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हास्य कहानिया

shekh chilli ki kahani

dushyant shakuntala
dushyant shakuntala
Written by Hindibeststory

shekh chilli ki kahani कौन थे शेख चिल्ली ? आज तक हमने शेख चिल्ली पर तमाम कहानिया पढ़ी, जिन्हें पढ़ कर हमारे चेहरे पर मुस्कराहट आई. लेकिन उस मुस्कराहट को देने वाले शख्श शेख चिल्ली आखिर कौन थे, कहाँ के रहने वाले थे, आईये आज उनके बारे में सबकुछ जानते हैं. शीख चिल्ली का जन्म बलूचिस्तान के एक खानाबदोश कबीले में हुआ था. यह ऐसा कबीला होता है जो एक जगह से दूसरी जगह भ्रमण करता है. निरंतर घुमक्कड़ी का जीवन जीने के कारण शेखचिल्ली पढ़ न सके. हाँ, आये दिन की परेशानियों और अभावों ने इनको आवश्यकता से अधिक हवाई किलेबाजी अता फरमा दी. बचपन ही से शेखचिल्ली चमत्कारों की तलाश में पीर-फकीरों के दीवाने रहे. घुमक्कड़ी का जीवन इन्हें रास नहीं आया. रात-दिन ऐशो-आराम के साधन पा लेने के सपने और तुनकमिजाज अधिकारियों और सामंतों की तरह अपने को पेश करने के हवाई पुल बांधना इनकी नियति बनती गई.

वह जमाना ही अंधविश्वासों, झाड-फूंक और गंडे-तावीजों का था. फिर जिस कबिलियाई परवेश में शेखचिल्ली गोदी से उतर ककर धरती पर चलने लायक बने , उसमें तो अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी थी कि कोई भी इंसान उसमें जकड सकता है. अभावों में पलता भावुक बाल शेखचिल्ली इन्हीं अंधविश्वासों की परिणति में काल्पनिक चमत्कारों के रंग भरना सीख गया. एक किवदंती के अनुसार शेखचिल्ली की इन बे-सिर-पैर की हरकतों से तंग आकर एक रात उसके कबीले वाले किसी ‘सूखे करेजे’ (सूखी झाड़ियों का झुण्ड) के पास इन्हें सोता छोड़कर आगे निकल गए. शेखचिल्ली के जीवन का यह एक नया मोड़ था. अब वह नितांत अकेला रह गया था. अकेलेपन की इस भावना ने उसकी कल्पना में पंख लगा दिए. जो उससे दूर था, अप्राप्य था, उसके पास होने के सुखद सपने और भटकना ही उसका जीवन बन गया. मनचाहा पा लेने की इच्छा से उसने फकीरों, ओझाओं और टोने-टोटके करने वाले नाजूमियों के दामन पकड़ने चाहे. न जाने क्यों, ऐसी सूरतों में अक्सर होता है, उसमें कुंठा के या कमतरी के भाव नहीं हुए. हो जाते तो आज न शेखचिल्ली होता, न उसकी कहानियां.

शेखचिल्ली क्वेटा की बंजर धरती से कुरुक्षेत्र के हरियल इलाके में कैसे और कब आये, कोई नहीं जानता. केवल यह सोचा ही जा सकता है की वह उन दिनों सीमा पार से आने वाले किसी जन-प्रवाह में बहकर कुरुक्षेत्र आ पहुंचे. कुरुक्षेत्र उन दिनों हिन्दू साधू-संतों के साथ-साथ मुस्लिम फकीरों और पीरों की शरण-स्थली बन चूका था. शेखचिल्ली भी चटकारों की चाह में वहाँ वहाँ के एक फ़क़ीर कके मुरीद बन गए . उन दिनों झज्जर एक छोटी-सी रियासत थी. पंजाब के अधिकाँश भाग से मराठों का शासन समाप्त हो चुका था और मुस्लिम शासकों की हर जगह तूती बोलनी शुरू हो गयी थी. शेखचिल्ली को कुरुक्षेत्र में नयी जिंदगी तो मिल गयी, मगर उसकी कल्पनाशीलता कम होने की उपेक्षा और अधिक निखरती गयी. उन्हीं दिनों नारनौल के रईस हाफिज नूरानी से उनकी मुलाक़ात हुई. हाफिज नूरानी शेखचिल्ली की न जाने किस अदा पर फ़िदा हुए की उन्हें साथ ली आये . झज्जर के नवाबी घराने से हाफिज नूरानी की ख़ास जान – पहचान थी. उन्होंने शेखचिल्ली को नवाब के दरबार में नौकरी दिलवा दी. शादी भी करा दी कि शेखचिल्ली के भटकावों में थोडा ठहराव आ जाए.

झज्जर एक छोटी-सी रियासत थी. जितनी आमदनी थी, लगभग उतने ही खर्चे थे. इसलिये शेखचिल्ली को उस नौकरी से इतना तो कभी नहीं मिल सका की नवाब के दुसरे मुलाजिमों के तरह मजे से खा-पी सकें. हाँ, नवाब का मुलाजिम होने के कारण लाख खामियां होने के बावजूद भी, रियासत में उनकी इज्जत थी. कहा जाता है की सन १८०० के आसपास शेखचिल्ली झज्जर रियासत छोड़कर फिर कुरुक्षेत्र वापस चले गए. फ़क़ीर बन गए .उस समय उनकी उम्र करीब ८० वर्ष हो चुकी थी. उनके दोस्त हाफिज नुरानी का इंतकाल हो चुका था और शेखचिल्ली की बेगम भी इस दुनिया से विदा ले चुकी थी. रियासत पर भी दुर्भाग्य के बादल उड़ने शुरू हो गए थे और अंग्रेजों ने अवध को हड़पने की तैयारियों के साथ-साथ पंजाब की और हाथ बढाने शुरू कर दिए थे. आजादी की पहली लड़ाई से लगभग पचास वर्ष पूर्व ही कुरुक्षेत्र में शेखचिल्ली की मृत्यु हो गयी. उस समय तक उनको मानने वालों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी थी.

कुरुक्षेत्र में मौजूद शेखचिल्ली का मकबरा आज भी इस बात को मानने पर मजबूर करता है की उस शेखचिल्ली की कितनी शाख रही होगी. शेखचिल्ली को अक्सर हवाई किलेवाजी में दक्ष एक कामचोर मूर्ख की तरह चित्रित किया जाता है. हवाई किलेबाज वह बेशक थे, किन्तु अगर गंभीरता से मनन किया जाए तो शेखचिल्ली की हवाई किलेबाजी में अनेक सामाजिक असमानताओं और अहं के बंधनों को तोड़ डालने की तड़प सहज ही महसूस की जा सकती है शेखचिल्ली का व्यक्तित्व समाज के शाशन और तिरस्कार का प्रतिबिंब है. मित्रों आपको यह कहानी , जानकारी shekh chilli ki kahani कैसी लगी जरुर जाने और shekh chilli ki kahani की तरह की और भी कहानी के लिए इस ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब करें और दूसरी कहानी के लिए निचे की लिंक पर क्लिक करें.

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2-स्टोरी

3-घतोत्कक्ष एक वीर योद्धा

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