Pari ki kahani

Pari Story . Hindi Kids Story

pari Story
Written by Abhishek Pandey

pari Story  माँ! आज रात मुझे कहानी सुनाओगी न!”

 

ख़ुशी को रात को सोने से पहले कहानी सुनने का बहुत शौक है.  ख़ुशी  कक्षा चार में पढ़ती हैऔर बहुत ही समझदार है.

 

“हाँ बेटा! अभी कुछ देर रुको. मैं रसोई का काम ख़त्म करके जल्दी ही आती हूँ.”

 

ख़ुशी ने जल्दी से नाईट सूट पहना और अपने पलंग पर आकर लेट गई. वह बहुत खुश थी.

 

थोड़ी देर में माँ का काम ख़त्म हुआ तो वो भी उसके पास आ कर लेट गईं और बोलीं, “हाँ! अब बताओ कौन सी कहानी सुनाऊँ आज?”

 

“माँ, आज वो परियों वाली कहानी सुनाओ न,” ख़ुशी को परियों की कहानी सुनना बहुत पसंद है. वह हर तीसरे दिन कोई न कोई परियों वाली ही कहानी सुनना चाहती है.

 

“अच्छा चलो, आज मैं तुम्हें गुलाबी परी की कहानी सुनाती हूँ,”  यह बहुत ही अच्छी  pari storyline  है…..माँ ने कहानी शुरू की –

 

“बहुत समय पहले की बात है, परीलोक में बहुत सारी परियाँ रहती थीं. उनमें से गुलाबी परी सबसे प्यारी थी। वह रानी परी की सबसे चहेती परी भी थी. गुलाबी परी यदि कोई इच्छा करती तो वह उसे ज़रूर पूरा करती.

 

pari Story 

 

एक दिन खेलते–खेलते गुलाबी परी के मन में आया कि क्यों न पृथ्वीलोक पर सैर के लिए जाया जाए. उसने पृथ्वीलोक और वहां के लोगों के बारे में बहुत सुना हुआ था. वे लोग कैसे रहते हैं, वह जानना चाहती थी. उसने अपनी यह इच्छा रानी परी के सामने रखी. पहले तो रानी परी ने ना-नुकुर किया फिर मान गई. आखिर वह गुलाबी परी की इच्छा को कैसे टाल सकती थी.

 

 

रानी परी ने कहा, “पर मेरी एक शर्त है. पृथ्वीलोक पर तुम सिर्फ रात में ही जा सकती हो और सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही तुम्हें वापस आना होगा. सूरज की किरणें तुम्हारे ऊपर नहीं पड़नी चाहिए. नहीं तो तुम्हारे पंख पिघल जाएंगे और तुम वापस नहीं आ पाओगी. तुम्हें हमेशा के लिए मनुष्यों के साथ रहना पड़ेगा.”

 

 

“ठीक है!” गुलाबी परी ने जल्दी से कहा. वह तो पृथ्वीलोक पर जाने के नाम से ही उत्साहित थी.

 

 

 

“लेकिन तुम अकेले नहीं जाओगी. तुम्हारे साथ तुम्हारी तीन और परी बहनें भी तुम्हारी सुरक्षा के लिए जाएंगी. सब्ज़ परी, नील परी और लाल परी,” रानी परी ने कहा.

 

 

गुलाबी परी और भी खुश हो गई. “ये सब तो मेरी सहेलियाँ हैं! अब तो और भी मज़ा आएगा. हम सब वहाँ जा कर मज़े करेंगे, किसी बाग़ में खेलेंगे और नृत्य करेंगे.” बाक़ी परियाँ भी बहुत खुश हो गईं, आखिर उनको भी पृथ्वीलोक पर जाने का मौका मिल रहा था. वे सब रात का बेसब्री से इंतज़ार करने लगीं.

 

 

जैसे ही पृथ्वीलोक पर अँधेरा छाया, चारों परियाँ तैयार हो गईं. रानी परी ने एक बार फिर से अपनी चेतावनी दोहराई, “याद रहे, सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही परीलोक वापस आना होगा.” फिर रानी माँ ने सभी परियों को आँखें बंद करने को कहा.

