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Shaniwar Wada Story in Hindi . शनिवार वाड़ा का इतिहास हिंदी में

Shaniwar Wada
Written by Abhishek Pandey

Shaniwar Wada Story in Hindi शनिवार वाड़ा की स्टोरी

 

 

 

Shaniwar Wada भारत के महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। इस किले की डरावनी कहानी है। यह भारत के भूतिहा किलों में से एक है। २४ फ़रवरी १८२८ को शनिवार वाडा किले में आग गयी।

 

 

 

इस आग पर ७ दिनों तक काबू नहीं पाया जा सका।  इस आग में अधिकांश किला जल गया था। आज इसके अवशेष बने हुए हैं। कहा जाता है कि अमावस्या की रात, एक दर्दनाक आवाज़ “बचाओ-बचाओ” की गुहार लगाती है। इस आवाज का राज क्या है? आज इस पोस्ट में हम इन सभी कारणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

 

 

 

पुणे जैसे व्यस्त शहर के बीच, अमर प्रेम का प्रतीक, शनिवार वाड़ा आज एक डरावनी जगह  के लिए प्रसिद्ध हो गया है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? कारण क्या है? इसके लिए आपको इतिहास की गहराइयों में जाना होगा।

 

 

 

 शनिवार वाड़ा 

 

 

 

इस किले की नींव बाजीराव प्रथम ने शनिवार 10 जनवरी, 1730 को रखी थी। इसलिए इस किले का नाम शनिवार वाडा था। यह किला अपनी भव्यता और ऐतिहासिक कारणों से प्रसिद्ध है।

 

 

 

 

यह एक ऐतिहासिक किलेबंदी है। इसे १६वीं शताब्दी में पेशवाओं द्वारा बनाया गया था। उस समय महाराष्ट्र में पेशवाओं का शासन था। उस समय इस महल के निर्माण की लागत १६११० थी।

 

 

 

इस महल में एक हजार से अधिक लोग एक साथ रह सकते हैं। इस किले में कुल ५ दरवाजे हैं। पहला द्वार दिल्ली दरवाजा के नाम से जाना जाता है, दूसरा मस्तानी दरवाजा है, तीसरा खिड़की दरवाजा, चौथा नारायण दरवाजा और गणेश दरवाज़ा है।

 

 

इस किले पर १८१८ तक पेशवाओं का शासन था। १७२८  में, इस महल में एक रहस्यमयी आग लगी थी और महल का एक बड़ा हिस्सा उस आग से घिर गया था। जिससे काफी नुकसान भी हुआ।

 

 

 

आइये सभी दरवाजों के बारे में जानते हैं।

 

 

 

दिल्ली दरवाजा- यह किले का मुख्य दरवाज़ा है। दरअसल यह दरवाज़ा उत्तर की ओर खुलता है, इसलिए इसका नाम दिल्ली दरवाजा रखा गया।  यह एक विशाल दरवाजा है।

 

 

 

युद्ध के समय में दरवाजे को टूटने से बचाने के लिए इसमें बड़े और नुकीले कील लगे होते थे। दोनों दरवाजों पर ७२ नुकीले कील हैं, जिनकी लम्बाई १२ इंच है।

 

 

 

यह दुश्मन के हाथी के हमलों से बचाने के लिए लगाया गया था। इसमें एक छोटा दरवाजा भी है जिसका उपयोग सामान्य समय में आने – जाने में किया जाता है।

 

 

 

मस्तानी दरवाजा – इस दरवाजे का इस्तेमाल बाजीराव की पत्नी मस्तानी कराती थीं।  परिवार के अधिकतर सदस्य मस्तानी के खिलाफ थे और इसीलिए मस्तानी इस दरवाजे का इस्तेमाल करती थीं। इसे अलीबहादुर दरवाज़ा भी कहा जाता है।

 

 

 

खिड़की दरवाजा – इस दरवाजे में बड़ी संख्या में खिड़की है।  इसिलिये इसे खिड़की दरवाज़ा कहा जाता है।

 

 

 

 

गणेश दरवाजा – यह दरवाजा गणेश महल के पास स्थित है।  इसीलिए इसे गणेश दरवाजा कहा जाता है।

 

 

 

 

नारायण दरवाज़ा – नारायण राव की ह्त्या के बाद उनके शरीर को इसी रास्ते से ले जाया गया।  इसी कारण इसका नाम नारायण दरवाजा है। इससे पहले यह दरवाजा नौकरानियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

 

 

 

लोटस फाउंटेन – शनिवार वाड़ा का मुख्य आकर्षण कमल के आकार का फव्वारा है, जिसे लोटस फाउंटेन या हजारी करंज के नाम से जाना जाता है। इस फव्वारे में कमल के आकार की १४ पंखुड़ियां हैं, जो कलात्मकता का एक अनूठा नमूना है।

 

 

 

आखिर शनिवार वाड़ा से डरावनी आवाज क्यों आती है?

