hindi funny stories

Panchatantra tales

panchatantra tales
Written by Abhishek Pandey

panchatantra tales प्राचीन काल में एक नदी के किनारे बसा नगर व्यापार का केन्द्र था. फिर आए उस नगर के बुरे दिन, जब एक वर्ष भारी वर्षा हुई. नदी ने अपना रास्ता बदल दिया.

 

 

 

लोगों के लिए पीने का पानी न रहा और देखते ही देखते नगर वीरान हो गया अब वह जगह केवल चूहों के लायक रह गई…. चारों ओर चूहे ही चूहे नजर आने लगे…. चूहो का पूरा साम्राज्य ही स्थापित हो गया… चूहों के उस साम्राज्य का राजा बना मूषकराज चूहा… चूहों का भाग्य देखो, उनके बसने के बाद नगर के बाहर जमीन से एक पानी का स्त्रोत फूट पडा और वह एक बडा जलाशय बन गया.

 

 

 

नगर से कुछ ही दूर एक घना जंगल था… जंगल में अनगिनत हाथी रहते थे…. उनका राजा गजराज नामक एक विशाल हाथी था…. उस जंगल क्षेत्र में भयानक सूखा पडा…. जीव-जन्तु पानी की तलाश में इधर-उधर मारे-मारे फिरने लगे… भारी भरकम शरीर वाले हाथियों की तो दुर्दशा हो गई.

 

 

 

हाथियों के बच्चे प्यास से व्याकुल होकर चिल्लाने व दम तोडने लगे…. गजराज खुद सूखे की समस्या से चिंतित था और हाथियों का कष्ट जानता था… एक दिन गजराज की मित्र चील ने आकर खबर दी कि खंडहर बने नगर के दूसरी ओर एक जलाशय हैं… गजराज ने सबको तुरंत उस जलाशय की ओर चलने का आदेश दिया… सैकडों हाथी प्यास बुझाने डोलते हुए चल पडे… जलाशय तक पहुंचने के लिए उन्हें खंडहर बने नगर के बीच से गुजरना पडा.

 

 

हाथियों के हजारों पैर चूहों को रौंदते हुए निकल गए.. हजारों चूहे मारे गए… खंडहर नगर की सडकें चूहों के खून-मांस के कीचड से लथपथ हो गई. मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई. हाथियों का दल फिर उसी रास्ते से लौटा. हाथी रोज उसी मार्ग से पानी पीने जाने लगे. काफी सोचने-विचारने के बाद मूषकराज के मंत्रियों ने कहा “महाराज, आपको ही जाकर गजराज से बात करनी चाहिए… हाथी दयालु होते हैं..वे मान जायेंगे …” मूषकराज हाथियों के वन में गया. एक बडे पेड के नीचे गजराज खडा था.

 

panchatantra tales

 

मूषकराज उसके सामने के बडे पत्थर के ऊपर चढा और गजराज को नमस्कार करके बोला “गजराज को मूषकराज का नमस्कार… हे महान हाथी, मैं एक निवेदन करना चाहता हूं.”

 

आवाज गजराज के कानों तक नहीं पहुंच रही थी. दयालु गजराज उसकी बात सुनने के लिए नीचे बैठ गया और अपना एक कान पत्थर पर चढे मूषकराज के निकट ले जाकर बोला “नन्हें मियां, आप कुछ कह रहे थे… कॄपया फिर से कहिए.”

 

मूषकराज बोला “हे गजराज, मुझे चूहा कहते हैं.. हम बडी संख्या में खंडहर बनी नगरी में रहते हैं.. मैं उनका मूषकराज हूं.. आपके हाथी रोज जलाशय तक जाने के लिए नगरी के बीच से गुजरते हैं… हर बार उनके पैरों तले कुचले जाकर हजारों चूहे मरते हैं… यह मूषक संहार बंद न हुआ तो हम नष्ट हो जाएंगे.”

