Sad Love Story in Hindi . प्रेम की ५ दर्दभरी कहानियां. सच्चे दिल वाले जरुर पढ़ें

Sad Love Story in Hindi हिंदी में प्रेम कहानी

 

Sad Love Story in Hindi यह कहानी उन दिनों की है जब मैं ८वीं में पढ़ता था. मेरा गाँव अर्धशहरी क्षेत्र में है. मतलब वहा शहर का विकास है तो गाँव की खुशबू भी है.

 

 

 

अच्छी इमारते हैं तो आम के बाग़ और फूलों की क्यारियाँ और गांव की अल्हड मस्ती भी है. मैं बहुत ही धार्मिक किस्म का था. मेरी आदत थी कि हर गुरुवार को मैं मंदिर अवश्य ही जाता था.

 

 

 

 

वैसे तो मैं घर के पास वाले भगवान नीलकंठ के मंदिर तो रोज ही जाता था, लेकिन गुरुवार के दिन शहर की बीचोबीच स्थित कान्हा के मंदिर जाना मैं कभी नहीं भूलता था.

 

 

 

एक दिन मैं साइकल से मंदिर गया और जब मैं वापस आया तो देखा कि एक लड़की जो की लगभग मेरी हमउम्र की थी वह उस साइकल पर बैठी हुई थी.

 

 

 

 

मैंने उससे कहा कि साइकल पर से उतारो मुझे जाना है….तो उसने पलट कर कहा की जाना है तो जाओ…मैं क्या करूँ…उसकी इस बात से मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उसे साइकल से धकेल दिया…..और तुरंत ही वहाँ से  चलता बना…मैंने यह भी नहीं देखा कि उसे चोट लगी है.

 

 

 

तेरा इश्क Sad Love Story

 

 

अगले दिन जब मैं मंदिर जा रहा था तो देखा कि वह भी अपने किसी रिश्तेदार के साथ मंदिर की तरफ जा रही थी….उसके पैर में थोड़ी चोट लग गयी थी. वह लंगडाकर चल रही थी.

 

 

 

यह देखकर मुझे बहुत ही बुरा लगा. मैंने सोच लिया कि मंदिर से लौटते समय मैं उसे अवश्य ही सॉरी बोल दूंगा. जब मैं मंदिर से वापस लौटा तो वह वहीँ शांत भाव से कड़ी थी.

 

 

 

 

मैं उसकी पास गया और उसे सॉरी बोला. उसने  सर निचे झुका लिया और कुछ नहीं बोली. मुझे लगा कि यह ज्यादा ही नाराज है…फिर मैं वहा से चला और जैसे साइकल पर बैठने गया तो देखा कि किसी इसकी हवा ही निकाल दी है.

 

 

 

 

तभी वह लड़की मेरे पास आई और बोली सॉरी….पहले तो मैं उसके तरफ आश्चर्य से देखा और फिर जोर से हँसने लगा और यह देखकर वह भी जोर से हँसाने लगी और मैं उसका चेहरा देखता रह गया.

 

 

 

फिर हम दोनों रोज मिलने लगे….खूब सारी बातें होती थी….पढ़ाई की भी बातें होती थी….मुझे उससे प्यार हो गया…..मैं मौक़ा ढूंढ रहा कि कब मैं उससे अपनी दिल की बात कहूँ.

 

 

 

 

लेकिन इसी बीच वह मंदिर आना बंद कर दी…जब मैंने उसके बारे में पता किया तो पता चला कि उसके पापा का तबादला दुसरे शहर में हो गया है और वे लोग चले गये.

 

 

 

मैं बहुत दुखी हुआ…एक दिन उसकी एक दोस्त ने एक चिट्ठी मुझी दी जो कि उसके द्वारा मुझे लिखी गयी थी…..उसने कहा कि वह भी मुझे प्यार करने लगी थी.

 

 

 

लेकिन शायद कुदरत को यह मंजूर नहीं था. तेरा इश्क मुझे हमेशा ही याद रहेगा……मैंने हलकी सी सांस ली और कहा की सच तेरा इश्क मुझे ताउम्र याद रहेगा.

 

 

 

सच्ची लव स्टोरी

 

 

 

2- Do Pal Ka Pyar Sad Love Story in hindi आज पुरे ७ सालों के बाद अचानक से राहुल और प्रीती एक शापिंग माल में टकरा गए. चूँकि राहुल अपनी मां के लिए कुछ साड़ियाँ लेने आया था और प्रीती को भी कुछ खरीदारी करनी थी.

