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Shekh Chilli kahaniya. शेख चिल्ली की ५ बेहतरीन कहानियां

shekh chilli kahaniya
Written by Abhishek Pandey

Shekh chilli Story in Hindi शेख चिल्ली की हिंदी कहानियां

 

 

 

shekh chilli kahaniya इस पोस्ट में हम आपको  5 कहानियां दे रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि सभी Shekh Chilli Kahaniya आपको जरुर पसंद आएँगी. चलिए पढ़ते हैं shekh chilli kahaniya.

 

 

 

1- दूसरी नौकरी

 

2- शेख चिल्ली की चिट्ठी

 

3- ऊपर वाला जाने

 

4- गधा गधा ही रह गया

 

5- लकडहारा शेख चिल्ली

 

 

 

१- पहले मालिक ने शेखचिल्ली को ठीक काम न करने के कारण निकाल ही दिया तो shaikh chilli एक सेठ के यहाँ पहुंचा और हाथ जोड़कर सेठजी से बोला-हुजूर मैं बहुत गरीब आदमी हूँ आप मुझे खिदमत के लिये नौकरी पर रख लीजिये.

 

 

 

सेठजी ने कहा-ठीक है, मगर तुमको मुझे एक इकरार नामा लिखकर देना होगा. अगर तुम उसके अनुसार काम न करोगे या नौकरी छोड़ोगे तो तुम्हारे नाक-कान का लिये जाएंगे. यदि हम तुमहें नौकरी से अलग करने को कहेंगे तो तुम हमारे नाक-कान काट देना.

 

 

 

सब लिखकर एक इकरार नामा तैयार किया गया तो दोनों उस पर अपने-अपने हस्ताक्षर किये. अगले दिन सुबह उठते ही शेखचिल्ली ने सोचा कि रोज सर और दाढी का काम बड़ा बे मौक़ा है इसलिए उनकी सफाई ही करवा देनी चाहिए.

 

 

 

 

ऐसा सोचकर उसने पानी में चूना पीसकर डाल दिया. उस पानी में जब सेठ जी ने दाढी को और उनकी स्त्री ने बालों को धोया तो सब गिर गए. सेठ जी ने खफा होकर कहा-यह क्या?

 

 

 

shaikh chilli बोला….इकरार नामें के खिलाफ तो मैंने कुछ नहीं किया. सेठजी की किताबों का बैग भी शेखचिल्ली रोज दफ्तर ले जाया करता था. एक दिन शेखचिल्ली ने वैसा ही दूसरा बैग बनाकर उसमें ईटें भर दीं और दूसरे दिन ले जाकर दफ्तर में रख दिया. जब सेठ जी ने बैग खोला तो हक्के-बक्के रह गए और सबको हंसता देखकर बड़े शर्मिन्दा हुए …….अब सेठ जी समझ गए कि नौकर कुछ उस्ताद मिला है.

 

 

 

 

शेखचिल्ली की अगली शर्त थी प्रतिदिन घोड़े को चराकर लाने की शर्त के अनुसार शेखचिल्ली घोड़े को लेकर चराने गए तो घोड़े को छोड़कर और चादर तानकर सो रहे. रात होने पर घोड़े लेकर वापिस आए तो रास्ते में सौदागर बोला-क्यों भाई घोड़ा बेचोगे?

 

 

 

शेखचिल्ली ने उत्तर दिया- हाँ साहब बेचेंगे. मगर 50 रू लेंगे…. सौदागर ने कहा ..नहीं, यह तो बहुत ज्यादा हैं…. तब शेखचिल्ली बोले 40 ही दे देना पर घोड़े की थोड़ी पूँछ काट लेने दो.

 

 

 

 

 

शेखचिल्ली सौदागर से रूपया और थोड़ा सा पूँछ का टुकडा लेकर चल दिया और जाते ही चिल्लाने लगा- सेठ जी सेठजी घोड़े को चूहे अपने बिल में घसीट कर ले गए….. सेठ जी आए तो उन्हें पूँछ दिखाकर कहने लगा- देखिये घोड़े को खींचने पर उसकी पूँछ टूट कर रह गई. सेठ जी उसे नौकरी से अलग होने को कहते तो नाक-कान कटवाने पड़ते थे अत चुप होकर रह गए..

 

 

 

 

 

शर्त में यह भी लिखा था कि शेखचिल्ली घर में जलाने को लकड़ी भी लाया करेगा. जब shaikh chilliलकड़ी लेकर आया तो उसने आते ही घर में रख कर आग लगा दी. सेठजी उस समय मन्दिर गये हुए थे.