 

 

थोड़ी देर बाद जब चारों परियों ने आँखें खोलीं तो वे सब एक हरे भरे बाग़ में थीं. चारों तरफ सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हुए थे. तितलियाँ फूलों पर मंडरा रहीं थीं. हवा में ठंडक थी. उन परियों को ये हरियाली इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने नाचना शुरू कर दिया. धीमा-धीमा संगीत न जाने कहाँ से आ रहा था.”

 

 

 

खुशी की जब आँख खुली तो उसे कुछ संगीत की आवाज़ कहीं दूर से आती हुई प्रतीत हुई. जब संगीत की आवाज़ आना बंद नहीं हुई तो वो धीरे से अपने बिस्तर से उतरी और जाकर अपने कमरे की खिड़की खोली, “अरे! ये क्या! ये तो परियाँ हमारे ही बाग़ में हैं.” खुशी को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ.

 

 

 

 

उसने अपनी आँखें मलीं “नहीं! ये सच है! ये तो सचमुच परियाँ ही हैं. ओह! ये गुलाबी परी कितनी सुन्दर है.” इसके गुलाबी पंख कितने सुन्दर हैं.” gulabi pari  ने एक बहुत सुन्दर गुलाबी रंग का गाउन पहना हुआ था. उसके सर पर एक छोटा सा मुकुट था जिसमें गुलाबी पत्थर जड़े हुए थे. उसके पंखों में से भी गुलाबी आभा आ रही थी.

 

 

 

चारों तरफ एक मद्धिम, नीले रंग का प्रकाश फैला हुआ था. छोटी-छोटी चमकती हुई किरणें, चारों तरफ फ़ैल गईं. भीनी-भीनी खुश्बू जैसे परियों में से ही आ रही थी. एक स्वप्निल सा वातावरण था. मधुर सा संगीत न जाने किस जादू से सुनाई दे रहा था. gulabi pari  बीच में मगन हो नृत्य कर रही थी. बाकी तीनों परियाँ भी उसके चारों ओर नाच रहीं थीं.

 

 

उन्हें ये भी भान नहीं था कि दो नन्हीं आँखें उन्हें सम्मोहित हो कर देख रहीं हैं.

 

 

story of pari in hindi 

 

 

ये ख़ुशी ही थी जिसके घर के आँगन में परियाँ उतरीं थीं.  खुशी के कमरे से बाग़ का सारा दृश्य दिखाई देता था. जो वह माँ से कहानियों में सुनती आई थी. आज वह सब कुछ अपनी आँखों से देख रही थी.

परियों को साक्षात अपने बाग़ में नाचते हुए देख वह मंत्रमुग्ध हो गई.

“अरे यहाँ तो सब्ज़ परी, लाल परी और नील परी भी हैं,” ख़ुशी की नज़र उन पर गई. उनके वस्त्र, पंख और मुकुट भी हरे, लाल और नीले थे, उतने ही सुन्दर जैसे कि गुलाबी परी के थे.

ख़ुशी परियों के नृत्य में जैसे खो सी गई. कितना समय बीत गया पता ही नहीं चला.

“खुशी! बेटा, उठो! स्कूल जाने का समय हो गया,” उसके कानों में माँ की आवाज़ पड़ी तो वह चौंक कर बिस्तर पर बैठ गई.

“अरे! मैं क्या सपना देख रही थी?” खुशी ने सोचा. ये तो सपना ही था। मैं तो सो कर उठी हूँ. मम्मी की कहानी कब ख़तम हुई और मैं कब सो गई पता ही नहीं चला और नीद में ही परी की  कहानी / pari story in hindi सपने में देखने लगी .

बिस्तर से उतर कर वह खिड़की पर खड़ी होकर बाग़ की तरफ देखने लगी. तभी उसकी नज़र गुलाब के पौधे के पास गई जहाँ कोई चीज़ चमकती हुई दिखाई दे रही थी. खुशी दौड़ कर बाग़ में गई.

“ये क्या है?” घास में एक चमकीला सा सितारा पड़ा हुआ था. अब ख़ुशी के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा . उसे यकीन हो गया कि परियां यहीं आई थीं.

                                                                                     pari Story

pari ki story :- एक समय की बात है कि एक गांव में एक बहुत उदार तथा दयालु नन्हीं लड़की रहती थी. वह थी तो अनाथ, पर ऐसा लगता था जैसे सारा संसार उसी का है. वह सभी से प्रेम करती थी और दूसरे सब भी उसे बहुत चाहते थे.