 

 

 

यह एक खुशहाल किला था। यह वर्षों से समृद्ध था।  यहां पेशवाओं का शासन था। मराठा इतिहास में पेशवा साम्राज्य का विशेष महत्व है।  पेशवा बहुत ही बहादुर थे।  उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ीं और जीतीं।

 

 

 

 

कुछ लोग कहते हैं कि अमावस की अँधेरी रात इस किले की सबसे भयानक रात होती है।  इस किले में रात को आत्माओं का तांडव होता है। पेशवा नाना साहब के तीन बेटे थे।

 

 

 

विश्व राव, माधव राव और नारायण राव।  स्थानीय लोगों के अनुसार पानीपत की लड़ाई के बाद जब पेशवा कमजोर हो गए और नाना साहेब की मृत्यु के बाद उनके बेटे माधव राव ने राज्य संभाला।

 

 

 

नाना साहेब के छोटे भाई रघुनाथ राव को राज्य के कामकाज की देखरेख की जिम्मेदारी दी गयी थी। लेकिन रघुनाथ राव इसमें विफल रहे।  परिणामस्वरूप उन्हें कैद कर लिया गया।

 

 

 

माधव राव ने पानीपत के तीसरे युद्ध में हार को अपनी गलती माना। उस युद्ध में मराठों को बहुत नुकसान हुआ। कई बड़े योद्धा शहीद हुए, जिनमें उनके बड़े भाई विशव राव भी शामिल थे।

 

 

 

इस शोक में माधव राव की भी मृत्यु हो गयी।  माधव राव की मृत्यु के बाद, नारायण राव को राज्य की जिम्मेदारी दी गयी। उस समय, नारायण राव केवल १४ वर्ष के थे।

 

 

Shaniwar Wada Haunted Story

 

 

उसी समय रघुनाथ राव जेल से रिहा हुए।  उन्होंने फिर से काम करना शुरू कर दिया। लेकिन रघुनाथ राव और उनकी पत्नी आनंदी बाई इस व्यवस्था से खुश नहीं थे।  वे पुरे साम्राज्य पर अधिकार चाहते थे।

 

 

 

नारायण राव इस बात को समझ गए थे।  उन्होंने रघुननाथ राव पर नजर रखना शुरू कर दिया। इस बीच, राघोबा ने नारायण राव को गिरफ्तार करने के लिए भीलों के प्रमुख समर सिंह को एक पत्र लिखा।

 

 

 

 

लेकिन आनंदी बाई ने लालच की पराकाष्ठा को पार करते हुए, पत्र में बदलाव किया और नारायण राव को मारने के लिए लिख  दिया। समर सिंह ने सही मौके पर नारायण राव पर हमला किया।

 

 

 

 

नारायण राव  मराठी में ” काका मला वाचवा ”  कहते हुए भागे।   लेकिन अंत में नारायण राव मारे गए और उनके शरीर को नारायण दरवाजा के माध्यम से बहा दिया गया। तब से नारायण राव की आत्मा वहाँ भटकती है। शनिवार वाड़ा की दीवारों से किसी के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं।

 

 

 

 

Let’s know more about Shaniwar Wada…

 

 

इस किले  का निर्माण पहली बार केवल पत्थरों का उपयोग करके किया गया था।  लेकिन निचली मंजिल पूरी  बाद राजा शिव ने उसे ईंटों के साथ शेष महल का निर्माण करने का आदेश दिया।

 

 

 

कहा जाता है कि शनिवार वाडा के निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद, ब्रिटिश सेना ने भी इस पर हमला किया था। हमले में, शनिवार वाडा की ऊपरी छह मंजिलें जल गईं और इस वाडा की निचली मंजिल बनी हुई है, जिसे तोपखाने से सजाया गया है। वर्तमान में, केवल शनिवार वाड़ा का मुख्य बाहरी हिस्सा बचा है, जिसे आप पुणे शहर में जाकर देख सकते हैं।

 

 

 

How to reach Shaniwar Wada?

 

 

पुणे सभी प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, जयपुर, बैंगलौर आदि से जुड़ा  है।  आप  यहां ट्रेन या फ्लाइट  से आसानी से पहुँच सकते हैं। पुणे पहुंचने  के बाद, आप बस, रिक्शा या टैक्सी जैसे किसी स्थानीय परिवहन  की मदद सकते हैं। इसके अलावां आप पुणे नगर निगम की बस ” पुणे दर्शन बस ” द्वारा शनिवार वाड़ा  के साथ अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं।

 

 

 

What is The Timing And Entry Fees of Shaniwar Wada Fort?

 

 

शनिवार वाडा सुबह 7:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुला रहता है। प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 5 रुपये प्रति व्यक्ति और विदेशियों के लिए 125 रुपये प्रति व्यक्ति है। प्रकाश और ध्वनि शो के लिए अलग-अलग शुल्क हैं।

 

 

 

What is the right time to visit Shaniwar Wada?

 

 

मौसम के अनुसार शनिवार वाड़ा जाने के लिये जुलाई से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है। किले के भीतर खाने – पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए अपने साथ खाना -पीना लेकर जाएँ। किले की सफाई को लेकर यहां का प्राधिकरण सख्त हैं।  किले के परिसर में गन्दगी फैलाने पर जुर्माने का प्रावधान है।  इसके अलावा आप जूता भी साथ ले जाएँ, क्योंकि क्षेत्र काफी बड़ा है।

 

 

 

मित्रों यह Shaniwar Wada Story in Hindi आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Shaniwar Wada Story in Hindi इस तरह की और भी स्टोरी के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और दूसरी स्टोरी नीचे पढ़े।

 

 

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