 

 

 

 

आने पर उन्होंने शेखचिल्ली से कहा- तुमने हमारे घर में आग क्यों लगाई? अब हम तुमको नौकर नहीं रखेंगे… शेखचिल्ली ने इकरार नामे की बात कह दी. सेठजी ने तंग आकर अपनी पत्नी से कहा- अब तो इससे नाक-कान बचाना ही कठिन है. क्या किया जाए.

 

 

 

 

पत्नी ने कहा मैं आपके साथ पीहर चली जाती हूँ यह आप ही पीछे से भाग जाएगा. शेखचिल्ली ने यह सब बात सुन ली और रात को ही सेठजी के ले जाने वाले बक्से में जा बैठा.

 

 

 

 

सुबह होने से पहले ही सेठजी और उसकी पत्नी बक्सा लेकर चल दिए…. जब कुछ दूर चले गए तो सेठजी बोले कमबख्त से पीछा तो छूता अब वह नहीं आ सकेगा.

 

 

 

 

ऐसे कहते हुए सेठजी व उनकी पत्नी चले जाते थे तो बक्से में बैठे शेखचिल्ली को पेशाब आ गया तो उसने संदूक में ही कर दिया. जब पेशाब बहकर सेठजी के मुंह पर आया तो सेठजी ने समझा की हलुवा बनाकर हमने संदूक में रखा था उसका घी बह रहा है.

 

 

 

 

जब सेठजी ने संदूक उतार कर जमीन पर रखा तो झट संदूक में से शेखचिल्ली निकल आया और बोला-हुजूर के क़दमों को तब तक नहीं छोड़ सकता जब तक नाक-कान न काट लूँ.

 

 

 

 

सेठजी ने कहा- क्यों? यह लो संदूक इसे सिर पर रख के ले चलो. परन्तु शेखचिल्ली ने इनकार कर दिया….. लाचार सेठजी अपने ही सिर पर संदूक रखकर चले.

 

 

 

 

जब ससुराल एक मील रह गई तो उन्होंने शेखचिल्ली से कहा-जाओ ससुराल कह दो सेठ जी आए है वह फलां जगह पर बैठे हैं …उन्हें ले आओ.

 

 

 

 

शेखचिल्ली ने ससुराल जाकर कहा-सेठ जी बीमारी की हालत में हैं कठिनता से आए हैं… उन्हें लिवा लाएं… रात को जब खाने का वक्त आया तो सेठ जी के आगे दाल रखी और शेखचिल्ली को अच्छे – अच्छे पकवान खाने को मिले.

 

 

 

 

रात को सेठजी को पाखाना लगा तो शेख जी बोले बाहर कहाँ जाएंगे यहीं इसी हंडिया में कर दीजिये…. सेठ जी ने वैसा ही किया. सुबह होने पर बोले-जाओ हंडिया फेंक आओ… परन्तु शेखचिल्ली ने मना कर दिया… लाचार सेठ जी स्वयं हंडिया कपडे में लपेट कर फेंकने चले…. चौखट पर ठोकर लगी तो हंडिया छूट कर नीचे गिर गई… सबके बदन पर पाखाने के छींटे पड़े और सभी थू-थू करते भागे…

 

 

Funny Story in Hindi शेख चिल्ली की मजेदार कहानी

 

 

 

 

२- एक बार shekh chilli के भाई बीमार हो गए . इस बात की खबर जब sheikh chilli को पड़ी तो उन्होंने भाई की खैरियत पूछने के लिए चिट्ठी लिखने की सोची. पहले के समय में डाक व्यवस्था नहीं थी. उस समय चिट्ठियाँ मुसाफिरों अर्थात लोगों के हाथ ही भिजवाई जाती थी.

 

 

 

 

shekh chili ने नाई से चिठ्ठी पहुँचाने के लिए कहा, लेकिन नाई ने बहाना बना दिया क्योंकि मियाँshekh chilli पैसे देने में बड़े ही कंजूस थे. दुसरे मुसाफिरों ने फसल पकी होने के कारण जाने से मना कर दिया. अब shekh chilli का दिमाग काम नहीं कर रहा था तो उन्होंने सोचा कि वे खुद ही चिट्ठी देकर आ जाते हैं, क्यों किसी की सिफारिस करना.

 

 

 

अगले ही दिन shekh chilli चिट्ठी देने के लिए रवाना हो गए और शाम तक घर पहुँच गए. उन्होंने घर का दरवाजा खटखटाया तो उनका बीमार भाई बाहर आया. shaikh chilli ने उसे चिट्ठी पकड़ाई और तुरंत ही वहाँ से निकल लिए.

