Pari ki kahani

नन्ही लड़की/pari kahani

नन्ही लड़की/pari kahani
नन्ही लड़की/pari kahani

नन्ही लड़की/pari kahani बहुत समय पहले की बात है. स्काटलैंड के एक गांव में एक अनाथ नन्हीं लड़की रहती थी. लोग उसे प्यार से एंजल अर्थात परी बुलाते थे. वह अनाथ तो थी, लेकिन गांव वालों के प्यार ने उसे कभी ऐसा महसूस नहीं होने नहीं दिया. वह बहुत ही मासूम और दयालु थी. वह सभी से प्रेम कराती और सभी उससे प्रेम करते थे.

लेकिन उसे अपनी मां की हमेशा याद आती थी. एक दिन वह इस बात से बहुत दुखी होकर बहार कहीं निकल पड़ी. उसे लगा कि शाययद उसका मन बहल जाएगा. उसके हाथ में रोटी का एक टुकड़ा और थोड़ा चार था. चलते चलते वह काफी दूर निकल गयी थी. तभी उसने देखा कि एक बूढा आदमी सड़क किनारे बैठा है. वह बूढा बहुत बीमार प्रतीत हो रहा था. वह खुद मेहनत करके कुछ कमाने की स्थिति में नहीं था. इसीलिए वह सड़क किनारे भीख मांग रहा था.

उसने बड़ी ही आशा भरी नज़रों से नन्ही लड़की की तरफ देखा और गिडगिडाते हुए बोला ” ओ बिटिया ! मैं बूढा हूँ और बहुत अधिक बीमार भी हूँ. मेरे परिवार में और कोई नहीं है. मेरे शरीर में इतनी ताकत नहीं है कि मैं कुछ मेहनत कर सकूँ . तीन दिन से मैंने भूखा हूँ. मुंझ पर दया करो और कुछ खाने के लिये दो .”

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नन्ही लड़की/pari kahani
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नन्ही लड़की स्वयं भी भूखी थी. उसने यह टुकड़ा इस लिए बचा रखा था कि जब उसे तेज भूख लगेगी तब वह इसे खाएगी. लेकिन उसे बूढ़े पर दया आ गयी और उसने वह रोटी और अचार उसे दे दिया और बोली ” बाबा मेरे पास बस यही रोटी का टुकड़ा है .इसे आप ले लो. काश मेरे पास और भी कुछ भोजन होता . ” वह फिर वापस आ गयी और फिर यह उसकी नित्य की क्रिया हो गयी. वह रोज जाती और उन बूढ़े को खाना खिलाती. इसे वह जिम्मेदारी समझने लगी थी.

बारिश का समय था. अभी थोड़ी बारिश होकर गुजारी थी. नन्हीं लड़की तेजी से उस सड़क की ओर बढ़ रही थी. आज उसे देर भी हो गयी थी. कुछ लोगों ने उस बूढ़े बाबा के लिए एक झोपड़ी बना दी थी. वह वहाँ पहुंची और बोली ” बाबा यह लो….खाना खा लो. बारिश के कारण आज देरी हो गयी.”

कोई बात नहीं बिटिया. आप ने मेरी बहुत सेवा की है. लेकिन अब मेरे जाने का समय आ गया है. लेकिन मैं आपको कुछ देना चाहता हूँ. यह लो. यह परी की अंगूठी है. रात को जब आप इसे अंगूठी को रगड़ोगी तो आप परी लोक पहुँच जाओगी. जहां ढेर सारी परियां रहती हैं. आप उनके साथ खेल सकोगी.

मैंने एक बार परी लोक में चोरी की थी. जिसके बाद रानी परी ने मुझे श्राप दे दिया और मैं यहाँ आ गिरा. लेकिन आज यह श्राप पूर्ण हो गया. अब मैं पारी लोक जा सकूँगा और आप भी परी लोक आना और हम वहाँ खूब सारी मस्ती करेंगे. अब नन्हीं लड़की को जीने का आधार मिल गया था. वह प्रसन्न रहने लगी. उसका अकेलापन दूर हो गया था.

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