Moral Story

sabak in hindi

sabak in hindi
Written by Abhishek Pandey

sabak in hindi एक नगर में एक जुलाहा रहता था . वह बहुत ही उम्दा कम्बल बनता था . बढ़िया क्वालिटी का माल खरीदता और बढ़िया कम्बल तैयार करता था. वह इमानदार था, हमेशा भगवान्औ का नाम लेता था. वह सच्चा था इसीलिए उसका धंधा भी सच्चा था. एक दिन की बात है, उसने एक साहूकार को दो कम्बल दिए. साहूकार ने कहा कि दो दिन बाद आकर पैसा ले जाना.

 

साहूकार दिखाने को तो बहुत धार्मिक बनात्रा था. भगवान् की खूब पूजा करता, तिलक लगता था, लेकिन उसके मन में कुटिलता थी. वह अपना रोजगार छल कपट से चलाता था. उसने जुलाहे को को पैसे ना देने की जुगत तैयार कर ली. जब दो दिन बाद जुलाहा पैसे लेने आया तो साहूकार बोला मैंने गोदाम में कम्बल रखे थे , लेकिन वहाँ आग लग गयी और उसमे काफी नुकसान हो गया और साथ ही कम्बल भी जल गया, अब मैं कम्बल के पैसे कैसे दूँ.

 

जुलाहा बोला ” यह नहीं हो सकता. मेरा धंधा सच्चाई पर चलता है और सच में कभी आग नहीं लग सकती है. ” , जुलाहे के कंधे पर एक कम्बल पडा हुआ था. उसने उसे साहूकार को देते हुए कहा कि ” यह लो और लगाओ इसमें आग “.

 

इस पर साहूकार ने फिर से बहाना बनाया. उसने कहा कि कम्बल के पास ही मिटटी का तेल रखा हुआ था. अचानक से वह तेल गिर गया और कम्बल उसमें भीग गया और आग लग गयी.

 

इसी बहस के बीच काफी भीड़ जुट गयी थी. सबके सामने उसने साहूकार को कहा कि इस कम्बल को मिट्टी के तेल में भीगा दो और इसमे आग लगा दो.

 

अब तो साहूकार को मौक़ा मिल गया. उसने फटाफट कम्बल में तेल डालकर आग लगा दी. लेकिन यह क्या तेल जल गया और कम्बल जैसा था वैसा बना रहा.

 

तब जुलाहे ने कहा ” सांच को आंच नहीं “.

 

साहूकार ने लज्जा से सिर झुका लिया और जुलाहे के सारे पैसे चुका दिये . सच ही कहा गया है जिसके साथ सच होता है उसका भगवान् भी साथ नहीं छोड़ता है. मित्रों आपको यह hindi kahani sabak in hindi आपको कैसी जरुर बताएं और इस तरह की hindi kahani के लिए ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब कर लें और दूसरी के लिए इस लिंक pariyo ki kahani पर क्लिक करें.

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