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Bharatiya Tyohar

सांताक्लाज क्रिसमस २५ दिसंबर

सांताक्लाज क्रिसमस २५ दिसंबर
सांताक्लाज क्रिसमस २५ दिसंबर

 सांताक्लाज क्रिसमस २५ दिसंबर क्रिसमस २५ दिसंबर को ईसाईयों द्वारा मनाया जानेवाला सबसे बड़ा पर्व है. इस दिन उनके प्रभु ईसा मसीह का जन्म हुआ . इस दिन को बड़ा दिन भी कहा जाता है. दुनिया में हर जाति धर्म के बच्चों के लिए प्रत्येक त्यौहार आकर्षण का केंद्र होता है. क्रिसमस भी इससे अछूता नहीं है. क्रिसमस के १५ दिन पहले ही ईसाईयों द्वारा अपने घर और घर के आस पास की साफ सफाई शुरू कर देते हैं और इसके साथ ही त्यौहार की शुरुआत हो जाती है.

रोशनी केक , क्रिसमस ट्री, चाकलेट और अन्य विशेष मिठाइयों के साथ गिरिजाघर में आधी रात को प्रार्थना के साथ ही खुशियाँ बाटने का दौर शुरू हो जाता है. लेकिन बच्चों को इन्तजार रहता है सांताक्लाज का. मान्यता है कि सांताक्लाज स्वर्ग से विशेष रूप से लाल कोट और फरवाले कपडे के साथ बच्चों को सरप्राइज उपहार देने के लिए आते हैं और बच्चों के नीद में रहते ही सरप्राइज उपहार रख देते हैं और बच्चे उठते ही उन उपहार को देखकर खुश हो जाते हैं.

सांताक्लाज क्रिसमस २५ दिसंबर
सांताक्लाज क्रिसमस २५ दिसंबर

सांताक्लाज का जन्म ३०० एडी में मार्या यानी आज के तुर्की में हुआ था. संत निकोलस जो की एक बिशप थे. निकोलस पुरे वर्ष भर अपनी पत्नी के साथ मिलकर खिलौने बनाया करते थे और उसे बच्चों में उपहार स्वरुप बांटा करते थे. सन १८२२ में मूर नामक एक व्यक्ति ने संत निकोलस पर एक कविता लिखी और इसको आधार बनाकर १८६३ में अमेरिका के एक कार्टूनिस्ट थामस नास्ट ने सांताक्लाज को लाल सूट में सफेद फर के साथ दिखाया और उसका चलन आज तक जारी है.

इस पर्व को अमेरिका में क्रिस किगल, ब्रिटेन में फादर क्रिसमस और फ़्रांस में पेयर नायल कहा जाता है. क्रिसमस के पहले ही स्कूल पार्क, माल, सिनेमाहाल और बहुत सारी सार्वजनिक स्थानों पर कंधे पर लाल झोला लटकाए, उसमें उपहार और चाकलेट लिए बच्चों पर प्यार लुटाते सांताक्लाज नजर आते हैं और उन्हें देखते ही बच्चों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहता है.अब यह चलन हिन्दुस्तान में भी बढ़ रहा है. कान्वेंट स्कूलों, शहरी क्षेत्रों में क्रिसमस के त्यौहार की धूम रहती है. स्कूलों को , माल को खूब सजाया जाता है.

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