 

गजराज ने दुख भरे स्वर में कहा “मूषकराज, आपकी बात सुन मुझे बहुत शोक हुआ… हमें ज्ञान ही नहीं था कि हम इतना अनर्थ कर रहे हैं. हम नया रास्ता ढूढ लेंगे.”

 

मूषकराज कॄतज्ञता भरे स्वर में बोला “गजराज, आपने मुझ जैसे छोटे जीव की बात ध्यान से सुनी.. आपका धन्यवाद। गजराज, कभी हमारी जरुरत पडे तो याद जरुर कीजिएगा.”

 

गजराज ने सोचा कि यह नन्हा जीव हमारे किसी काम क्या आएगा… सो उसने केवल मुस्कुराकर मूषकराज को विदा किया… कुछ दिन बाद पडौसी देश के राजा ने सेना को मजबूत बनाने के लिए उसमें हाथी शामिल करने का निर्णय लिया…

 

 

 

 

राजा के लोग हाथी पकडने आए… जंगल में आकर वे चुपचाप कई प्रकार के जाल बिछाकर चले जाते हैं… सैकडों हाथी पकड लिए गए… एक रात हाथियों के पकडे जाने से चिंतित गजराज जंगल में घूम रहे थे कि उनका पैर सूखी पत्तियों के नीचे छल से दबाकर रखे रस्सी के फंदे में फंस जाता हैं…

 

 

 

जैसे ही गजराज ने पैर आगे बढाया रस्सा कस गया.. रस्से का दूसरा सिरा एक पेड के मोटे तने से मजबूती से बंधा था. गजराज चिंघाडने लगा… उसने अपने सेवकों को पुकारा, लेकिन कोई नहीं आया….कौन फंदे में फंसे हाथी के निकट आएगा? एक युवा जंगली भैंसा गजराज का बहुत आदर करता था…

 

 

 

जब वह भैंसा छोटा था तो एक बार वह एक गड्ढे में जा गिरा था… उसकी चिल्लाहट सुनकर गजराज ने उसकी जाअन बचाई थी…. चिंघाड सुनकर वह दौडा और फंदे में फंसे गजराज के पास पहुंचा..

 

 

गजराज की हालत देख उसे बहुत धक्का लगा… वह चीखा “यह कैसा अन्याय हैं? गजराज, बताइए क्या करुं? मैं आपको छुडाने के लिए अपनी जान भी दे सकता हूं.”

 

गजराज बोले “बेटा, तुम बस दौडकर खंडहर नगरी जाओ और चूहों के राजा मूषकराजा को सारा हाल बताना.. उससे कहना कि मेरी सारी आस टूट चुकी हैं.

 

भैंसा अपनी पूरी शक्ति से दौडा-दौडा मूषकराज के पास गया और सारी बात बताई…. मूषकराज तुरंत अपने बीस-तीस सैनिकों के साथ भैंसे की पीठ पर बैठा और वो शीघ्र ही गजराज के पास पहुंचे…. चूहे भैंसे की पीठ पर से कूदकर फंदे की रस्सी कुतरने लगे… कुछ ही देर में फंदे की रस्सी कट गई व गजराज आजाद हो गए…. इससे यही शिक्षा मिलाती है कि आपसी सदभाव व प्रेम सदा एक दूसरे के कष्टों को हर लेते हैं.

 

मित्रों आपको यह panchatantra story panchatantra tales कैसी लगी जरुर बताएं और panchatantra tales की तरह की और भी कहानी के लिए इस ब्लॉग को लाइक , शेयर और सब्स्क्राइब करें और दूसरी पोस्ट के लिए नीचे की लिंक पर क्लिक करें.

1-Teri Yaad sad love story in hindi

2-rahul gandhi biography . राहुल गांधी जीवन परिचय

3-जंगल के फूल

About the author

Abhishek Pandey

Leave a Comment