Pari ki kahani

pariyon ki kahani

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Written by Hindibeststory

pariyon ki kahani एक बहुत बड़े नगर में एक राजा रहते थे. उनकी कोई संतान नहीं थी. वे बहुत निराश रहते थे. बहुत पूजा पाठ करने के बाद उन्हें एक कन्या हुई. पुरे राज्य में उत्सव मनाया जाने लगा. राज्य की परियों को भी आमंत्रित किया.राज्य की सभी परियां आ गयी लेकिन बाहर होने के कारण एक pari तक राजा का सन्देश नहीं जा सका. सभी परियां एक एक ककर उस कन्या को आशीष दे रही थी और जब अंतिम pari का नंबर आया, तभी वह परी जिस तक सन्देश नहीं पहुँच सका था वह आई और गुस्से से बोली आप लोगों ने मुझे ना बुलाकर मेरा अपमान किया है. मैं इस कन्या को श्राप दूंगी.

लोगों ने उसे मनाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वह नहीं मानी और श्राप देते हुए बोली ” जिस दिन यह कन्या सोलह साल की होगी उसी दिन इसे सुई या चरखा चुभेगा और इसकी मृत्यु हो जायेगी”. श्राप देने के बाद वह वहा से चली गयी. राजा रानी और वहाँ उपस्थित लोग बहुत ही दुखी हुए .. उन्हें दुखी देखकर अंतिम परी ने कहा कि मैं उसके श्राप को तो नहीं बदल सकती लेकिन इतना कह सकती हूँ , जिस कोई राजकुमार जिसका दो दांत मोतियों के होंगे वह इस कन्या को छुएगा उसी दिन इसका श्राप ख़त्म हो जाएगा और यह कन्या जीवित हो जायेगी और उसी राजकुमार से इसका विवाह होगा.

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उसके बाद राजा ने पुरे महल से सुई और चरखा हटवा दिया. उस कन्या का नाम जोया रखा गया. राजा से उसके चार सिपाही तैनात किये जिन्हें जोया को सुई और चरखे से बचाना था और उसके साथ ही राजा ने आस पास के सभी राज्यों में मोतियों के दांत वाले राजकुमार की खोज भी शुरू करवा दी.

समय बिता और अब जोया एक खुबसूरत युवती हो गयी थी. लेकिन राजा की चिंता बढती ही जा रही थी. अभी तक कोई मोतियों के दांत वाला राजकुमार नहीं मिला था. एक दिन जोया अपने महल में टहल रही कि वह टहलते हुए महल की अंतिम छोर पर बने एक छोटे
से कमरे तक जा पहुंची. वह कभी भी यहाँ नहीं आई थी. वह कई बार प्रयास कर चुकी थी लेकिन चारो सिपाही उसे मना कर देते थे, जिस कारण उसकी जिज्ञासा और भी बढ़ गयी थी. वह उस घर की और बढ़ी तो दरवाजा खुला था. उसने देखा कि इक बुढिया वहा सूत कात रही थी.

जोया ने कभी भी चरखा नहीं देखा था. अतः वह बुढ़िया से चरखा चलाने की अनुमति मांगी. बुढ़िया ने उसे अनुमति दे दी, क्योंकि वह परी ही थी जो भेष बदलकर वहाँ बैठी थी. जोया ने जैसे ही चरखा चलाना शुरू किया उसे एक सुई चुभ गयी और वह वहीँ मर गयी और pari ने एक अट्टहास लगाया और वहा से उड़ गयी. तभी चारो सिपाही भी वहाँ पहुँच गए और उन्होंने जोया को मृत देख तुरंत ही इसकी सूचना राजा को दी. पूरे महल में मातम पसर गया. अन्य परिया भी वहाँ आयीं और उनके सुझाव पर जोया को महल के बाहर एक कांच में रखा गया.

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समय बीता राजा ने अपनी पूरी कोशिश कर दी कि जल्द ही उन्हें मोतियों के दांत वाला राजकुमार मिले. लेकिन उनकी हर कोशिश असफल हो गयी. एक बार राजा ने तमाम तरह के सामंजस्य के लिए १०० से अधिक राजाओ को आमंत्रित किया. सभी राजा उचित समय पर वहाँ पहुँच गए. चर्चा आरम्भ हुई ही थी कि एक सिपाही ने आकर राजा को सूचना दी कि राजकुमारी जीवित हो गयी हैं. यह सुनते ही राजा नंगे पाँव वहा सी दौड़े . वे जब वहाँ पहुंचे तो देखा कि एक राजकुमार राजकुमारी का हाथ पकडे वहाँ बैठा है.

राजा ने उस राजकुमार के बारे जानना चाहा तभी उस राजकुमार के पिता जो कि इनके शत्रु राजा थे उन्होंने कहा कि यह मेरा बेटा है और यह विदेश गया था अभी दो दिन पहले ही लौटा है. लेकिन माजरा क्या है आप चर्चा बीच में छोड़कर क्यों आ गए.उन्होंने सारी बात बता दी.

इसपर राजकुमार के पिता ने कहा कि हमारे राज्यों की बीच दुश्मनी है तो हमारा रिश्ता कैसे हो सकता है भला.

हो सकता है दुष्ट परी आपकी दुश्मन है और वह इस राज्य में ही रहती है और उसकी वजह से ही ययः सब हुआ है. हम उसे आपको सौंप देंगे…..परियों के समूह ने कहा

ठीक है अगर ऐसा होता है तो मुझे प्रस्ताव स्वीकार है. राजा ने वैसा ही किया. दुष्ट परी को राजकुमार के पिता को सौंप दिया और उन्होंने उसे कैदखाने में डलवा दिया और जोया और राजकुमार का विवाह हो गया और इसके साथ ही दो दुश्मन राज्य दोस्त बन गए. मित्रों आपको यह hindi story pariyon ki kahani कैसी लगी जरुर बताएं और इस तरह की अन्य pariyon ki kahani के लिए इस ब्लॉग को सबस्क्राइब कर लें. इस ब्लॉग में आपको रोज नयी कहानिया मिलेगीं. दूसरी कहानी के लिए इस लिंक stories for kids पर क्लिक करें.

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