Horror Story Moral Story

Ramkripal aur Teen Pret Horror Story

Ramkripal aur Teen Pret Horror Story रामकृपाल महाराज बहुत ही निर्धन थे, कहने को उनका नाम रामकृपाल  था लेकिन उनके उपर राम की कृपा जरा सी भी थी नहीं थी. वह निःसंतान थे. पुश्तैनी थोड़ी सी ज़मीन थी उसी पर उन्होने फूलों की बगिया लगा रखी थी. उसी फूलों को बेचकर किसी तरह दोनों लोगों (पति-पत्नी) का गुज़ारा होता था.

रामकृपाल बहुत ही नेक दिल इंसान थे, भगवान के परम भक्त भी थे, इसीलिए लोग उन्हे प्यार से महाराज कहते थे. एक दिन रामकृपाल ने अपनी पत्नी से कहा कि ऐसे कैसे गुज़ारा होगा, फूलों को बेचकर तो खर्चा भी नहीं निकल पता है, मैं सोच रहा था कि मुझे भी कमाने शहर में जाना चाहिये, देखों रामू शहर गया थाऔर ६ महीने में ही कितना पैसा कमा लिया.
हमारे आगे-पीछे है कौन, जो कमाने जाओगे….काट जाएगी जिंदगी…उसकी पत्नी ने कहा
पूरी जिंदगी तो फांका-मस्ती में कट गयी….सोचता हूँ..इतना कुछ कर लूं कि मरने पर किसी से कफ़न मांगने की ज़रूरत ना पड़े…रामकृपाल ने कहा
जैसी आपकी अच्छा…उनकी पत्नी ने कहा
उसके बाद उनकी पत्नी ने तीन रोटी, नमक, प्याज, मिर्च के साथ एक पोटली में बांधकर रामकृपाल को दे दिया और रामकृपाल भगवान का नाम लेकर शहर की ओर निकल पड़े. चलते-चलते शाम हो गयी, रामकृपाल भूक से परेशान हो गये. तभी उन्हें सामने एक पीपल का पेड़ दिखा, जिसकी चाहाया बहुत ही आरामदायक थी और वहां एक कुवा भी था. रामकृपाल वहीं पर रुक गये और लोटा डोरी के माध्यम कुएँ से पानी निकाला और हाथ -मुंह धोकर वहां बैठ गये, फिर उन्होने सोचा कि भूक भी बहुत लग रही है, रास्ता भी बहुत बाकी है, कुछ खाकर पानी पी लूं, फिर आगे की यात्रा करूगा.
उन्होने खाने की पोटली खोली तो उसमें क़ायदे से तीन मोटी-मोटी रोटियाँ रखी हुई थीं. रामकृपाल ने कहा कि “एक खाऊं..दो खाऊं या तीनों खा जाऊं”..इस बात को उन्होने कई बार कहा.
यह कहानी Ramkripal aur Teen Pret Horror Story की है.उसी कुएँ के अंदर Teen Pret रहते थे.रामकृपाल की बात सुनकर वे बड़े ही असमंजस पड़ गये कि यह बला कहां से आ गयी, जो हमें खाने की बात कर रहा है. पहले प्रेत ने कहा कि तुम दोनों यहीं रूको मैं देखता हूँ कि कौन है. अगर खायेगा तो मुझे ही खायेगा…तुम लोग भाग जाना……
नहीं…नहीं मरेंगे तो हम साथ ही मरेंगे…हम तुम्हें अकेली नहीं जाने देंगे ..बाकी प्रेतों ने कहा
नहीं तुम लोग यहीं रहो…मैं देखता हूँ…पहले वाले pret ने कहा
रामकृपाल अपनी ही धुन में वही रट लगाए जा रहे थे.
तभी एक pret वहाँ पहुंचा और हाथ जोड़कर बोला…महाराज हमारी जान छोड़ दो…हमारे पास जो कुछ भी है हम आपको दे रहे हैं….महाराज कृपया करके हमें छोड़ दें.
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आब रामकृपाल महाराज ने सोचा कि चलो ठीक देख ही लेते हैं कि इनके पास क्या है…उसके बाद उन्होंने कहा ठीक है….हम आप सब को छोड़ देंगे लेकिन जो भी चीज आप लोग दोगे वह बहुत ही अच्छी होनी चाहिए…जिसका कुछ फायदा हो सके.
ठीक है ….उसके बाद pret ने उन्हें एक कडाही दी और कहा कि इस कडाही से आप जो कुछ मागोगे वह मिल जायेगा.
इसके बाद रामकृपाल जी अपने घर चल दिए..अब अँधेरा होने लगा था..रास्ते  में रामकृपाल जी के एक परिचित का घर था. अब उन्होंने सोचा कि क्यों न यहीं पर रात बिता ली जाए, फिर सुबह घर को चलेंगे….फिर रामकृपाल जी वहाँ आये, लेकिन उस घर की मालकिन बहुत ही चालक थी उसने बातों ही बातों में सारा भेद पता कर लिया और उनकी कड़ाही को दूसरी कड़ाही से बदल दिया.