 

 

 

इतने सालों के बाद मिलने के बाद दोनों एक दुसरे को फटी आखों से देख रहे थे.दोनों ही कुछ बोलना चाह रहे थे लेकिन बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे. किसी तरह हिम्मत करके राहुल नी प्रीती से  पूछा ” कैसी हो ”

 

 

 

वही पहले जैसा प्यारा स्वर…कोई बनावट नहीं…कोई शिकायत नहीं …..यह देख कर प्रीती ने ख्यालों के सागर में डूबने के पहले खुद को संभाला और बोली ” मैं ठीक हूँ..तुम कैसे हो ”

 

 

 

इधर भी वही कश्मकश थी….राहुल ने नी ध्यान से प्रीती की तरफ देखा…..उसे साड़ी पुरानी बाते याद आने लगीं…..लेकिन उसने उन यादों को वही चहरे पर नहीं आने दिया…और हल्की  मुस्कान के साथ बोला “मैं भी ठीक हूँ ”

 

 

 

वे दोनों वहीँ माल के पास चहलकदमी करते हुए बाते करने लगे….धीरे धीरे वे फिर से खुलने लगे थे…..राहुल ने प्रीती से कहा कि तुम तो मुंबई चली गयी थी ना….यहाँ किसी काम से आई हो क्या.

 

 

सच्ची प्रेम कहानियां

 

 

 

हाँ ओ…..मेरे एक दूर के रिश्तेदार हैं…उनकी तबियत ज़रा ठीक नहीं थी तो मैं उनसे मिलने आई थी….प्रीती ने कहां

 

 

अच्छा हाँ..ओ फूफा जी ना…..क्या हो गया था उनको….राहुल ने थोड़ा घबराते हुए कहा.

 

 

 

नहीं…नहीं कुछ खास नहीं….थोड़ी तबियत खराब थी…..अच्छा ओ सब छोड़ो..ये बताओ की और क्या चल रहा है….बच्चे…..बीबी कैसे हैं….प्रीती ने बात को बदलते हुए कहा.

 

 

 

अरे शादी ही नहीं की तो बच्चे कहां से रहेंगे……राहुल ने सिरिअस होते हुए कहा.

 

 

 

 

उसके बाद मानसी भी चुप हो गयी…काफी समय तक ख़ामोशी छाई रही….ऐसा लग रहा था जैसे दोनों अपने अपने जिन्दगी की गहराई में गोते लगा रहे हों.

 

 

 

 

कुछ समय की शान्ति के बाद राहुल ने कहा….अभी हमें चलना चाहिए….फिर कल यही मिलते हैं.

 

 

 

हाँ ठीक है….प्रीती ने कहा..शायद वह भी समझ चुकी थी कि इस हालात में बात करना अब ज्यादा ही मुश्किल हो जाएगा.

 

 

 

राहुल वहाँ से निकलते ही फिर से उसी ख्यालों में डूब गया. जब राहुल की प्रीती से शादी होने वाली थी तो राहुल थोड़ा नर्वश था. वह चाहता था कि वह अपनी होने वाली जीवनसंगिनी के साथ थोड़ा समय बिठाये, उसके बारे मीन जाने समझे, उसकी पसंद नापसंद के बारे में जाने.

 

 

 

आखिर वह नए ख्यालात वालों में से था. लेकिन उसके घर वालों को यह बात ठीक नहीं लगी. उसके घर में उसकी मां , पिता और बहन थे. यही उसका परिवार था. उन्होने कहा कि ऐसा करना गलत है. लड़की के परिवार वाले इस बारे में क्या सोचेंगे.

 

 

 

क्या सोचेंगे….हां..आप लोग आज भी पुराने ख्यालात में जी रहे हैं. जब तक हम एक दुसरे को थोड़ा समझ नहीं लेते तो हम अपनी पूरी जिंदगी साथ कैसे बिता सकेंगे. बस दो चार मुलाक़ात और क्या……राहुल ने गुस्से और चिढते हुए कहा.

 

 

 

 

घर वालों के मना करने पर भी उसने यह बात प्रीती के घर वालों तक पहुंचा. प्रीती भी मोर्डन ख्यालात की लड़की थी. वह इस प्रस्ताव को ख़ुशी से मान गयी.

 

 

 

पहली ही मुलाक़ात में दोनों एक दुसरे को पसंद करने लगे. धीरे धीरे मुलाकातों का दौर बढ़ता गया और उनका प्यार भी बढ़ता गया. सब कुछ एकदम बढ़िया हो रहा था.

 

 

 

तय समय पर दोनों की शादी हुई. शादी के बाद भी सब कुछ एकदम सही चल रहा था कि एक दिन ऐसी घटना हो गयी कि मानो इस हसते खेलते परिवार को किसी की नजर लग गयी हो.

 

 

 

 सच्ची  Sad Love Story in Hindi

 

 

 

प्रीती ने अचानक से एक दिन कहा कि तुम इतना पैसा कमाते हो एक बड़ा घर क्यों ना ले लेते, जिसमे हम दोनों रह सकें.

 

 

 

“हम दोनों ” इससे क्या मतलब है तुम्हारा..राहुल ने हैरानी जताते हुए कहा.

