हास्य कहानिया

shaikh chilli की चिट्ठी 

shaikh chilli की चिट्ठी 
Written by Abhishek Pandey

shaikh chilli की चिट्ठी एक बार shekh chilli के भाई बीमार हो गए . इस बात की खबर जब sheikh chilli को पड़ी तो उन्होंने भाई की खैरियत पूछने के लिए चिट्ठी लिखने की सोची. पहले के समय में डाक व्यवस्था नहीं थी. उस समय चिट्ठियाँ मुसाफिरों अर्थात लोगों के हाथ ही भिजवाई जाती थी.

 

shekh chili ने नाई से चिठ्ठी पहुँचाने के लिए कहा, लेकिन नाई ने बहाना बना दिया क्योंकि मियाँshekh chilli पैसे देने में बड़े ही कंजूस थे. दुसरे मुसाफिरों ने फसल पकी होने के कारण जाने से मना कर दिया. अब shekh chilli का दिमाग काम नहीं कर रहा था तो उन्होंने सोचा कि वे खुद ही चिट्ठी देकर आ जाते हैं, क्यों किसी की सिफारिस करना.

अगले ही दिन shekh chilli चिट्ठी देने के लिए रवाना हो गए और शाम तक घर पहुँच गए. उन्होंने घर का दरवाजा खटखटाया तो उनका बीमार भाई बाहर आया. shaikh chilli ने उसे चिट्ठी पकड़ाई और तुरंत ही वहाँ से निकल लिए. यह देखकर उनका भाई उनके पीछे दौड़ा और उन्हें रोकते हुए बोला ” भाई इतनी दूर से आया है तो घर में , मुझसे गले किल. नाराज है क्या मुझसे .” यह कहकर उनका भाई जैसे ही गले मिलने के लिए आगे बढ़ा shekh chilli ने उसे रोकते हुए कहा ” मैं आपसे बिलकुल भी नाराज नहीं हु. वह तो चिट्ठी पहुंचाने के लिए कोई मुसाफिर नहीं मिल रहा था सो मैं ही चला आया.”

 

ठीक है, अब जब आ ही गए हो तो दो चार दिन रुक जाओ..भाई ने समझाते हुए कहा

 

यह सुनते ही sheikh chikki का पारा चढ़ गया . उन्होंने नाराज होते हुए कहा ” भाई साहब आप अजीब इंसान हैं. आपको बात समझ ही नहीं आ रही है. मैं यहाँ मुसाफिर की जगह पर आया हूँ . मुझे आपसे मिलने आना होता तो खुद ही आ जाता. मुसाफिर के बदले थोड़े ही आता.” उनका भाई माथा पिटता रह गया.

 

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