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Short moral stories for kids एकता की ताकत

short moral stories for kids
Written by Abhishek Pandey

short moral stories for kids एक समय की बात है. एक घने जंगल में एक उन्मुक्त हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था. वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था.

 

 

उसी जंगल में एक पेड़ पर एक चिडिया व चिडे का छोटा-सा सुखी संसार था. चिडिया अंडो पर बैठी नन्हें-नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती. एक दिन क्रूर हाथी गरजता, चिंघाडता पेडों को तोडता-मरोडता उसी ओर आया.

 

 

 

देखते ही देखते उसने चिडिया के घोंसले वाला पेड भी तोड डाला. घोंसला नीचे आ गिरा. अंडे टूट गए और ऊपर से हाथी का पैर उस पर पडा. चिड़िया और चिडा चीखने और चिल्लाने के सिवा कुछ नहीं कर सके. चिड़िया छाती पीट – पीटकर रोने लगी. उसे बहुत दुःख हो रहा था.

 

 

तभी वहां कठफोठवी आई. वह उस चिड़िया की अच्छी मित्र थी. कठफोडवी ने उनके रोने का कारण पूछा तो चिड़िया ने रोते हुए सारी कहानी कह सुनाई . कठफोडवी बोली “इस प्रकार गम में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा. उस हाथी को सबक सिखाने के लिए हमे कुछ करना होगा.”

 

 

चिड़िया ने निराशा दिखाई “हमें छोटे-मोटे जीव उस बलशाली हाथी से कैसे टक्कर ले सकते हैं?” इस पर कठफोठवी बोली एकता में बड़ी ताकत होती है. हम अपनी शक्तियां बढ़ाएंगे.

 

“कैसे?” चिड़िया ने पूछा.

 

“मेरा एक मित्र भंवरा हैं. हमें उससे सलाह लेना चाहिए।” कठफोडवी ने कहा और उसके बाद चिड़िया और कठफोडवी भंवरे से मिली. भंवरा गुनगुनाया “यह तो बहुत बुरा हुआ.

 

 

मेरा एक मेंढक मित्र हैं आओ, उससे सहायता मांगे.” अब तीनों उस सरोवर के किनारे पहुंचे, जहां वह मेढक रहता था. भंवरे ने सारी समस्या बताई. मेंढक भर्राये स्वर में बोला “आप लोग धैर्य से जरा यहीं मेरी प्रतीक्षा करें. मैं गहरे पानी में बैठकर सोचता हूं.”

 

 

ऐसा कहकर मेंढक जल में कूद गया. करीब आधे घंटे बाद वह पानी से बाहर आया तो उसकी आंखे चमक रही थी. वह बोला “दोस्तो! उस हत्यारे हाथी को नष्ट करने की मेरे दिमाग में एक बडी अच्छी योजना आई हैं.

 

 

उसमें सभी का योगदान होगा.” मेंढक ने जैसे ही अपनी योजना बताई,सब खुशी से उछल पडे. योजना सचमुच ही अदभुत थी. मेंढक ने दोबारा बारी-बारी सबको अपना-अपना रोल समझाया.

 

 

कुछ ही दूर वह उन्मत्त हाथी तोडफोड मचाकर व पेट भरकर कोंपलों वाली शाखाएं खाकर मस्ती में खडा झूम रहा था. पहला काम भंवरे का था. वह हाथी के कानों के पास जाकर मधुर राग गुनगुनाने लगा.

 

 

 

राग सुनकर हाथी मस्त होकर आंखें बंद करके झूमने लगा. तभी कठफोडवी ने अपना काम कर दिखाया. वह तेजी से आई और अपनी सुई जैसी नुकीली चोंच से उसने तेजी से हाथी की दोनों आंखें बींध डाली. हाथी की आंखे फूट गईं. वह तड़पता हुआ अंधा होकर इधर-उधर भागने लगा.

 

 

जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था, हाथी का क्रोध बढता जा रहा था. आंखों से नजर न आने के कारण ठोकरों और टक्करों से शरीर जख्मी होता जा रहा था. जख्म उसे और चिल्लाने पर मजबूर कर रहे थे. चिडिया कॄतज्ञ स्वर में मेढक से बोली “ भैया , मैं आजीवन तुम्हारी आभारी रहूंगी. तुमने मेरी इतनी सहायता कर दी.”

 

 

 

 

मेढक ने कहा .. अरे कोई बात नहीं..मित्र ही मित्र के काम आते हैं. उधर आंखों में जलन और ऊपर से चिल्लाते-चिंघाडते हाथी का गला सूख गया. उसे तेज प्यास लगने लगी. अब बारी मेढक की थी.

 

 

 

मेढक ने अपने बहुत से बंधु-बांधवों को इकट्ठा किया और उन्हें ले जाकर दूर बहुत बडे गड्ढे के किनारे बैठकर टर्राने के लिए कहा. सारे मेढक टर्राने लगे.

 

 

 

मेढक की टर्राहट सुनकर हाथी के कान खडे हो गए. वह यह जानता ता कि मेढक जल स्त्रोत के निकट ही वास करते हैं. वह उसी दिशा में चल पडा.

 

टर्राहट और तेज होती जा रही थी. प्यासा हाथी और तेज भागने लगा. जैसे ही हाथी गड्ढे के निकट पहुंचा, मेढकों ने पूरा जोर लगाकर टर्राना शुरु किया.

 

 

 

हाथी आगे बढ़ा और विशाल पत्थर की तरह गड्ढे में गिर पडा, जहां उसके प्राण पखेरु उडते देर न लगे इस प्रकार उस अहंकार में डूबे हाथी का अंत हुआ.

 

 

 

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