 

 

 

मतलब साफ है….मैंने तुमसे शादी की है…घर की नौकरानी नहीं हम मैं….यहाँ तुम्हारे मां…बाप और उस पनौती बहन की सेवा करूं मैं….प्रीती ने गुस्से से कहा.

 

 

 

 

चुप….एकदम चुप…..अब एक आवाज नहीं……राहुल ने लगभग चिल्लाते हुए कहा और उसकी तेज आवाज को सुनकर घर के बाकी सदस्य तेजी से उसकी तरफ आये और राहुल की मां ने पूछा क्या हुआ बेटा.

 

 

 

कुछ नहीं मां…..आप लोगों के प्यार ने इसे पागल कर दिया है…राहुल ने तंज कसते हुए कहा.

 

 

 

तुम और तुम्हारा सारा खानदान पागल है…..क्रोध की आखिरी सीमा पर खडी प्रीती ने कहा.

 

 

 

 

चटाक……राहुल ने प्रीती को एक थप्पड़ लगा दिया.वह अब प्रीती की इस गुस्ताखी को नजरअंदाज नहीं कर सकता था. उसके परिवार वालों को कुछ समझ नहीं आ रहा था. वे हक्के बक्के वहीँ खड़े रहे और प्रीती अपने आंसू पोंछते हुए तेजी से अपने कमरे की ओर चली गयी.

 

 

 

अरे कोई मुझे बतायेगा की यहाँ क्या हो रहा है….राहुल के पिता ने चीखते हुए कहा.

 

 

 

अब राहुल सबको सारी बाते बताने लगा कि इतने में प्रीती बड़ा सा बैग लेकर निकली…..कहां जा रही हो बेटी राहुल की मां ने पूछा.

 

 

 

अपने घर जा रही हूँ..अब इस घर में दुबारा कभी नहीं आउंगी…..प्रीती के गुस्से से कहा.

 

 

 

रुक जा बेटी…..राहुल की मां ने कहा लेकिन अपनी मां की बात को काटते हुए राहुल ने कहा जाने दो मां…अभी उसे रोकना ठीक नहीं होगा.

 

 

 

घर में एक अजीब तरह का माहौल बन गया था. हर कोई खुद को ही दोष देता था. कई बार राहुल ने प्रीती से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

 

 

Short Love Story in Hindi दर्द की कहानी

 

 

वह शायद राहुल की कमजोरी समझ बैठी थी कि राहुल उसके बगैर नहीं रह सकता, अब प्रीती की इस बेरुखी ने राहुल को पहले से अधिक कठोर बना दिया.

 

 

 

उसने घर वालों से कह दिया कि अब प्रीती को कोई मनाने नहीं जायेगा और ना ही घर में कोई उसकी बात करेगा. सबको लग रहा था कि कुछ ही दिनों में सबकुछ सही हो जाएगा.

 

 

 

 

लेकिन शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था.कुछ ही दिनों में तलाक का नोटिस राहुल के घर आ गया. अब आशा की अंतिम डोर भी टूट गयी थी.

 

 

 

 

दरअसल प्रीती को रिश्तों की परख, रिश्तों की समझ  बिलकुल नहीं थी. वह बस पैसे को सबकुछ समझती थी, उसे इस बात का भान नहीं था कि अगर रिश्ते ही ना रहे तो पैसों की क्या बिसात रह जायेगी.

 

 

 

समय बिता और राहुल की बहन की भी शादी हो गयी. तलाक के केस की तारीख थी और उसी सिलसिले में प्रीती शहर आई हुई थी. लेकिन अब शायद इस रिश्ते की एक अलग शुरुआत होने वाली थी.

 

 

 

 

अगली सुबह का इंतज़ार हर किसी को थक, लेकिन प्रीती और राहुल को अगली सुबह का बहुत ही बेसब्री से इन्तजार था.अगली सुबह दोनों को बहुत सुहानी लग रही थी.

 

 

 

अब निश्तित समय से काफी पहले दोनों उस माल के पास पहुँच गए.

 

 

 

क्या हुआ राहुल इतनी जल्दी….क्या मेरे बिना रात नहीं कट रही थी….प्रीती ने मुस्करा कर पूछा.

 

 

 

न..ना अरे ऐसी कोई बात नहीं है…राहुल ने ऐसी कहा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो, लेकिन तभी उसने तपाक से कहा प्रीती तुम भी तो पहले ही आ गयी हो…शायद तुम भी ……वह बात पूरी कर पाता की प्रीती ने उसे गले से लगा लिया.

 

 

उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे….यह देख राहुल की आखों से भी आंसू के मोती छलक उठे…..सारे घमंड…नफ़रत…इन आंसुओं में धुल रहे थे. मुझे माफ़ कर दो राहुल…मैं रिश्तों को समझ नहीं पायी थी…प्रीती ने रोते हुए कहा.

 

 

 

मुझे भी माफ़ कर दो…राहुल ने कहा.

