Bhakti Story

शिर्डी साईं बाबा

शिर्डी साईं बाबा
शिर्डी साईं बाबा

शिर्डी साईं बाबा एक भारतीय धार्मिक गुरु थे. जिन्हें sai baba के भक्त संत, फ़क़ीर, सतगुरु भी कहते हैं. shirdi sai baba को हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही मानते है. sai baba किसी एक समाज में प्रतिष्ठित नहीं हैं. इन्हें हर कोई मानता और पूजता है. shirdi sai baba एक सच्चे सद्गुरु थे. उनके sai mandir से कोई भी भक्त खाली हाथ वापस नहीं जाता है. उसकी प्रत्येक मुराद को sai baba अवश्य ही पूरी करते है.

sai baba लोगों को प्यार, दया , मदद, समाज कल्याण , संतोष, आत्मशान्ति, भगवद भक्ति का पाठ पढ़ाते थे. वे लोगो को धार्मिक भेदभाव करने से मना करते थे. साईं बाबा कहते थे ‘ सबका मालिक एक ‘ अर्थात सभी धर्मों के लोगों का भगवान एक ही है.बस पूजा विधि अलग अलग है. इसके साथ ही वे ‘ अल्लाह मालिक ‘ बोल का उपयोग करते थे.

sai baba जन्म स्थान किसी को आज तक पता नहीं है. हालाकि कुछ लोगों का मानना है की उनका जन्म २७ सितम्बर १८३० में महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी नामकगांव में हुआ था. जहां पर एक sai mandir बना हुआ है, जिसमे बहुत ही आकर्षक मूर्ति रखी हुई है. यह बाबा का निवास स्थान है. यहाँ पर बर्तन, घट्टी , देवी देवताओं की मूर्ति तथा अन्य पुराने सामान और पुराने मकान के अवशेषों को भी संभालकर रखा गया है. इस मकान को साईं बाबा के वंशज रघुनाथ भुसारी से ३००० रुपये में ९० रुपये के स्टैम्प पर श्री साईं स्मारक ट्रस्ट ने खरीद लिया था.

sai baba के पिता का नाम परशुराम भुसारी और माता का नाम अनुसुइया था, जिन्हें गोविन्द भाऊ और देवकी अम्मा भी कहा जाता है. अभी तक shirdi sai पर ३ किताबे लिखी जा चुकी हैं. जिनमें 3 sai baba books श्री साईं सच्चरित्र यह मराठी में लिखी हुई है और इसके लेखक श्री गोविन्द राव रघुनाथ दाभोलकर हैं. दूसरी sai baba book अ यूनिक सेंट साईंबाबा ऑफ़ शिर्डी है. इसके लेखक श्री विश्वास बालासाहेब खेर हैं. यह किताब साईं बाबा के मित्र स्वामी साईं शरण आनंद से प्रेरणा लेकर लिखी गयी है. तीसरी sai baba book कन्नड़ में लिखी गयी है. इस किताब का नाम अज्ञात है. इसे श्री बी वी सत्यनारायण राव उर्फ़ सत्य विठ्ठला ले लिखी है. इस किताब का अंग्रेजी अनुवाद प्रो-मेलुकोटे के. श्रीधर ने किया है और इसका सरल हिंदी अनुवाद श्री शशिकांत शांताराम गडकरी ने किया है. इस किताब शिर्डी साईं बाबा हिंदी बुक का नाम सद्गुरु साईं दर्शन (एक वैरागी की स्मरण गाथा ) है.

sai baba photos

शिर्डी साईं बाबा
शिर्डी साईं बाबा

sai baba books श्री शशिकांत शांताराम गडकरी की किताब ‘सद्‍गुरु सांई दर्शन अनुसार शिर्डी साईं बाबा ब्राह्मण परिवार के थे। उनका परिवार वैष्णव ब्राह्मण यजुर्वेदी शाखा और कोशिक गोत्र का था . उनके पिता के पांच पुत्र थे. पहला पुत्र रघुपत भुसारी, दूसरा दादा भूसारी, तीसरा हरिभाऊ भुसारी, चौथा अम्बादास भुसारी और पांचवें बलवंत भुसारी थे। शिर्डी साईं बाबा तीसरे नंबर के पुत्र हरिभाऊ थे. सांई बाबा के इस जन्म स्थान पाथरी गांव के पास ही भगवान पांडुरंग का मंदिर है. इसी मंदिर के बाईं ओर देवी भगवती का मंदिर है जिसे लोग सप्तश्रृंगी देवी का रूप मानते हैं.इसी मंदिर के पास चौधरी गली में भगवान दत्तात्रेय और सिद्ध स्वामी नरसिंह सरस्वती का भी मंदिर है, जहां पवित्र पादुका का पूजन होता है. लगभग सभी मराठी भाषियों में नरसिंह सरस्वती का नाम प्रसिद्ध है.

sai baba book के अनुसार आज भी शिर्डी साईं बाबा के परिवार के लोग हैदराबाद, निजामाबाद और औरंगाबाद में रहते हैं. कहा जाता है कि sai baba की पढाई पाथरी के एक गुरुकुल में हुई थी. उनके घर के पास एक मुस्लिम परिवार रहता था. उनका नाम चाँद मिया और उनकी पत्नी का नाम चाँद बी. था. उनकी कोई संतान नहीं थी. साईं बाबा उनके घर काफी समय व्यतीत करते थे.चाँद बी. उन्हें पुत्र के समान ही मानती थी. साईं के पिता की मृत्यु के बाद उनका परिवार बिखर गया. उन्हें वली नमक एक सूफी संत लेकर चले गए. बाकी के लोग हैदराबाद, निजामाबाद चले गए.

