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श्री राम वालपेपर/ram bhagwan ka photo

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श्री राम

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श्री राम वालपेपर/ram bhagwan ka photo भगवान श्रीराम का विजय मन्त्र भगवान के नाम का महत्व उनसे भी अधिक होता है. तभी तो मात्र उनका नाम लेकर भक्त उनका प्रत्यक्ष दर्शन कर लेते हैं. ram nam से सागर में पत्थर तैरने लग जाते हैं. मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. आईये lord rama के विजय मन्त्र के बारे में जानते हैं.

भगवान श्रीराम का विजय मन्त्र

श्रीराम जय राम जय जय राम यह भगवान श्री राम का विजय मन्त्र है. इस mantra के जाप मात्र से सभी प्रकार के शत्रुओं का नाश हो जाता है. सभी प्रकार की कष्ट मिट जाते हैं. जीवन में खुशहाली आती है. जीवन के सभी दुःख समाप्त होने लगते हैं.

आखिर क्यों इस मन्त्र  को कहा जाता है मंत्रराज 

इस mantra के उच्चारण के लिए कोई बाध्यता नहीं है. आप किसी भी समय, काल, देश, परिस्थिति , जगह पर इस mantra का जाप कर सकते हैं. इसका उच्चारण भी बहुत सरल है. जिससे इस mantra के जाप में कोई कठिनाई नहीं होती है.

सत गुण {निष्काम भाव } से किया गया इस mantra का जाप इन्द्रियों पर विजय दिलाता है. 

रजोगुण अर्थात कामना पूर्ति के लिए किया गया जाप दरिद्रता, विपत्ति का नाश कर देता है.

तमोगुण के रूप मया गया इस मन्त्र का जाप संसार में विजयी बनाता है. 

इस मन्त्र में १३ अक्षर हैं और इसे तेरह लाख जाप का एक पुरश्चरण माना गया  है.

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इस मंत्रराज vijay mantra के बारे में एक कथा प्रचिलित है जहां से इस mantra की उत्पत्ति हुई. एक बार अयोध्या में lord rama , देवर्षि नारद, विश्वामित्र, वशिष्ठ आदि ऋषि मुनि बैठे औए थे, तभी देवर्षि नारद ने कहा कि भगवान का नाम बड़ा है या फिर भगवान ?

इस पर सभी में वाद विवाद होने लगा. ऋषि मुनियों ने अपने हिसाब से उत्तर दिए लेकिन सही उत्तर कोई नही दे सका. जब कोई सही उत्तर नहीं दे सका तब नारद जी ने कहा कि निश्चित तौर पर नाम ही सर्वश्रेष्ठ है और इसे सिद्ध भी किया जा सकता है. अब इसे सिद्ध करने के लिए नारद जी ने एक उपाय निकाला उन्होंने हनुमान जी से कहा कि आप दरबार में जाकर विश्वामित्र को छोड़कर अन्य ऋषियों को प्रणाम करना, चूँकि विश्वामित्र जी राजर्षि बने हैं तो अन्य ऋषियों के सामान सम्मान के योग्य नहीं हैं.

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हनुमान जी ने राज दरबार में वैसा ही किया. इसपर विश्वामित्र जी क्रोधित हो गए. उन्होंने इसे अपना अपमान समझा. तभी नारद जी विश्वामित्र के पास जाकर बोले ” देखिये ऋषिवर हनुमान कितना उदंड और घमंडी हो गए हैं. उन्होंने आपका अपमान कर दिया.” नारद जी की ययः बाते विश्वामित्र के क्रोध की ज्वाला में घी का कार्य कीं….उन्होंने भगवान श्री राम से कहा की हनुमान ने मेरा घोर अपमान किया है अतः कल सूर्यास्त से पहले हनुमान को मृत्युदंड दिया जाए. अब विश्वामित्र  के आदेश को lord rama कैसे टाल सकते थे.

इधर हनुमान जी परेशान हो गए. उन्होंने नारद जी कहा की यह सब मैंने आपके कहने पर ही किया है. अब आप ही मुझे इन सब से निकलने का साधन बताएं. तब नारद जी मुस्कुराए और बोले की कल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरयू नदी में स्नान करके वहीँ नदी तट पर खड़े होकर “ श्री राम जय राम जय जय राम ” मन्त्र का उच्चारण करना. तुम्हें कुछ नहीं होगा.

अब यह बात पूरी अयोद्धा में फ़ैल गयी. सभी अयोद्धावासी इस कठिन परीक्षा को देखने सरयू तट पर उमड़ पड़े. वहाँ सबने देखा कि हनुमान जी उसी मन्त्र का जाप कर रहे हैं जो नारद जी ने बताया था. कुछ ही समय में वहाँ श्रीराम भी पहुँच गए और गुरु आज्ञा का पालन करते हुयी अनिच्छा से हनुमान पर बानों की वर्षा करने लगे. लेकिन उनका प्रत्येक बाण निष्फल होने लगा. हनुमान जी के मन्त्र जाप से एक सुरक्षा घेरा बन गया था. जिससे टकराकर बाण वापस आ जा रहे थे. यह देख सभी लोग चकित रह गए.

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अब lord rama ने गुरु आज्ञा का पालन करने के लिए ब्रह्मास्त्र का आह्वान किया. यह देख हर कोई डराने लगा. तब नारद जी विश्वामित्र के पास आये और कहा ” हे ऋषि श्रेष्ठ इस ब्रह्मास्त्र से आप भली भांति परिचित हैं. इससे सम्पूर्ण संसार का नाश हो जाएगा. आप श्रीराम को गुरु आज्ञा से मुक्त करें. यह अब सिद्ध हो चुका है कि भगवान से बड़ा उनका नाम है. अतः भगवान lord rama को ब्र्ह्मात्र चलाने से रोकें.

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तब विश्वामित्र ने वही किया और lord rama ने भी ब्रह्मास्त्र को वापस ले लिया. हनुमान जी भगवान श्री राम के चरणों में गिर पड़े और विश्वामित्र ने हनुमान जी के इस भक्ति से  प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया.

तो मित्रों मेरी यह पोस्ट श्री राम वालपेपर/ram bhagwan ka photo आपको कैसी लगी अवश्य ही बताएं और अन्य hindi kahani के लिए इस लिंक   Mahabharat ke Pramukh Kaurav Patra 1   पर क्लिक करें. इसे वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक  Shree Ram Vijay Mantra करें.

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