सुबह होने पर रामकृपाल जी अपने घर की और निकले और जब वे घर पहुंचे तो उनकी पत्नी ने कहा कि बहुत जल्द आ गए, कोई परेशानी तो नहीं हुइ न.
अरे नहीं-नहीं..कोई परेशानी नहीं हुई..बल्कि एक ऐसी चीज लाया हूँ…जिससे हमारे सारे दुःख खत्म हो जायेंगे…..जा जल्दी से चूल्हा तैयार कर…रामकृपाल खुश होते हुए बोले
Ramkripal aur Teen Pret Horror Story
पंडिताइन ने फ़टाफ़ट चुल्हा तैयार किया…अब रामकृपाल ने भगवान् का नाम लेकर कड़ाही को चूल्हे पर रखा और उससे खाना माँगा..लेकिन कड़ाही ने कुछ नहीं दिया..अब दे भी कैसे कड़ाही तो बादल चुकी थी…..रामकृपाल ने फिर से कोशिश की लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ…..अब पंडिताइन का धैर्य जवाब दे दिया…उन्होंने बुरा भला कहते हुए कडाही फेक दी.
ख़राब तो पंडित जी को भी लगा..वह गुस्से में फिर सी उसी कुए पर पहुंचे और फिर वही वाक्य दोहराया ..अब दूसरा प्रेत बाहर निकला..उसने कहा महाराज हमारी जान छोड़ो मेरे पास एक बटुआ है, जिससे आप जितना पैसा मागोगे वह देगा….
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ठीक है..लेकिन धोका नहीं होना चाहिये नहीं तो इस बार मैं तीनों प्रेत को मार दूंगा कहकर रामकृपाल महाराज चले गए…लेकिन उन्होंने वही गलती फिर से दोहरे और नतीजा भी पहले जैसा हुआ..इस बार भी उनका बटुआ बदल दिया गया….अब तो रामकृपाल जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया…उन्होने आव देखा न ताव…उसी क्षण कुईं कि तरफ निकले और कुये पर आकर गुस्से में आवाज लगे कि आज मैं तिनो को खा जाऊंगा…यह सुनकर तीसरा प्रेत बाहर निकला और पूछा गुरुदेव आप यहां से सीधे अपने घर जाते हैं या फिर रास्ते में कहीं विश्राम के लिए रुकते हैं…अब रामकृपाल जी ने सारी बात बता दी….तब उस प्रेत उन्हें एक डंडा और रस्सी देकर साडी बात समझा दी …अब रामकृपाल महाराज खुश होती हुए फिर से अपने परिचित के घर पहुंचे….वहाँ उनका खूब सेवा-सत्कार हुआ….तब मालकिन ने जानकारी लेनी चाही तो रामकृपाल नी कहा कि इस बार कुछ खास नहीं है सुबह बता दूंगा…मालकिन ने भी जिद नहीं कि कहीं रामकृपाल गुस्से में अभी चले जाएँ तो नुक्सान हो जायेगा.
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सुबह हुई तो मालकिन ने फिर से वही बात याद दिलाई…..तो रामकृपाल ने रस्सी से कहा कि रस्सी तुम किसकी हो तो रस्सी ने कहा कि जिसकी हाथ में उसकी…तब ठीक है..इस मालकिन के घर की लोगों को बाँध लो…अब रस्सी ने सबको बांध लिया …..फिर उन्होंने डंडी से भी वैसे ही पूछा तो डंडे ने भी कहा कि जिसके हाथ में उसका…तो ठीक है…सबको ज़रा प्रसाद खिला दो…अब डंडे ने सबकी पिटाई शुरू कर दी.
मुझे क्षमा कर दो….मैं आपकी हर चीज वापस दे रही हूँ….मुझे माफ़ कर दो..उस घर कि मालकिन और अन्य लोग दर्द से कराहते हुयी बोले.
ठीक है जल्द दो…..पंडित जी ने कहा
अब उनकी सारी चीजें मिल गयीं….उनका जीवन खुशियों से बितने लगा…..दोस्तों यह horror story Ramkripal aur Teen Pret Horror Story कहानी आपको कैसी लगी जरुर बताएं और Ramkripal aur Teen Pret Horror Story  तरह की अन्य horror stories के लिए इस लिंक बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा Horror Story पर क्लिक करें.

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Abhishek Pandey

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