 

 

 

वहा काफी भीड़ जुट गयी…लोगों ने ताली बजाकर दोनों का स्वागत किया…..प्रीती ने केस वापस ले लिया और फिर से सभी साथ रहने लगे.

 

 

Hindi Sad Love Story

 

3- आखिर वह मुझे नहीं मिली :-हेलो दोस्तों मेरा नाम राहुल सक्सेना है. आज मैं आपको अपनी सच्ची लव स्टोरी बताने जा रहा हूँ, लेकिन दर्द इस बात का है की यह लव स्टोरी अपनी पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकी.

 

 

 

मित्रों आज मैं करीब एक साल से इस दर्द को खुद में ही छुपा कर रखा था, लेकिन अब इसे सहा नहीं जाता . अन्दर ही अन्दर बहुत घुटन सी होने लगी है, तो मैंने सोचा की क्यों ना इस दर्द को बाहर निकाल दिया जाए.

 

 

 

मुझे पता है कि इस दर्द के बाहर आने पर मेरी जिंदगी में एक बार फिर से भूचाल आने वाला है, लेकिन अगर यह दर्द बाहर नहीं आया तो मेरे अन्दर का भूचाल मुझे खत्म ही कर देगा.

 

 

 

 

दोस्तों बात तब की है जब मैं कालेज में पढाई करता था. वहाँ एक लड़की थी रेशमा…..रेशमा चौधरी. बला की खुबसूरत….कजरारे नैन….लाल सुर्ख होंठ….गोरा रंग….अरे लड़की क्यों अप्सरा कहना चाहिए था.

 

 

 

दोस्तों मुझे उस लड़की से पहली ही नजर में प्यार हो गया था. लेकिन मुझे हमेशा इस बात का दर था की कहीं यह प्यार एकतरफा तो नहीं है ना. मैं हमेशा से ही भगवान से इस बात की प्रार्थना करता था की यह प्यार एकतरफा ना हो.

 

 

Very Sad Love Story Hindi दर्दभरी प्रेम कहानी

 

 

 

मुझे भगवान ने वह समय दे ही दिया जब मैं इस बात को जांच लूँ की यह प्रेम एकतरफा है की नहीं. एक दिन कॉलेज की छुट्टी के बाद जब मैं घर जा रहा था तो देखा की रेशमा की साइकिल खराब हो गयी थी.

 

 

 

वह साइकिल को एक आम के पेड़ के निचे खड़ी करके उसे बनाने की कोशिश कर रही थी और वह साईकिल बन नहीं रही थी. दरअसल में उसका दुपट्टा साइकिल के चैन में फंस गया था.

 

 

 

 

मैंने जब यह देखा तो मैं वहीँ रुक गया और उसकी हेल्प की…उसके बाद हम साथ में ही अपने – अपने घर गए. रास्ते में हमने एक दुसरे के बारी काफी कुछ जाना…..धीरे धीरे हमारी दोस्ती परवान चढने लगी.

 

 

 

एक दिन मौक़ा देखकर मैंने उसे प्रपोज कर दिया. उसने उसी पल हाँ कह दिया. यह मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था. मैं उस दिन बहुत खुश था.

 

 

 

लेकिन शायद यह ख़ुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली थी. एक्जाम का समय आने वाला था. हम लोग बहुत मेहनत से पढ़ाई में लग गए. अब मेरा लक्ष्य अच्छे नम्बर्स लाकर रेशमा को और अधिक खुश करना था.

 

 

True Sad Love Stories

 

 

 

एक्जाम्स खत्म हो गए. रिजल्ट के दिन आ गए, लेकिन मुझे क्या पता था की आज के दिन दो दो परिणाम आने वाले हैं एक मेरे पढाई के और एक मेरे प्रेम के…..

 

 

 

मेरी नजर रेशमा को ही धुंढ रही थी.लेकिन रेशमा कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. तभी राजू ने बताया की जाकर नम्बर्स ले ले……जब मैंने रिजल्ट लियए तो देखा की ९८% मार्क्स आये हैं.

 

 

 

मैं बहुत ही खुश हो गया कि पहली परीक्षा में तो मैं पास हो गया अब दूसरी परीक्षा में भी अवश्य ही पास हो जाऊँगा. अब मेरी नजर और भी बेसब्री से रेशमा की राह ताकने लगीं.

 

 

 

 

तभी मैंने देखा की रेशमा एक हैंडसम शहरी लडके के साथ कार से उतरी…मैं यह देख कर हैरान हो गया की किस तरह वह लड़का उसकी बाहों में हाथ डालकर उससे बातें कर रहा था.

 

 

 

उसके बिखरे हुए बालों को संवार रहा था…मैं दौड़कर रेशमा के पास गया, लेकिन रेशमा ने मुझे इग्नोर कर दिया…अब मुझे गहरा धक्का लगा….मैं तेजी सी उसके पास पहुंचा और उसका हाथ पकड़ कर बोला कौन है यह लड़का…..मेरा गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर था.