 

 

 

 

यह देखकर उनका भाई उनके पीछे दौड़ा और उन्हें रोकते हुए बोला ” भाई इतनी दूर से आया है तो घर में , मुझसे गले किल. नाराज है क्या मुझसे .” यह कहकर उनका भाई जैसे ही गले मिलने के लिए आगे बढ़ा shekh chilli ने उसे रोकते हुए कहा ” मैं आपसे बिलकुल भी नाराज नहीं हु. वह तो चिट्ठी पहुंचाने के लिए कोई मुसाफिर नहीं मिल रहा था सो मैं ही चला आया.”

 

 

 

 

ठीक है, अब जब आ ही गए हो तो दो चार दिन रुक जाओ..भाई ने समझाते हुए कहा

 

 

 

यह सुनते ही sheikh chikki का पारा चढ़ गया . उन्होंने नाराज होते हुए कहा ” भाई साहब आप अजीब इंसान हैं. आपको बात समझ ही नहीं आ रही है.

 

 

 

मैं यहाँ मुसाफिर की जगह पर आया हूँ . मुझे आपसे मिलने आना होता तो खुद ही आ जाता. मुसाफिर के बदले थोड़े ही आता.” उनका भाई माथा पिटता रह गया.

 

 

shekh chilli kahaniya

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Shekh chilli kahani शेख चिल्ली कहानिया

 

 

 

३- shekh chilli अपनी मुर्खता के लिए प्रसिद्ध थे. एक बार की बात है. shaikh chilli एक बार अँधेरी काली रात में कहीं से आ रहे थे. तभी उनके बगल से ३ चोर गुजरे .

 

 

 

 

उन्हें देखकर shekh chilli ने उनसे पूछा कि आप लोग कहा जा रहे हो. चोरों ने सोचा इतनी रात को कोई शरीफ आदमी तो घूमेगा नहीं , हो ना हो यह भी हमारी तरह चोर ही हों.

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि हम चोरी करने जा रहे हैं. यह सुनकर shekh chilli ने सोचा क्यों ना मैं भी चोरी करने चलूँ. हो सकता है कुछ नया सीखने को मिले.

 

 

 

 

जब shekh chilli उन चोरों से कहा कि वे भी साथ चलना चाहते हैं , तो चोरों ने ना कह दिया , लेकिन बार – बार मिन्नतें करने के बाद वे shaikh chilli को साथ ले लिए.

 

 

 

 

लेकिन चोरों ने उन्हें शख्त हिदायत दी कि वे हमेशा छुपे रहेंगे और जैसा हम कहेंगे वैसा ही करेंगे. चोरों ने एक अमीर घर को चुना और अन्दर घुसते ही पैसे और गहनों की खोज में लग गए .

 

 

 

 

shekh chilli की यह पहली चोरी थी, अतः वे बड़े ही उत्साहित थे. उन्होंने सोचा क्यों ना वे भी गहनों और पैसों को खोजे और दुसरे चोरों की मदद करें.

 

shekh chilli बड़े उत्साह से गहनों और पैसों की खोज में लग गए. तभी उन्हें खीर की खुशबु आयी . वे धडाधड पहुचे रसोई घर में. अब उनके दिमाग से चोरी की बात जाती रही. उन्हें सिर्फ और सिर्फ खीर ही नजर आ रही थी.

 

 

 

shekh chilli दबे पाँव रसोई घर जा पहुंचे. उन्होंने देखा कि बुढ़िया खीर पकाते पकाते वहीँ सो गयी थी. खीर देख shaikh chilli के मुंह में पानी आ रहा था. उन्होंने फ़टाफ़ट प्लेट निकाली और जैसे ही खीर खाने गए कि उनकी नजर फिर से बुढ़िया पर गयी.

 

 

 

कुर्सी पर सो रही बुढ़िया का हाथ सरक कर ऐसा हो गया था जैसे वह कुछ मांग रही हो. यह देखकर shaikh chilli ने सोचा, लगता है बुढ़िया भूखी है और वह खीर मांग रही है.

 

 

 

बस फिर क्या था shekh chilli ने उसके हाथ पर गरम खीर रख दी. खीर रखते ही बुढ़िया जाग गयी और शोर मचाने लगी . उसका शोर सुनकर उसके घर लोग और अगल बगल के लोग भी जुट गए. सभी चोर भाग तो नहीं सके, अन्दर ही छुप गए. shekh chilli ऊपर बने कपाट पर जाकर छुप गए.

 

 

 

लोगों ने चोरो को ढूँढना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में एक चोर पकड़ा गया. लोगों ने उसकी जमकर कुटाई कर दी.

