Hindi Kahani Pari ki kahani

pari ki kahani in hindi

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pari ki kahani in hindi/परी की कहानी ख़ुशी कक्षा ५ की बालिका है और उसे रात को सोते समय परियों की कहानी /pariyo ki kahani सुनने का शौक है. दादी- दादी pariyo ki kahani सुनाओ ना.

ठीक है बेटा. आप खाना खाकर आ जाओ. आज मैं आपको एक बहुत ही बढियां परी की कहानी सुनाउंगी.

ठीक है दादी ..कहकर ख़ुशी अपनी मम्मी के पास गयी और बोली मम्मी जल्दी से खाना दो, आज दादी मुझे pariyo ki kahani सुनाने वाली हैं.

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ठीक है बेटा..यह लो खाना खा लो और साथ में यह दूध भी पी लेना. क्योंकि परियों को दूध बहुत पसंद है.

अच्छा मम्मी..फिर तो मैं जरुर दूध पीउंगी.

दादी मैं खाना खाकर आ गई और साथ में दूध पी लिया. मम्मी कह रही थीं कि परियों को दूध बहुत पसंद है.

जी बेटा..परियों को दूध बहुत पसंद है…..तो फिर pari ki kahani in hindii शुरू करूँ .

जी दादी

बहुत समय पहले की बात है. परीलोक में बहुत ढेर साड़ी परियां रहती थीं. पर एक थी लाल परी. वह रानी परी की सबसे चहेती परी थी. लाल परी बहुत ही खुबसूरत थी. वह सबसे प्रेम से बात कराती थी.बिलकुल तुम्हारी तरह.

ख़ुशी मुस्कुरा दी और बोली फिर क्या हुआ.

एक दिन लाल परी के मन में आया कि क्यों ना पृथ्वीलोक की सैर की जाए. उसने अपनी यह ख्वाहिस रानी पारी से जाहिर की. उसने कहा कि वह पृथ्वीलोक के बारे में बहुत कुछ सुनी है. अब वह वहाँ के लोगों के बारे में और भी कुछ जानना चाहती है. अब रानी परी लाल परी की बात कैसे टाल सकती थीं. लेकिन वह लाल परी को लेकर कुछ चिंतित थीं.

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फिर लाल पारी ने कहा ठीक है ” पर मेरी एक शर्त है . पृथ्वीलोक पर आप केवल रात को जायेंगी और सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही वापस आ जायेंगी. सूरज की किरणे आप पर नहीं पदनी चाहिए, नहीं तो आपके पंख पिघल जायेंगे और आप वापस नहीं आ पाएंगी. इसीलिए आपकी सुरक्षा के लियए और आपके साथ के लिए तीन और परियां गुलाबी परी , शंख परी और मोती परी भी साथ जायेंगी.”

इसपर गुलाबी परी और भी खुश हो गयी . उसने कहा कि ” यह सब परियां तो मेरी सहेलियां है. अब तो और भी मजा आएगा. हम किसी खुबसूरत बाग़ में खेलेंगे और सूरज की पहली किरण से पहले ही वापस आ जायेंगे . ” अब चारो परियां पृथ्वीलोक पर जाने का बेसब्री से इन्तजार करने लगीं और जैसे ही पृथ्वीलोक पर अन्धेरा छाया, चारों परियां पृथ्वीलोक पर जाने के लिए तैयार हो गयीं. जाने से पहले रानी पारी ने सभी परिय्यों को शुभकामना दिन और साथ ही उन्हें हिदायात भी दीं की जल्द ही वापस आ जाना.

सभी परियों ने आँख बंद किया और पलभर में पृथ्वीलोक के एक बेहद ही खुबसूरत हरे भरे बाग़ में पहुँच गयी. तब तक ख़ुशी को नीद आ गयी थी..दादी ने उसे जगाने की एक दो बार कोशिश की…फिर प्यार से थपकी दी और खुद भी सो गयी.

थोड़ी देर बाद ख़ुशी की आँख खुली तो उसे एक मद्धिम, कर्णप्रिय संगीत की ध्वनि सुनाई दे रही थी. ख़ुशी ने खिड़की खोली तो देखा छोटी – छोटी चमकती किरणे चारों तरफ फैली थी. हल्का गुलाबी और नीला प्रकाश माहौल को और भी खुशनुमा बना रहा था. लाल पारी मस्त मगन होकर नाच रही थी और बाकी परियां भी घेरा बनाकर उसके चारो तरफ नाच रही थी. उन्हें भान भी नहीं था कि दो नन्ही खुबसूरत आँखे उन्हें देख रही हैं.

अरे यह तो मेरे ही घर का आंगन है……क्या? …परियां मेरे घर में आई हैं ?…ख़ुशी को तो जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था. अरी हाँ उनके पंख , मुकुट और कपडे भी ठीक वैसे ही हैं जैसे दादी कहानियों में बताती हैं. आज वह साक्षात परियों को देख रही थी और बहुत प्रसन्न हो रही थी…कि उसके कानों में उसकी मम्मी की आवाज गूंजी ” ख़ुशी बेटा, उठो जल्दी स्कूल के लिए देरी हो जायेगी “.

अरी! यह क्या, मैं तो स्वप्न देख रही थी. बिस्तर से उठकर वह खिड़की पर कड़ी होकर आँगन के बाग़ की ओर देखने लगी. तभी उसकी नजर बाग़ के गुलाब के पौधे पर पड़ी. वह दौड़कर वहाँ पहुंची. उस गुलाब के पेड़ के पास एक चमकीला सितारा था, जिसे उसने लाल परी के हाथ में देखा था……..वह खुश होती हुए बोली…अच्छा तो परियां मेरे आंगन में आई थी.

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