 

 

 

क्या बेहूदगी है…हाथ छोड़…उस लडके ने कहा.

 

 

 

तू बीच में मत आ….यह हमारे बीच का मामला है….और तू है भी कौन.

 

 

 

इसके पहले की वह लड़का कुछ जवाब दे….रेशमा नी कहा की यह हेमंत है…..मेरा मंगेतर.

 

 

 

और मैं…मैने पूछा.

 

 

 

तू…तू मेरा…….टाईमपास और दोनों हंसने लगे.

 

 

 

 

 

मैं वहीँ बैठ गया……ऐसा लग रहा था की पूरा आसमान मेरे ऊपर गिर पडा हो..धरती में मेरे पैर जकड गए हों..किसी तरह से मेरे दोस्तों ने मुझे मेरे घर पहुंचाया और वहाँ कहा की इसकी तबिय्यत अचानक से खराब हो गयी थी.

 

 

 

 

उस दिन के बाद सी मैं कुछ भी ठीक ढंग से नहीं कर पा रहा हूँ…ना ही खाने में मन लगता है….न ही कुछ करने में…..दोस्तों से पता चला की वह फेल हो गयी थी….तो भी इस दिल को उसके फेल होने का दर्द हुआ…उस दिल को जिसे उसने ठुकरा दिया है.

 

 

खैर दोस्तों मैंने आज इस पोस्ट आखिर वह मुझे नहीं मिली sad love के माध्यम से अपना सारा दर्द निकाल दिया है….मैं अब शायद फिर से वही राहुल सक्सेना बन पाउँगा जो पहले था…..धन्यवाद

 

 

 

Best Sad Love Story In Hindi

 

 

 

4- Teri Yaad:- तुम्हें  क्या हासिल हुआ वह मैं नहीं जानता हूँ और ना ही जानने की अब कोई इच्छा ही बाकी रह गयी है. लेकिन मैं इतना अवश्य जानता हूँ और दावे के साथ कह सकता हूं कि तुमने उस शख्स को खोया है जो तुम्हें खुद से भी ज्यादा प्यार करता था और शायद है भी.

 

 

 

चलो जाने दो तुम्हें जो अच्छा लगा वह तुमने किया. कोई बात नहीं लेकिन एक बात का ध्यान रहे खुदा के वास्ते अब मेरी ज़िन्दगी में दुबारा कभी भी दाखिल होने की कोशिश मत करना. अब  मै और सहन नहीं कर पाऊंगा.

 

 

 

दुबारा कभी भी मिलने की कोशिश भी नहीं करना …..क्योंकि जब भी मैं तुम्हें देखूंगा तो तुम्हारी यह बेवफाई मुझे याद आएगी और हो सकता है कि मैं खुद को संभाल ना सकूं.

 

 

 

उस दिन अचानक ही साक्षी की नजर रौनक के द्वारा लिखे हुए आखिरी ख़त पर पड़ी जो कि महीनो से उसकी किताब में दबा हुआ था. अब साक्षी अपने पुराने दिनों में खो गयी .

 

 

 

साक्षी का कालेज का पहला दिन था. वह जैसे ही कालेज में आयी बाकी लड़कों ने उसकी रैंगिंग शुरू कर दी. उसे लंगड़ाते हुए चलने को कहा गया. साक्षी इस कालेज में नई थी . उसका कोई दोस्त भी  नहीं  था.

 

 

 

 

तब रौनक ने उसे बचाया और सारे स्टूडेंट्स को खूब डांट लगाईं. रौनक एक स्थानीय नेता का बेटा था, लेकिन वह कभी भी अपने पावर का गलत इस्तेमाल नहीं करता था.

 

 

 

समय बीता…..साक्षी और रौनक में नजदीकियां बढ़ने लगी. अब दोनो बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे. उनकी दोस्ती को देखकर बाकी स्टूडेंट्स को जलन होती थी.

 

 

 

बहुत ही ख़ूबसूरत जोड़ी थी. लेकिन शायद इस खुबसूरत जोड़ी को किसी की नजर लग गयी. पढाई पूरी होने के बाद साक्षी एक प्रतिष्ठित कंपनी में जॉब करने लगी.

 

 

 

दोनों की मुलाकाते होती रहती थी. इधर इलेक्शंस के टाइम आ गए और साक्षी के काल आने भी कम हो गए. उस दौरान रौनक ने कई बार साक्षी से  मिलने की कोशिश की, लेकिन साक्षी कोई ना कोई बहाना बनाकर मिलाने से मना कर देती.