पर दुख की बात यह थी कि उसके पास रहने के लिए कोई घर नहीं था. एक दिन इस बात से वह इतनी दुखी हुई कि उसने किसी को कुछ बताए बिना ही अपना गांव छोड़ दिया. वह जंगल की ओर चल दी. उसके हाथ में बस एक रोटी का टुकड़ा था.

 

 

 

वह कुछ ही दूर गई थी कि उसने एक बूढ़े आदमी को सड़क के किनारे बैठे देखा. वह बूढ़ा-बीमार-सा लगता था. उसका शरीर हड्डियों का ढांचा मात्र था. अपने लिए स्वयं रोटी कमाना उसके बस का काम नहीं था. इसलिए वह भीख मांग रहा था.

 

 

उसने आशा से लड़की की ओर देखा.

 

 

 

‘‘ओ प्यारी नन्हीं बिटिया ! मैं एक बूढ़ा आदमी हूं. मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. मेहनत-मजदूरी करने की मेरे शरीर में शक्ति नहीं, तीन दिन से मैंने कुछ नहीं खाया है. मुझ पर दया करो और मुझे कुछ खाने को दो.’’ वह बूढ़ा व्यक्ति गिड़गिड़ाया.

 

 

 

नन्हीं लड़की स्वयं भी भूखी थी. उसने रोटी की टुकड़ा इसलिए बचा रखा था ताकि खूब भूख लगने पर खाए. फिर भी उसे बूढ़े व्यक्ति पर दया आ गई. उसने अपना रोटी का टुकड़ा बूढ़े को खाने के लिए दे दिया.

 

 

 

वह बोली-‘‘बाबा, मेरे पास बस यह रोटी का टुकड़ा है. इसे ले लो, काश ! मेरे पास और कुछ होता.’’

 

 

इतना कहकर और रोटी का टुकड़ा देकर व आगे चल पड़ी. उसने मुड़कर भी नहीं देखा.

 

 

 

वह कुछ ही दूर और आगे गई थी कि उसे एक बालक नजर आया, जो ठंड के मारे कांप रहा था. उदार और दयालु तो वह थी ही, उस ठिठुरते बालक के पास जाकर बोली-‘‘भैया, तुम तो ठंड से मर जाओगे. मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर सकती हूँ ?’’

 

 

बालक ने दयनीय नजरों से नन्हीं लड़की की ओर देखा-

 

 

‘‘हां दीदी ! यहां ठंड बहुत है। सिर छुपाने के लिए घर भी नहीं है मेरे पास. क्या करूं ? तुम्हारी बहुत कृपा होगी यदि तुम मुझे कुछ सिर ढंकने के लिए दे दो.’’ छोटा बालक कांपता हुआ बोला.

 

 

 

नन्हीं लड़की मुस्कुराई और उसने अपने टोपी (हैट) उतारकर बालक के सिर पर पहना दी. बालक को काफी राहत मिली.

 

 

 

‘‘भगवान करे, सबको तुम्हारे जैसी दीदी मिले. तुम बहुत उदार व कृपालु हो.’’ बालक ने आभार प्रकट करते हुए कहा, ‘‘ईश्वर तुम्हारा भला करे.’’

 

 

 

लड़की मुंह से कुछ बोली नहीं. केवल बालक की ओर प्यार से मीठी-सी मुस्कराहट के साथ देखकर आगे बढ़ गई .वह सिर झुकाकर कुछ सोचती चलती रही.

 

 

pari story in hindi आगे जंगल में नन्हीं लड़की को एक बालिका ठंड से कंपकंपाती हुई मिली, जैसे भाग्य उसकी परीक्षा लेने पर तुला था. उस छोटी-सी बालिका के शरीर पर केवल एक पतली-सी बनियान थी. बालिका की दयनीय दशा देखकर नन्हीं लड़की ने अपना स्कर्ट उतार कर उसे पहना दिया और ढांढस बंधाया-‘‘बहना, हिम्मत मत हारो. भगवान तुम्हारी रक्षा करेगा.’’

 

 

 

अब नन्हीं लड़की ने तन पर केवल स्वेटर रह गया था. वह स्वयं ठंड के मारे कांपने लगी. परंतु उसके मन में संतोष था कि उसने एक ही दिन में इतने सारे दुखियों की सहायता की थी. वह आगे चलती गई. उसके मन में कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं था कि उसे कहां जाना है.