एक दिन अचानक साईं बाबा पाथरी आ गए. उन्होंने देखा कि यहाँ तो कोई नहीं है. अंत में वे अपने पडोसी चाँद बी. से मिले. वे उन्हें एक नजदीकी आश्रम सेलु के वैन्कुशा के आश्रम ले गयीं. उन्होंने साईं बाबा को अपना शिष्य बना लिया और मृत्यु के पूर्व शिर्डी साईं बाबा को अपनी सारी शक्तियां दे दीं.

sai baba १६ साल की उम्र महाराष्ट्र के अहमदनगर के शिर्डी गांव आये थे. वे एक सन्यासी के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे थे और हमेशा ही नीम के पेड़ के नीचे भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे. गांववालों ने देखा की ठंडी और गर्मी का उनपर कोई फर्क नहीं पड़ता था. वे हमेशा ही भगवान की भक्ति में लीन रहते थे. किसी से मिलते भी नहीं थे. उन्हें किसी चीज से डर नहीं लगता था, जैसे वे सभी तरह की मोह माया त्याग चुके हों. एक दिव्य आभा उनके चहरे पर चमकती थी.

एक दिन वैन्कुशा और शिर्डी साईं बाबा जंगल से लौट रहे थे तो कुछ लोग बाबा पर पत्थर फेकने लगे. शिर्डी साईं बाबा को बचाने के लिये वैन्कुशा आगे आ गए, जिससे उनके सिर में चोट लग गयी. इस पर shirdi sai baba ने तुरंत ही कपडे से खून साफ किया. वैकुंषा ने वही कपड़ा साईं बाबा के सिर पर तीन लपेटे लेकर बाँध दिया. यह तीन लपेटे संसार से मुक्त होने, ज्ञान और सुरक्षा के हैं. जिस ईंट से वैकुंशा को चोट लगी थी उसे साईं बाबा ने अपने पास रख लिया और जीवनभर उसे अपने सिरहाने रखा. वे कहते थे, जिस दिन यह ईंट टूट गयी, समझ लेना मेरी सांस भी टूट जायेगी.

गांव के उनके कुछ अनुयायियों ने उनकी खोज शुरू की तो पता चला कि वे कई संत और फकीरों से मिले, जुलाहे का काम भी किया. १८५८ में sai baba वापस शिर्डी आ गए. इस समय उन्होंने घुटनों तक कफनी पोशाक और कपड़ों की एक टोपी पहनी हुई थी.उनकी पोशाक के अनुसार वे एक मुस्लिम फ़क़ीर लग रहे थे. वापिस आने के बाद साईं बाबा तक़रीबन ४ से ५ साल तक नीम के पेड़ के नीचे रहे और अक्सर वे शिर्डी के जंगलो में चले जाते थे और ककी दिनों तक वहीँ रहते और तपस्या करते थे. इस दौरान वे किसी से नहीं मिलते थे.

कुछ दिनों के बाद कुछ लोगों ने उन्हें रहने के लिए पुरानी मस्जिद दे दी. साईं बाबा ने उसमें पवित्र अग्नि धुनी जलाई थी. उस धुनी में अद्भुत शक्तियां थी. जिससे वे अपने भक्तों को उधि देते थे. इसी धुनी से वे अपने भक्तों का इलाज भी करते थे. १९१० के बाद उनकी ख्याति मुंबई तब के बाम्बे होते हुए बहुत दूर दूर तक फ़ैल गयी और बहुत से भक्त उनके उनके दर्शन को आने लगे.

आज sai baba temple बहुत प्रसिद्ध है. बहुत दूर दूर से shirdi sai के भक्त आते हैं. इस समय बहुत से sai baba bhajan बाजार में उपलब्ध हैं. लेकिन शिर्डी वाले साईं बाबा भजन आज भी लोगों को भक्तिमय कर देता है. sai baba shirdi जाने के लिये mumbai to shirdi shirdi train या फिर shirdi to mumbai bus से भी जा सकते हैं. sai baba mandir जाने पर वहाँ सुबह की sai baba aarti में अवश्य ही शामिल हों. sai baba aarti में शामिल होने पर बहुत पुण्य प्राप्त होता है. shirdi sai baba temple की देखभाल sai sasthan ( shri sai baba sasthan trust ) करता है. sai baba mandir आने वाले भक्तों की हर मुराद sri sai baba अवश्य ही पूरी करते हैं. मित्रों sai baba of shirdi की यह hindi kathaशिर्डी साईं बाबा आपको कैसी लगी कमेंट में बताएं और ऐसी hindi katha के लिए Hindi best story के इस ब्लॉग को सबस्क्राइब कर लें. अन्य hindi kahani के लिए इस लिंक https://www.hindibeststory.com/naga-sadhu-naga-sanyasi-hindi/पर क्लिक करें.

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