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धोबी और गधा की कहानी

धोबी और गधा की कहानी
Written by Abhishek Pandey

धोबी और गधा की कहानी एक गाँव में एक धोबी रहता था. उसके पास एक गधा था, जिसपर वह अपना कपड़ा लादकर नदी पर ले जाता और कपडे धोकर वापस आता था. यह उसका रोज का काम था. लेकिन इस काम से उसका खर्च पूरा नहीं हो पाटा . धोबी का परिवार बडा था. आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया. बेचारे गधे की लिए चारा खरीदने के लिए कुछ नहीं बचता. गांव की चरागाह पर गाय-भैंसें चरती. अगर गधा उधर जाता तो चरवाहे डंडों से पीटकर उसे भगा देते. ठीक से चारा न मिलने के कारण गधा बहुत कमजोर होने लगा. धोबी को भी चिन्ता होने लगी, क्योंकि कमजोरी के कारण उसकी चाल इतनी धीमी हो गई थी कि नदी तक पहुंचने में पहले से दुगना समय लगने लगा था.

 

एक दिन नदी किनारे जब धोबी ने कपडे सूखने के लिए बिछा रखे थे तभी तेज आंधी आई. कपडे इधर-उधर हवा में उड गए. आंधी थमने पर उसे दूर-दूर तक जाकर कपडे उठाकर लाने पडे. अपने कपडे ढूंढता हुआ वह सरकंडो के बीच घुसा. सरकंडो के बीच उसे एक मरा बाघ नजर आया. धोबी कपडे लेकर लौटा और गट्ठर गधे की पीठ पर लादने लगा , लेकिन कमजोरी के कारण गधा लड़खड़ा गया. धोबी ने देखा कि उसका गधा इतना कमजोर हो गया हैं कि एक दो दिन बाद बिल्कुल ही बैठ जाएगा. तभी उसके दिमाग की बत्ती जली . वह सोचने लगा “अगर मैं उस बाघ की खाल उतारकर ले आऊं और रात को इस गधे को वह खाल ओढाकर खेतों की ओर भेजूं तो लोग इसे बाघ समझकर डरेंगे. कोई निकट नहीं फटकेगा. गधा खेत चर लिया करेगा.”

 

धोबी ने ऐसा ही किया .दूसरे दिन नदी तट पर कपडे जल्दी धोकर सूखने डाल दिए और फिर वह सरकंडो के बीच जाकर बाघ की खाल उतारने लगा. शाम को लौटते समय वह खाल को कपडों के बीच छिपाकर घर ले आया.रात को जब सब सो गए तो उसने बाघ की खाल गधे को ओढ़ा दी. . दूर से देखने पर गधा बाघ जैसा ही नजर आने लगा. धोबी बहुत ही खुश हुआ.फिर उसने गधे को खेत की और छोड़ दिया .गधे ने एक खेत में जाकर फसल खाना शुरु किया. रात को खेतों की रखवाली करने वालों ने खेत में बाघ देखा तो वे डरकर भाग खडे हुए. गधे ने भरपेट फसल खाई और रात अंधेरे में ही घर लौट आया. धोबी ने तुरंत खाल उतारकर छिपा ली. अब तो गधे के अच्छे दिन आ गए . वह ठाट से रहने लगा. हर रात धोबी उसे खाल ओढाकर छोड देता. गधा सीधे खेतों में पहुंच जाता और मनपसन्द फसल खाने लगता. गधे को बाघ समझकर सब अपने घरों में दुबककर बैठे रहते. फसलें चर-चरकर गधा मोटा होने लगा. अब वह दुगना भार लेकर चलता. धोबी भी खुश हो गया. मोटा-ताजा होने के साथ-साथ गधे के दिल का भय भी मिटने लगा . उसका जन्मजात स्वभाव जोर मारने लगा. एक दिन भरपेट खाने के बाद गधे की तबीयत मस्त होने लगी. वह लगा लोटने पोटने . खूब लोटा वह गधा. इसी बीच बाघ की खाल तो एक ओर गिर गई. वह अब खालिस गधा बनकर उठ खडा हुआ और डोलता हुआ खेत से बाहर निकला. गधे के लोट लगाने के समय पौधों के रौंदे जाने और चटकने की आवाज फैली. एक रखवाला चुपचाप बाहर निकला. खेत में झांका तो उसे एक ओर गिरी बाघ की खाल नजर आई और खेत से बाहर आता हुआ गधा दिखाई दिया. वह चिल्लाया “अरे, यह तो गधा हैं.”

 

उसकी आवाज औरों ने भी सुनी. सब डंडे लेकर दौड़े और गधे की तबियत से पिटाई कर दी. उसे इतना मारा की गधा वहीँ मर गया. इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि पहनावा बदलकर कुछ ही दिन धोखा दिया जा सकता है. अंत में असली रूप सामने आ ही जाता है. मित्रों यह hindi story धोबी और गधा की कहानी आपको कैसी लगी जरुर बताएं और धोबी और गधा की कहानी की तरह की और भी कहानी के लिए ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब करें और दूसरी hindi kahani के लिए नीची की लिंक पर क्लिक करें.

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