Hindi Kahani

purani kahani

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Written by Abhishek Pandey

purani kahani अरब देश की एक पुरानी कहानी है. एक राजा था . उसके बड़े ठाट-बाट थे. उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी. राजा जो ठहरा. एक बार वह लड़ाई पर गया. उसने खाने – पीने के खूब सारे सामान ले लिए औए इसके लिए उसे तीन सौ ऊटों की जरुरत हुई. लड़ाई बहुत भयंकर हुई और उसमें राजा की हार हो गयी और उसे बंदी बना लिया गया.

 

राजा के साथ उसका रसोइयाँ था. राजा ने उससे कहा कि मुझे भूख लगी है. कुछ खाना तैयार कर दो.. जोरों की भूख लगी है. रसोइयें के पास मांस का टुकड़ा बचा हुआ था. उसने उसे देगची में उबलने के लिए रख दिया और कुछ साग सब्जी भी मिल जाए इसके खोज में निकल गया.

 

इतने में इक कुत्ता आया और मांस की गंध से वह इतना बेकाबू हो गया की उसने तुरंत ही देगची में मुंह डाल दिया और देगची उसके मुंह में अटक गयी. वह परेशान हो गया और उसने अपना मुंह निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन देगची उसके मुंह से नहीं निकली तो वह वैसे ही देगची मुंह में फंसाये भागा.

 

राजा ने यह दृश्य देखा तो जोर से हंस पडा. पास खड़े संतरी ने ने जाब राजा की हंसी सुनी तो उसे बड़ा ही आश्चर्य हुआ. उसने राजा से कहा ” आप इतनी मुसीबत में हैं तब भी हंस रहे हैं “.

 

राजा ने उत्तर दिया मुझे यह सोचकर हंसी आ रही है कि कल तक मेरे रसोई के सामान को ले जाने के लिए तीन सौ ऊटों की आवश्यकता हो रही थी, अब उसके लिए एक कुत्ता ही काफी है .

 

संतरी ने सोचा ठीक ही कहा गया है कि सुख में तो सभी क्खुश रहते हैं, लेकिन असली मर्द तो वह है जो मुसीबत में भी हंस सके. मित्रों आपको मेरी यह hindi kahani purani kahani अगर आपको पसंद आई हो तो ब्लॉग को सबस्क्राइब करें और लाइक, शेयर करें और दूसरी hindi kahani के लिए इस लिंक gilhari in hindi पर क्लिक करें.

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