 

 

 

इलेक्शंस खत्म हुए. रौनक के पापा की बड़ी जीत हुई. हर तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ ही थी, लेकिन रौनक के लिए दुखों का पहाड़ तैयार था. रौनक जीत की बात खुद बताने जब साक्षी के घर गया तो पता चला कि वे लोग यहां से जा चुके हैं. वहाँ कोई दूसरा किरायेदार आ गया था. रौनक ने पूरा शहर छान माना, लेकिन साक्षी नहीं मिली. वह जॉब भी छोड़ चुकी थी.

 

 

 

रौनक बुरी तरह टूट गया था……बहुत मुश्किलों से वह अपने आपको संभाला…..तब उसने यह चिट्ठी लिखी और रोशनी जो कि साक्षी की बेस्ट फ्रेंड थी उसके हाथों इसे भिजवा दिया…..लेकिन साक्षी ने इसे खोला नहीं बल्कि वैसे ही रख दिया.

 

 

 

यह ख़त पढ़ने के बाद साक्षी फूट-फूट कर रोने लगी….वह भी रौनक से बहुत प्यार करती थी, लेकिन उसका परिवार एक  मध्यमवर्गीय परिवार था.

 

 

 

 

 

जबकि रौनक एक प्रतिष्ठित राज नेता की फैमिली से था…..सो हर समय साक्षी के मन में  यह इस दूरी का भय लगा रहता था….और इसे वह रौनक के साथ कभी शेयर नहीं कर और इस तरह इस दर्द भरे प्यार  का अंत हो गया.

 

 

 

5- Badnaseebi sad love story in Hindi :- हेलो दोस्तो, मेरा नाम राकेश है. है. मैं U.P. के मेरठ का रहने वाला हूँ. वैसे तो मैं मुंबई के दादर में रहता हूँ, वहाँ मैं एक प्रतिष्ठित कंपनी में सुपरवाइजर हूँ. मेरी अच्छी पगार है. ८ घंटे की जाब है. हफ्ते में ५ दिन काम होता है.

 

 

 

कंपनी का मालिक राजस्थान का है. उसके विचार बहुत ही अच्छे हैं. किसी के उपर कोई दबाव नहीं देता है, पूरी कंपनी एक टीम की तरह काम करती है. साल में २ महीने की छुट्टी मिलती है और उस छुट्टी के पैसे भी नहीं काटे जाते हैं अर्थात पेड हॉलीडे.

 

 

 

दोस्तों इस बार मै जून लास्ट में घर आया था, मेरे एक दोस्त की शादी थी. वह मेरा बहुत ही खास मित्र था. मेरे और उसके का फासला तो बहुत ज़्यादा था, लेकिन दोनो दिलों के बीच में कोई दूरी नहीं थी. मेरे और उसके घर के बीच की दूरी १० किलोमीटर की थी, इसके बावजूद हमारे और उसके घर के बीच के संबंध बहुत ही प्रगाढ़ थे.
जुलाई के पहले सप्ताह में उसकी शादी थी. इस बार शादी के मुहूर्त लेट तक थे. मै घर जिस दिन पहुँचा भाईसाहब पूरे परिवार के साथ घर पर पहुँच गये और उसी दिन मुझे शाम तक अपने घर भी लेकर चले गये. चलिए अब इन भाईसाहब का नाम भी बता ही देता हूँ,इनका नाम था अमित त्रिपाठी.
पूरी रात मैं वहीं रुका. मेहमान की तरह सेवा सत्कार हुआ. मैं बार-बार कहता रह गया कि घर का ही लड़का हूँ, लेकिन जब कोई माने तब ना. सुबह मैं घर के लिए प्रस्थान करने वाला था कि भाईसाहब का आदेश हो गया कि कल सुबह चले आना बाइक के साथ, एक मेहमान के यहां जाना है और वहाँ दो दिन के लिए रुकना है. उनके घर पर कोई कार्यक्र्म है. मैने भी हाँ में सर हिलाया और वहाँ से प्रस्थान किया.
अगले दिन मैं समय से उनकी घर पहुँच गया, लेकिन भाईसाहब पहले की तरह लेट-लतीफ, मैं ज़ोर से आवाज दिया…ओये अमित भैया…अमित त्रिपाठी जी.
आवाज सुनकर माँ जी बाहर आईं और बोलीं आ जाओ बेटा घर में आ जाओ, थोड़ा पानी पी लो, ओकर तो पहले सी आदत है, कितना भी जरूरी काम हो, टाइम से नहीं जा सकता.
मैं घर में आया पानी पिया, तब तक अमित भी तैयार होकर आ गया. हमने मंज़िल की ओर प्रस्थान किया. हम जहाँ जा रहे थे वह अमित के घर से करीब ६ किलोमीटर की दूरी पर था और मेरे घर से १६ किलोमीटर की दूरी पर.
करीब १५ मिनट में हम वहाँ पहुँच गये. अमित ने सभी से मेरा परिचय कराया. उनके यहाँ गृहपरवेश का कार्यक्रम था. दिन भर हम लोग मेहमानों की आवभगत में जुटे रहे.
उस दिन हल्की -हल्की बारिश हुई थी. शाम के समय बाकी लोग तो घर की छतों पर सो गये लेकिन हम दोनो लोग बाहर बरामदे मे सो गये.