 

 

 

उसके बाद उन्होंने पूछा “क्यों आया यहाँ पर ‘

 

 

 

उसने बोला ” ऊपर वाला जाने ”

 

 

 

लोगों ने पूछा “क्या क्या चुराया ”

 

 

उसने बोला ” ऊपर वाला जाने ”

 

 

लोगों ने सोचा भले ही चोर है , लेकिन बन्दा अच्छा है तभी तो हर बात में अल्लाह का नाम ले रहा है. तभी धडाम की आवाज आई और shekh chilli चीखते हुए बोला. सब ऊपर वाला ही क्यों जाने .

 

 

वह जो आलमारी के पीछे छुपा उसे भी सब पता है. जो बेड के नीचे छुपा है वह भी सब जानता है. लोगों ने सभी चोरों को पकड़ लिया और जमकर धुनाई कर दी और मौके का फायदा उठाते हुए shekh chilli वहाँ से सरक लिए.

 

 

 शेख चिल्ली की मस्त कहानी

 

 

 

४- एक जंगल में एक शेर रहता था. गीदड उसका सेवक था. जोडी अच्छी थी. शेरों के समाज में तो उस शेर की कोई इज्जत नहीं थी, क्योंकि वह जवानी में सभी दूसरे शेरों से युद्ध हार चुका था, इसलिए वह अलग-थलग रहता था.

 

 

 

उसे गीदड जैसे चमचे की सख्त जरुरत थी जो चौबीस घंटे उसकी चमचागिरी करता रहे. गीदड को बस खाने का जुगाड चाहिए था. पेट भर जाने पर गीदड उस शेर की वीरता के ऐसे गुण गाता कि शेर का सीना फूलकर दुगना चौडा हो जाता.

 

 

 

एक दिन शेर ने एक बिगडैल जंगली सांड का शिकार करने का साहस कर डाला. सांड बहुत शक्तिशाली था. उसने लात मारकर शेर को दूर फेंक दिया, जब वह उठने को हुआ तो सांड ने फां-फां करते हुए शेर को सीगों से एक पेड के साथ रगड दिया.

 

 

 

किसी तरह शेर जान बचाकर भागा. शेर सींगो की मार से काफी जख्मी हो गया था. कई दिन बीते, परन्तु शेर के जख्म टीक होने का नाम नहीं ले रहे थे.

 

 

 

ऐसी हालत में वह शिकार नहीं कर सकता था. स्वयं शिकार करना गीदड के बस का नहीं था. दोनों के भूखों मरने की नौबत आ गई. शेर को यह भी भय था कि खाने का जुगाड समाप्त होने के कारण गीदड उसका साथ न छोड जाए.

 

 

 

शेर ने एक दिन उसे सुझाया “देख, जख्मों के कारण मैं दौड नहीं सकता. शिकार कैसे करुं? तु जाकर किसी बेवकूफ-से जानवर को बातों में फंसाकर यहां ला. मैं उस झाडी में छिपा रहूंगा और मौका मिलते ही उसे मार डालूँगा.”

 

 

 

गीदड को भी शेर की बात जंच गई. वह किसी मूर्ख जानवर की तलाश में घूमता-घूमता एक कस्बे के बाहर नदी-घाट पर पहुंचा. वहां उसे एक मरियल-सा गधा घास पर मुंह मारता नजर आया, वह शक्ल से ही बेवकूफ लग रहा था. गीदड गधे के निकट जाकर बोला “पांय लागूं चाचा. बहुत कमजोर हो अए हो, क्या बात हैं?”

 

 

 

गधे ने अपना दुखडा रोया “क्या बताऊं भाई, जिस धोबी का मैं गधा हूं, वह बहुत क्रूर हैं. दिन भर ढुलाई करवाता हैं और चारा कुछ देता नहीं.”

 

 

 

 

गीदड ने उसे न्यौता दिया “चाचा, मेरे साथ जंगल चलो न, वहां बहुत हरी-हरी घास हैं. खूब चरना तुम्हारी सेहत बन जाएगी.”

 

 

 

गधे ने कान फडफडाए “राम राम. मैं जंगल में कैसे रहूंगा? जंगली जानवर मुझे खा जाएंगे.”

 

 

 

“चाचा, तुम्हें शायद पता नहीं कि जंगल में एक बगुला भगतजी का सत्संग हुआ था. उसके बाद सारे जानवर शाकाहारी बन गए हैं. अब कोई किसी को नहीं खाता.” गीदड बोला और कान के पास मुंह ले जाकर दाना फेंका “चाचू, पास के कस्बे से बेचारी गधी भी अपने धोबी मालिक के अत्याचारों से तंग आकर जंगल में आ गई थी. वहां हरी-हरी घास खाकर वह खूब लहरा गई हैं तुम उसके साथ घर बसा लेना.”

