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श्री राम वालपेपर

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श्री राम वालपेपर जब जब इस धरा पर पाप बढ़ता है, धर्म का नाश होता है, charo  तरफ अन्धकार छाने लगता है, तब धर्म की किरण को फिर से प्रकाशित करनी के लिए, पापियों के संहार के लिए भगवान का अवतार होता है. ऐसे ही अवतार lord ram जी के वंश के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से बताया जाएगा.

मर्यादा पुरुषोत्तम lord ram का अवतार त्रेता युग में हुआ. यह भगवान श्री हरी का सातवां  अवतार था.  lord ram महाराज दशरथ और महारानी कौशल्या के पुत्र थे. महाराज दशरथ के सभी ४ पुत्रों में sriram सबसे बड़े थे. उन्होंने मर्यादा को हमेशा ही सबसे ऊपर रखा, इसिलिये  वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये. उनके राज्य में प्रजा एकदम खुशहाल थी. सबको न्याय मिलता था. इसीलिए आज भी रामराज्य की बात होती है.

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वैवसत्व मुनि के दस पुत्र थे १-इल, २-इक्ष्वाकु, ३-कुश्नम, ४-अरिष्ट, ५-धृष्ट, ६- नरिश्यंत, ७-करुष, ८-महाबली, ९-शर्यती, १०-प्रिशध.  भगवान श्रीराम का जन्म इक्ष्वाकु कुल में हुआ था. इक्ष्वाकु के तीन पुत्र हुए विकुक्षि, निमी, दंडक. इक्ष्वाकु कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी.

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रामायण के बालकाण्ड के अनुसार ब्रह्मा जी से मरीचि हुए, मरीचि से कश्यप हुए, कश्यप से विवस्वान हुए, विवस्वान से मनु हुए, मनु के दूसरी नंबर के पुत्र इक्ष्वाकु से कुक्षि हुए, कुक्षि से विकुक्षि हुयें विकुक्षि से बाण हुए, बाण से अनरण्य हुए, अनरण्य से पृथु हुए, पृथु से त्रिशंकु हुए, त्रिशंकु से धुन्धुमार हुए, धुन्धुमार युवनाश्व हुए, युवनाश्व से से मान्धाता हुए, मान्धाता से सुसन्धि हुए, सुसन्धि के दो पुत्र हुए ध्रुवसन्धि और प्रसेनजित, ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत  हुए, भरत के पुत्र असित हुए, असित के पुत्र सागर हुए, सागर के पुत्र असमंज हुयी, असमंज के पुत्र अंशुमान हुए, अंशुमन के पुत्र दिलीप हुए, दिलीप के पुत्र भागीरथ हुए, भागीरथ से ककुत्स्थ हुय्ये ककुत्स्थ से रघु हुए, रघु से प्रवृद्ध हुए, प्रवृद्ध से शंखण हुए, शंखण से सुदर्शन हुए, सुदर्शन से अग्निवर्ण हुए, अग्निवर्ण से शीघ्रग हुए, शिघ्रग से मरू हुए, मरू से पशुश्रुक हुए, पशुश्रुक से अम्बरीष हुए, अम्बरीष से नहुष हुए, नहुष से ययाति हुए, ययाति से नाभाग हुए, नाभाग से अज हुयी, अज से दशरथ हुए, दशरथ के चार पुत्र हुए राम, लक्ष्मण , भरत और शत्रुघ्न…इस तरह ब्रह्मा जी के ३९ वीं पीढ़ी में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ.

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