 

 

 

” बारिश की बूंदे, बूँदों का पानी ……. तू रंग सरबतों का..मैं मीठे घाट का पानी” , गीतों के बोल, वह भी इतने मधुर आवाज में, मैं चौंक कर उठ गया, मैने समय देखा तो सुबह की ४.३० बज रहे थे.
हल्की -हल्की बारिश हो रही थी, बिजली कड़क रही थी और उसी के बीच इतना कर्णप्रिय गीत. मेरा तो दिल ही आ गया. मैं उसी पल यह जानने को बेताब हो रहा था कि आख़िर वह सुरों की मल्लिका है कौन?
True Sad Love Story in Hindi

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मैं उसे ढूढ़ने के लिए जाने वाला ही था कि अमित की नीद भी खुल गयी. उसने मुझसे कहा बे क्या कर रहा है. उल्लू की तरह रात भर जागते रहता है. कभी सो भी लिया कर.
तभी वह स्वर राग फिर से सुनाई दिया…ये मोह-मोह के धागे... वह भी चौंक पड़ा और बोला बे बज कितना रहा है…मैने उसका चेहरा देखा तो उसके १२ बजे हुए थे.
मैने उससे पूछा भाई के हो गया….. वह घबराकर बोला बे बकैती बंद कर समय बता.
भाई सुबह हो गयी है, ५ बजाने वाले हैं. मुंबई में तो लोग अब तक ड्यूटी के लिए निकल जाते हैं. तब जाकर उसने राहत की सांस ली और बोला भाई मुझे तो लगा की कोई चुड़ैल तो नहीं है.
फिर हमलोग टार्च लेकर उस हसीना को ढूढ़ने निकल पडे, गली-गली भटके, गाँव में लगभग हर जगह ढूँढा वो नहीं मिली. हवा के झोको के साथ ही उसकी स्वरलहरी भी हर दिशाओं से आती प्रतीत होने लगती थी. हम उसे ढूंढते सड़क के उस पार पहुँचे कि ” तुझसे लागी मेरे मन की लगन ” की ध्वनि काफ़ी करीब महसूस हुई.
हमारी नज़रें भी उसी तरफ घूमीं … उस राजकुमारी को एक टक देखता रह गया. मेरा बावरा मन अब उसकी गिरफ़्त में हो चुका था, वह दौड़ कर सड़क के उस पार बने घर में चली गयी.
सड़क के उस पार बना वह इकलौता घर था. घर तो काफ़ी आलीशान था, लेकिन उसी घर से एक लड़की का विलाप कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा था. मैने उसी समय अमित से पूछा … भाई यह घर किसका है तू बता सकता है.
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नहीं भाई…इसके बारे में मुझे तो नहीं पता है, लेकिन तू इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है. कहीं तुझे प्यार- व्यार तो नहीं हो गया. अगर हो भी गया हो ना बेटा तो भूल जइयो, वह खुद किसी के प्यार में फँसी लग रही थी. भाई बदनाम हो जाएगा.

 

 

 