 

 

 

 

गधे के दिमाग पर हरी-हरी घास और घर बसाने के सुनहरे सपने छाने लगे. वह गीदड के साथ जंगल की ओर चल दिया. जंगल में गीदड गधे को उसी झाडी के पास ले गया, जिसमें शेर छिपा बैठा था.

 

 

 

 

इससे पहले कि शेर पंजा मारता, गधे को झाडी में शेर की नीली बत्तियों की तरह चमकती आंखे नजर आ गईं. वह डरकर उछला गधा भागा और भागता ही गया. शेर बुझे स्वर में गीदड से बोला “भई, इस बार मैं तैयार नहीं था. तुम उसे दोबारा लाओ इस बार गलती नहीं होगी.”

 

 

 

 

गीदड दोबारा उस गधे की तलाश में कस्बे में पहुंचा. उसे देखते ही बोला “चाचा, तुमने तो मेरी नाक कटवा दी. तुम अपनी दुल्हन से डरकर भाग गए?”

 

 

 

 

“उस झाडी में मुझे दो चमकती आंखे दिखाई दी थी, जैसे शेर की होती हैं. मैं भागता न तो क्या करता?” गधे ने शिकायत की.

 

 

 

 

गीदड झूठमूठ माथा पीटकर बोला “चाचा ओ चाचा! तुम भी निरे मूर्ख हो. उस झाडी में तुम्हारी दुल्हन थी. जाने कितने जन्मों से वह तुम्हारी राह देख रही थी.

 

 

 

 

 

तुम्हें देखकर उसकी आंखे चमक उठी तो तुमने उसे शेर समझ लिया?” गधा बहुत लज्जित हुआ, गीदड की चाल-भरी बातें ही ऐसी थी. गधा फिर उसके साथ चल पडा.

 

 

 

 

जंगल में झाडी के पास पहुंचते ही शेर ने नुकीले पंजो से उसे मार गिराया. इस प्रकार शेर व गीदड का भोजन जुटा. इससे यही सीख मिलाती है कि दूसरों की चिकनी-चुपडी बातों में आने की मूर्खता कभी नहीं करनी चाहिए.

 

 

 

शेख चिल्ली की कामेडी Shekh Chilli Kahaniya

 

 

 

५- एक बार shekh chilli जंगल में लकडियाँ काटने गये. उन्होंने एक बड़ा पेड़ देखा और उस पेड़ की लकडियाँ काटने के लिए पेड़ पर चढ़ गए .आप तो जानते ही हैं shaikh chilli जी की सोच अकल्पनीय होती है. shekh chilli लकडियाँ काटनी शुरू कीं और साथ ही उनके ख्याली पुलाव भी पकने लगे.

 

 

 

 

shaikh chilli ने सोचा कि इस जंगल में बहुत ढेर सारी लकड़ियाँ हैं . मैं यहाँ से खूब सारी लकडियाँ काटूँगा और उसको बाज़ार में बेचूंगा और इससे मुझे बहुत अधिक कमाई होगी.

 

 

 

 

इस तरह से मैं बहुत ही जल्द अमीर बन जाऊँगा और उसके बाद लकड़ी को काटने के लिए ढेर सारे नौकर रख लूंगा. उसके एक फर्नीचर की बहुत अच्छी दूकान खोलूंगा और यहाँ भी ढेर सारे नौकर रख लूंगा. कुछ ही दिनों मेरे पार ढेर सारे नौकर चाकर, बड़ा महल और बड़ी दूकान हो जायेगी. मैं नगर का सबसे अमीर शख्स बन जाउंगा.

 

 

 

 

यह देखकर नगर का बादशाह खुद ही अपनी राजकुमारी का निकाह करने के लिए मेरे पास आयेगा. शादी के बाद हम घुमने जायेंगे और एक सुन्दर से खुबसूरत बगीचे में राजकुमारी अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाएंगी…..ख्वाब में डूबे ज़नाब shekh chilli पेड़ की दाल को ही राजकुमारी का समझ लिया और ख्वाब में बहकते हुए राजकुमारी का हाथ पकड़ने के लिए आगे बढे और धडाम से नीचे गिर पड़े .

 

 

 

 

उंचाई से गिरने कारण उनके कमर में चोट लग गयी और उसके साथ ही shekh chilli के ख्वाब भी चकनाचूर हो गए

 

 

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१- Shaikh Chilli . शेख चिल्ली की ५ मजेदार हिंदी कहानी . फनी स्टोरी

2- hindi kahani

 

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Abhishek Pandey

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