 

 

 

अंधेरा घिरने लगा था. चांद बादलों के पीछे से लुका-छिपी का खेल खेल रहा था. साफ-साफ दिखाई देना भी अब बंद हो रहा था. परंतु नन्हीं लड़की ने अंधेरे की परवाह किए बिना ही अनजानी मंजिल की ओर चलना जारी रखा.

 

 

एकाएक सिसकियों की आवाज उसके कानों में पड़ी. ‘यह कौन हो सकता है ?’ वह स्वयं से बड़बड़ाई. उसने रुककर चारों ओर आंखें फाड़कर देखा.

 

‘‘ओह ! एक नन्हा बच्चा !’’ नन्हीं लड़की को एक बड़े पेड़ के पास एक छोटे से नंगे बच्चे की आकृति नजर आ गई थी. वह उस आकृति के निकट पहुंची और पूछा-‘‘नन्हें भैया, तुम क्यों रोते हो ? ओह हां, तुम्हारे तन पर तो कोई कपड़ा ही नहीं है. हे भगवान, इस बच्चे पर दया करो. यह कैसा अन्याय है कि एक इतना छोटा बच्चा इस सर्दी में नंगा ठंड से जम रहा है !’’ उसका गला रुंध गया था.

 

 

 

 

नन्हें बच्चे ने कांपते और सिसकते हुए कहा-‘‘द-दीदी, ब…बहुत कड़ाके की सर्दी है. मुझ पर दया करो. कुछ मदद करो.’’’‘‘हां-हां, नन्हे भैया. मैं अपना स्वेटर उतारकर तुम्हें दे रही हूं. बस यही कपड़ा है मेरे पास. लेकिन तुम्हें इसकी मुझसे अधिक जरूरत है.’’ ऐसा कहते हुए नन्हीं लड़की ने स्वेटर छोटे बच्चे को पहना दिया.

 

 

 

अब उसके पास तन पर कपड़े के नाम पर एक धागा भी नहीं रह गया था.

 

 

वह रुकी नहीं. चलती रही. इसी प्रकार चलते-चलते वह जंगल में एक खुली जगह जा पहुंची. वहां से आकाश दिख  रहा था और दिख  रहे थे बादलों से लुका-छिपी खेलता चांद तथा टिम-टिम करते तारे.

 

 

 

अब सर्दी बढ़ गई थी और ठंड असहनीय हो गई थी. नन्हीं लड़की का शरीर बुरी तरह कांपने लगा था और दांत किटकिटा रहे थे.

 

 

उसने सिर उठाकर आकाश की ओर देखा और एक आह भरी. फिर आंखों में छलकते आंसुओं के साथ वह नन्हीं लड़की बोली-‘‘हे प्रभु, मैं नहीं जानती कि कौन-सी शक्ति मुझे यहां खींच लाई है ! मैं यहाँ क्यों आई ! पर मुझे विश्वास हो रहा है कि यदि यहां से मैं तुमसे विनती करूं तो तुम अवश्य मेरी आवाज सुनोगे. मेरे सामने फैली झील, आकाश की ओर उठते ये सुन्दर-सुंदर पेड़ दूर नजर आती बर्फ से ढकी पर्वतों की चोटियां, आकाश का चांद तथा झिलमिलाते सितारे तुम्हें अर्पित मेरी प्रार्थना के साक्षी है.’’ ऐसा कहते हुए वह फफक कर रो पड़ी.

 

 

 

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कुछ देर पश्चात उसने भर्राए गले से उलाहना दी-‘मैंने कभी तुमसे शिकायत नहीं की. न ही तुम्हें कोसा परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मेरी कोई भावनाएं ही नहीं है या मेरा हृदय पत्थर है. खैर, मेरे माता-पिता की छोड़ो लेकिन…’

 

 

 

 

नन्हीं लड़की न जाने कब तक क्या-क्या शिकायत करती रहती यदि ऊपर से एक आवाज ने उसे टोका न होता.

 

 

 

ऊपर से आकाशवाणी हुई-‘‘ओ प्यारी नन्हीं लड़की, मैं तुम्हारा दुख समझता हूं.’’ लड़की ने चौंककर आकाश की ओर निहारा.

