं कर सकती हूँ.”

 

 

इसके बाद ऋषि ने पवन देव का आह्वान किया, लेकिन मयूरी ने उन्हें भी मना कर दिया. फिर पर्वतराज आये लेकिन वो भी मयूरी के मन ना भाये.

 

 

उसके बाद पर्वतराज ने सुझाया कि, ” चूहा इसके लिए श्रेष्ठ वर होगा. वह मुझे भी छेदकर बिल बनाकर उसमें रहता है. ” उनके इतना कहते ही मयूरी ख़ुशी से उछल पड़ी और बोली, ” हाँ पिताजी, मुझे चूहे बहुत प्रिय हैं. उनकी पूंछ और कान कितने खूबसूरत है. मेरा विवाह चूहे से करा दीजिये .”

 

 

पहले तो ऋषि ने इस बात को टाला. फिर मानं गए और उन्होंने चूहे को बुलाया. मयूरी चूहे को देखकर बहुत प्रसन्न हुई. ऋषि ने सोचा मैंने इसे तो मन्त्र के बल पर चुहिया ने मानवी बना दिया परन्तु इसका दिल तो चुहिया का ही रहा. उसके बाद ऋषि ने उसे फिर से चुहिय्या बना दिया और उसका विवाह चूहे के साथ कर दिया.

 

 

सीख- नकली उपायों से स्वाभाव नहीं बदले जा सकते.

 

 

Panchatantra Stories

 

 

१४-Panchatantra Stories in hindi- अचानक हुई मृत्यु के कारण जंगल में राजा सिंहराज का शासन ख़त्म हो गया था. अब पुरे जंगल में अजाराकता का माहौल था. हर कोई अपने मन का मालिक था.

 

 

अशांति, गन्दगी और अजरकता से त्रस्त होकर कुछ सभ्य जानवरों ने मंत्रणा की. उन्होंने कहा, ” जब तक सिंहराज का राज था हर जगह शान्ति थी. सब लोग खुश थे और आज घनघोर अजरकता का माहौल है. अब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है. ऐसे रहा तो जंगल समाप्त हो जायेगा.”

 

 

“सही बात है, लेकिन हम ऐसे हाथ पर हाथ रखकर बैठे तो नहीं रह सकते हैं. हमें कुछ ना कुछ तो करना ही होगा. क्यों ना हम सिंहराज की तरह एक न्यायप्रेमी और ताकतवर राजा चुने.” भालू बोला.

 

 

 

सभी लोग इस पर संतुष्ट हो गए, लेकिन एक बड़ी दुविधा यह थी कि राजा किसको बनाया जाए. इस समय पुरे जंगल में हर कोई राजा ही था. सब लोग मंथन करने लगे.

 

 

तब मोर बोला, ” हम एक काम करते हैं. १५ दिन तक सभी जानवरों में जंगल के कार्यों को बांट देते है. जो सबसे सही कार्य करेगा हम उसे राजा चुन लेंगे. ” सभी लोग मोर की बात पर सहमत हो गए और जंगल के कार्य राजा बनने के इच्छुक  जानवरों में बांट दिए गए.

 

 

लोमड़ी को मिट्टी हटाने का काम दिया गया. बन्दर को पेड़ों की साफ़ सफाई का काम दिया गया. हाथी को एक गड्ढे को पत्थर से भरने का कार्य दिया गया और खरगोश को घास की साफ़ सफाई और उल्लू को रात्रिप्रहरी तथा गिद्ध को दूर तक दुश्मन पर नजर रखने का कार्य दिया गया.

 

 

१५ दिन बीते. सभी जानवर अपने-अपने कार्यों की सूची के उपस्थित हो गए. सभी लोग बहुत ही बढ़िया तरीके से अपने – अपने कार्य को अंजाम दिया था, लेकिन सबमें थोड़ी बहुत कमी रह गयी थी, लेकिन उसमें हाथी का कार्य सबसे खराब था. उसने एक भी पत्थर गड्ढे में नहीं डाले थे.

 

 

अब फिर से समस्या आन पड़ी किसे राजा नियुक्त किया जाए. एक बार फिर से मोर ने उपाय बताया, ” क्यों ना मतदान करा लिया जाए. जो जीतेगा उसे राजा घोषित कर दिया जाएगा.”

 

 

सब जानवर इस पर सहमत हो गए और बोले राजा कोई भी बने मंत्री तो जरुर मोर को ही बनाना चाहिए. मतदान का दिन तय हुआ. सभी ने मतदान किया.

 

 

अब वोटों की गिनती शुरू हुई, लेकिन यह क्या शुरूआती कुछ समय में उल्लू और गिद्ध से पिछड़ने के बाद हाथी ने ऐसी बढ़त बनाई कि वह आखिरी तक आगे रहा और चुनाव जीत गया.

 

 

सभी लोग बड़े आश्चर्यचकित हुए. कोई कह रहा था की चुनाव में धांधली हुई तो कोई कह रहा था की हाथी ताकत के बल पर जीता. अभी गर्मागर्म बहस चल ही रही थी कि इतने पक्षिराज गरुड़ वहाँ पधारे और बोले, ” ना तो चुनाव में कोई धांधली औई और ना ही हाथी महाशय ने अपने ताकत का दुरपयोग किया. असली बात यह है कि जब इन्हें गड्ढे भरने का काम दिया गया था तो उन्होंने देखा कि उसमें कुछ गरुड़ पक्षियों के अंडे रखे हुए थे. उन्होंने अपने राजा बनाने के लालच को त्याग दिया और दया और परोपकार की भावना से पत्थर को वही बगल में रखकर उस गड्ढे को और भी अधिक सुरक्षित कर दिया. फिर जब चुनाव हुए तो जंगल में पक्षियों की संख्या पशुओं से अधिक थी और उन्हें एकमुश्त पक्षियों के वोट हासिल हुये और हाथी महाशय विजयी हुए.”

 

 

सीख- सच्चा शासक वही होता है जो परोपकार की भावना को सर्वोपरि रखे. 

 

 

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Abhishek Pandey

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