Moral Story

kisan ki sikh/ किसान की सीख moral stories

kisan ki sikh/ किसान की सीख moral stories
sadhu

kisan ki sikh/ किसान की सीख moral stories शीतलहर चल रही थी. मंगलवार का दिन था. मीलों चलकर एक किसान मंदिर पहुंचा तो देखा कि दरवाजा बंद था. किसान ने ऊँची आवाज लगाई ” अरे कोई है.पुजारी जी कहा हो ?”

पुजारी जी बाहर आये तो किसान को देखकर हैरान थे. वे बोले ” आज ठण्ड बहुत अधिक थी. मुझे तनिक भी भी उम्मीद नहीं थी कि आज कोई प्रार्थना के लिए आएगा. अतः मैंने कोई तैयारी नहीं की.केवल भगवान की धूप अगरबत्ती ही दिखाई.”

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अब तुम ही बताओ केवल एक आदमी के लिए इतना सबकुछ तैयारी करना ठीक रहेगा क्या ? क्यों ना आज हम बाकी पूजा रहने दें और घर जाकर आराम करें.

इसपर किसान बोला ” पुजारी जी ! मैं तो एक साधारण kisan हूँ. मैं रोज कबूतरों को दाना खिलाने आता हूँ . अगर एक भी कबूतर होता है तो भी मैं दाना जरुर खिलाता हूँ.”

पुजारी जी यह बात सुनकर थोड़े शर्मिंदा हुए और मन ही मन भगवान से क्षमा मांगी और तैयारी में लग गए. पूरा मंदिर साफ किया. आरती की थाली सजाई. प्रसाद तैयार किये. अन्य पूजा के सामान तैयार करने के बाद पुरे विधि-विधान से पूजा की. इस सबमें २-३ घंटे का समायी लग गया. पूजा खत्म होने के बाद पुजारी जी ने kisan कर्त्तव्य का भान कराने के लिए धन्यवाद दिया.

इसपर kisan कुछ नहीं बोला और चुपचाप वहाँ से जाने लगा. इसपर पुजारी जी बोले ” क्या हुआ, पूजा में कोई कमी रह गयी है क्या ?”

इसपर किसान बोला ” मैं कक्या बताऊँ पुजारी जी, मैं तो एक साधारण सा kisan हूँ. लेकिन जब मैं कबूतरों को दाना डालने आता हूँ और अगर एक ही कबूतर आता है तो मैं सारा दाना एक ही कबूतर को नहीं खिला देता हूँ. “

पुजारी जी को अपनी गलती का एहसास हो गया था कि सिर्फ कर्त्तव्य निभाना ही जरुरी नहीं है बल्कि परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालना भी आवश्यक है. उन्होंने सोचा कि मुझे एक आदमी के हिसाब से ही तैयारी करके पूजा शुरू कर देनी चाहिए थी, जबकि मैं तमाम लोगों के हिसाब से तैयारी करने लगा. मित्रों मेरी यह short stories with moral kisan ki sikh/ किसान की सीख moral stories कैसी लगी कमेन्ट में बताएं और भी इसी तरह की अन्य good moral stories के लिए ब्लॉग को सबस्क्राइब कर लें. अन्य motivational stories के लिए इस लिंक पर क्लिक https://www.hindibeststory.com/moral-stories/ करें.

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