 

 

 

आकाशवाणी जारी रही-‘‘…पर क्योंकि तुम मेरी विशेष संतान हो इसलिए मैंने तुम्हें धरती पर विशेष प्रयोजन से भेजा है. ऐसी संतान को कष्ट सहने पड़ते हैं और घोर परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है. मुझे तुम पर गर्व है. तुमने सारी परीक्षाएं सफलतापूर्वक पार की हैं. अब तुम सुंदर वस्त्रों से सजी हो, जरा अपने बदन की ओर देखो.’’

 

 

 

नन्हीं लड़की ने अपने बदन को निहारा तो दंग रह गई. सचमुच वह अलौकिक रूप से मनमोहक वस्त्रों से ढकी थी.अब चौंकाने की बारी भगवान की थी.

 

 

 

चमत्कार पर चमत्कार होने लगे. नन्हीं लड़की के सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से सजे थाल प्रकट हुए. आकाश से घोषणा हुई-‘‘मेरी प्यारी बच्ची, मैं तुम्हारे माता-पिता को रात के भोजन पर तुम्हारे पास भेजूंगा. वे एक पूरी रात तुम्हारे साथ रहेंगे और हां, मैं वचन देता हूं कि महीने में एक बार जब तुम इस स्थान पर आओगी, तो वे तुम्हारे साथ एक पूरी रात रहेंगे.’’

 

 

 

नन्हीं लड़की की प्रसन्नता का पारावार न रहा. जब उसने अगले ही क्षण अपने माता-पिता को अपने सामने खड़े पाया. उन्होंने अपनी बेटी को उठाकर बारी-बारी से छाती से लगा लिया और खूब चूमा तथा रोए. खुशी के आंसू तीनों की आंखों में झर रहे थे.मां ने अपने हाथों से नन्हीं लड़की को खाना खिलाना आरंभ किया. तीनों ने साथ-साथ भोजन किया. उस रात नन्हीं लड़की सोई नहीं. माता-पिता भी नहीं सोए. उन्हें भी अपनी बिटिया को बहुत कुछ बताना था.

 

 

 

बातों ही बातों में रात कटती रही. पौ फटने से पहले एक और चमत्कार हुआ. वे तीनों आकाश और चांद-सितारों को लेटे-लेटे निहारते हुए बातें कर रहे थे. अकस्मात् झिलमिलाते तारे टूट-टूट कर आकाश से नीचे गिरने लगे .हर तारा जो धरती पर आ गिरा एक सोने के टुकड़े में बदल गया.

 

 

 

मां ने मुस्कराकर बेटी की ओर देखा-

 

 

‘‘प्यारी-प्यारी बिटिया. पौ फटते ही हमें यहां से जाना होगा. जितने सोने के टुकड़े तुम बटोर सकती हो, बटोर लो. अपने गांव लौटकर अपने लिए एक प्यारा-सा घर बनाना और सुख से रहना. हां, एक बात और..’’

 

 

 

 

उसने प्यार से अपनी बेटी को सहलाते हुए कहा-‘‘तुम्हारे नामकरण से पहले ही हमारी मृत्यु हो गई थी. प्रभु की कृपा से अब वह काम हम कर सकते हैं. अब से तुम्हारा नाम ‘ममता’ होगा. अलविदा प्यारी बिटिया. ममता अलविदा.’’ ऐसा कहते हुए नन्हीं लड़की के माता-पिता लुप्त होने लगे.

 

 

ममता ने जब तक उत्तर में अलविदा करने के लिए हाथ उठाया, तब तक वे दोनों लुप्त हो चुके थे. फिर भी नन्हीं ममता को यह आसरा तो था ही कि वह कम से कम महीने में एक बार तो अपने माता-पिता से मिल ही सकेगी. वह पूरी रात उनके साथ बिता सकेगी.

 

 

 

वह काफी देर आकाश की ओर ताकती रही .फिर ममता अपने गांव लौट आई और एक छोटा सुंदर-सा घर बनवाकर उसमें सुख-चैन से रहने लगी.

 

 

अब वह दुनिया की और कुछ भी बात भूल जाए परंतु महीने में एक बार जंगल की खुली जगह पर जाकर अपने माता-पिता के साथ नियत समय पर रात बिताना नहीं भूलती.

 

 

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