चुप कर…. कुछ तो बात है, तू खाली पता कर उस घर के बारे में, कुछ तो गलत हो रहा है उस लड़की के साथ…. मैने अमित से कहा.
” मैंने ही गलती की… मुझे तुझे यहाँ लेकर आना ही नहीं चाहिए था. अरे क्यों हम किसी के मामले में दखल दें “. अमित ने कहा
वाह क्या बात कही तूने…शाबाश.. तुझे तो मैडल मिलना चाहिए..मत पड़ तू किसी के बीच में. मैं खुद पता कर लूँगा. मैंने भी गुस्से में कहा और फिर हम वहाँ से निकल पड़े.
कुछ देर के बाद अमित ने कहा…चलो ठीक  है. मैं कल पता लगाता हूँ.
हम जब तक घर पहुँचते यहां सब लोग जाग गये थी और हमें खोजने की तैयारी की जा रही थी. मै हालत को देखते ही सब समझ गया और तुरंत   बोला.
क्षमा कीजिए हम लोगटहलने गये थे, मुंबई में भी जाता था तो वही आदत है. मुझे लगा कि हम जल्द आ जाएंगे, इसलिए हमने किसी को जगाया नहीं.
दरअसल हम टहलते- टहलते सड़क तक चले गये , वहां हमें एक मधुर आवाज सुनाई ने, जब उस तरफ आगे बढ़े तो देखा किएक २०-२२ साल की लड़की यह गीत गा रही थी और उसके आखों से आँसू बह रहे थे… हमारी आहट पाकर वह तुरंत वहां से हट गयी और 
सामने बने आलीशान घर में चली गयी.
हम रास्ते भर इसी की चर्चा कर रहे थे कि इतने आलीशान घर की लड़की इस तरह बेबश और लाचार कैसे है. आख़िर क्या हुआ है उसके साथ?
हम इस बात के एक बार फिर से क्षमा मांग रहे हैं…हमें बता कर ही जाना चाहिए था. लेकिन कृपया हमें कोई तो उसके बारे में बताये. यह बात सुनकर वहां एक खामोशी छा गयी और सबके चेहरे गमगीन हो गये.
तब एक बुजुर्ग ने कहा बेटा बड़ी लंबी कहानी है…जा पहले तैयार हो जा फिर मैं तुझे सब कुछ बताता हूँ. फिर सभी लोग अपने-अपने कार्य में लग गये.
लेकिन मुझे वह चेहरा, उस चेहरे की उदासी अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी. मैं और अमित दोनो ही फटाफट तैयार होकर दादाजी के पास आ गये. अमित भी पूरी कहानी जानने को बेचैन हो रहा था. घर के कुछ अन्य सदस्य भी आ गये. हालांकि उन्हें सारी घटनाओं की जानकारी थी.
दादाजी ने कहा कि वह रश्मि थी. उसके पिताजी सेना में कर्नल थे. नसीब की मारी है बेचारी, भगवान ऐसी नसीब दुश्मन को भी ना दें. जब वह मात्र ३ वर्ष की थी उसकी मां का देहांत हो गया.
इतने कम उम्र में मां का साया सर से हट जाने से वह परेशान रहनी लगी. घर में उसके दादाजी को छोड़कर उसे कोई लाड़ प्यार नहीं करता था.
इसी बीच उसके पिता रमेश पांडे के किसी रिश्तेदार ने उनके लिए रिश्ता लेकर आए. रमेश इसके खिलाफ था लेकिन उसकी मां ने ज़िद करके रिश्ता कर दिया. रमेश को भी लगा कि रश्मि को एक मां मिल जाएगी.
लेकिन हुआ उसके ठीक उल्टा, घर में आई नई बहू प्रमिला, रश्मि को नापसंद करने लगी, हद तो तब हो गयी जब प्रमिला को एक पुत्र हुआ. उसके बाद रश्मि उस घर की एक नौकरानी बन कर रह गयी.
रमेश और रश्मि के पिता की ज़िद के बाद रश्मि को स्कूल भेजा जाने लगा. वह पढ़ने में बहुत ही अच्छी थी. इसी बीच उसके दिल में किसी और की दस्तक हुई और धीरे-धीरे उस अजनबी ने उसके दिल पर कब्जा कर लिया.. वह भी उसी स्कूल में पढ़ता था. वह उससे बहुत अधिक प्यार करने लगी थी. उसका नाम विहान था.
समय बिता रश्मि ने १०वीं बहुत ही अच्छे नंबर से पास किया. इधर विहान भी १०वी पास कर लिया.. फिर दोनो एक साथ एक ही कालेज में दाखिला लिया. रश्मि, रमेश से कुछ नहीं छुपाती थी. उसने रमेश से विहान के बारे सब कुछ बता दिया. रमेश भी इस बात से सहमत हो गया था.

लेकिन इसी बीच एक घटना हुई, जिसने रश्मि के प्रत्येक सपने को चकनाचूर कर दिया. रश्मि का एक वीडियो वायरल हुआ, जो समाज के दृष्टि से बहुत ही आपत्तिजनक था.

 

 

 

इस वीडियो के वायरल होते ही उसके जिंदगी में भूचाल आ गया. इस सदमें को उसके दादाजी बर्दास्त नहीं कर सके और उनकी तबीयत बिगड़ती चली गयी… कुछ दीनो में उनकी मृत्यु हो गयी.

 

 

 

इधर एक आतंकवादी हमले में रमेश भी शहीद हो गये. रमेश के शहीद होने के बाद रश्मि की बची उम्मीदें भी धूमिल हो गयी. विहान भी उस कालेज को छोड़ दिया.

 

 

 

वह एक अमीर खानदान से ताल्लुक रखता है. उसने यह खबर उड़ा दिया की पैसे की लालच में रश्मि ने ही उसके साथ यह गलत हरकत की थी और यह वीडियो बनाया. तब से रश्मि कहीं बाहर नहीं निकलती. वह ही रोज उस पेड़ के पास आकर अपने दुख को साझा करती है.

 

 

 

यह सुनकर वहां सबके आँखों में आँसू थे… तभी शोरगुल सुनाई देने लगा..सभी लोग रश्मि के घर की ओर दौड़ रहे थे….हम लोग भी तेज़ी से उस ओर दौड़े……हमने देखा की रश्मि जिंदगी की जंग हार गयी थी…उसने मृत्यु का वरण कर लिया था.

यह देख दादाजी बोली…मुक्त हो गयी….इस दुख के पहाड़ से…………!!

 

 

 

 

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