Moral Story

chalak siyar moral story

chalak siyar moral story एक जंगल में एक शेर रहता था…. उम्र बढ़ जाने की वजह से उसे कही आने जाने में परेशानी हाेती थी…जिससे वह शिकार नहीं कर पाता था… छाेटे छाेटे जानवर भी उसके आगे से गुज़र जाते लेकिन वह कुछ नहीं कर पाता…

वह भूक से व्याकुल हाेने लगा… तभी उसे एक उपाय सूझा… उसने पूरे जंगल में घाेषणा करवा दी कि इतने दिनाे तक वह तप कर रहा था… इसीलिए उसने किसी जानवर काे नहीं मारा… वह भी तब जब जानवर उसके सामने से गुजर गये…. लेकिन अब उसका तप पुर्ण हाे गया है… उसके पास जादुई शक्तियां आ गयी हैं ….
साे जंगल से एक जानवर राेज उसकी गुफा में आ जाये…. अन्यथा वह सभी जानवरों काे जादुई शक्ति से मार देगा… लेकिन सिर्फ छाेटे जानवर ही आयें… बडे़ जानवरों काे ना खाने की शपथ ली हेै…..
उसके इस फरमान से जंगल में कोलाहल मच गया… एक ताे जंगल का राजा और जादुई शक्ति से उसके और बलशाली होने की खबर से जंगल में अफरा तफरी का माहौल हाे गया…
बड़े जानवर ताे इस बात से खुश हाे गये कि जंगल के राजा शेर ने उन्हें ना खाने की शपथ ली है….लेकिन छाेटे जानवराे की शामत आ गयी… इस परिस्थिति काे देख छाेटे जानवर पलायन करने लगे.
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उनके पलायन की खबर सुनते ही सारे बड़े जानवरो ने तत्काल एक सभा का आयोजन किया….. आयाेजन में एकमत से पारित किया गया बड़े जानवर स्वयं छाेटे जानवरों काे पकड़ कर राजा शेर तक पहुंचायेंगे…. नहीं तो छाेटे जानवरों के पलायन के बाद राजा शेर के क्रोध का प्रकाेप हम बड़े जानवराे काे सहना पड़ सकता है….साथ ही जान से भी हाथ धाेना पड़ सकता है.
अब इस डर से बड़े जानवर स्वयं छाेटे जानवराे काे पकड़ कर शेर तक पहुंचाने लगे…. शेर की याेजना काम कर गयी… वह मजे से बिना मेहनत किये राेज जानवराे काे मार कर खाने लगा और जानवराे के छाेटे हाेने से उसे काेई परेशानी नही हाेती थी…. वह खूब माेटा ताजा हाे गया…लेकिन कहते हैं न सबका दिन आता है….
अब एक दिन एक सियार का नम्बर आया… वह बहुत ही बुद्धिमान सियार था… जब एक बड़ा जानवर उसे शेर के पास ले जा रहा था.. ताे उस बुद्धिमान सियार ने एक बहाना बनाया…. उसने उस जानवर से कहा कि अब ताे मेरा मरना निश्चित है… और हर मरने वाले की आखिरी ख़्वाहिश पूरी की जाती है… साे आपसे निवेदन है कि मुझे थाेड़ा अपना पेट भर लेने दिजीये… उसके बाद ताे भाेजन कभी नसीब में नही रहेगा… और महाराज शेर भी जब मुझे खायेंगे… ताे बढ़िया स्वाद मिलेगा… वह जानवर मान गया…
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सियार आराम से भाेजन करने लगा और काफी देर बाद वापस आया… इधर देर हाे जाने की वजह से शेर भूक से व्याकुल हाे उठा था… उसे राेज ताजे खाने की आदत थी साे वह गुस्से में दहाड़ लगाने लगा.
जब बड़ा जानवर सियार के साथ वहां पहुंचा ताे शेर की दहाड़ से दूर जा छुपा…सियार काे गुफा के द्वार पर खड़ा देख शेर ने क्रोध से कहा.. दुष्ट सियार कहा रह गया था… आने में इतनी देर क्याें लगा दी… आज मैं तुझे ठीक वैसे ही तड़पा कर खाउंगा जैसे मैं भूक से तड़पा हूं.
तब सियार ने विनम्रता से कहा हे महाराज क्षमा करें… मैं समय से आ रहा था… भला काेई आपके आदेश की अवहेलना कर सकता है भला…. वह ताे रास्ते में पड़ने वाले कुये के पास एक नया शेर आया है.. उसने मुझे राेक लिया… उसने गुस्से में से पूछा कहा जा रहा है… ताे मेरे साथ वाले बड़े जानवर ने सारी बात बता दी… इसपर वह शेर बहाेत क्रोधित हाे गया.. और उसने बड़े जानवर काे वहीं मार डाला… आप देख सकते हाे कि मेरे साथ काेई बड़ा जानवर नही है… जब शेर ने बाहर झांककर देखा ताे बात सही थी.
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सियार ने गरम लाेहे पर फिर हथाैड़ा मारा… उसने कहा महाराज कल से काेई जानवर यहा नही आयेगा… उसने मुझसे कहा कि जाकर कह दे कि कल से जानवराे काे मै खाउंगा… महाराज आज मुझे खाकर भूक शांत कर लें कल से ताे आपके नसीब में कुछ नहीं है….
इसपर शेर ने क्रोध में भरकर कही कि चल बता कहा है वह शेर आज मै सर्वप्रथम उसे मारुंगा… तब मेरा भूक शांत हाेगी… शेर और सियार दाेनाे कूयें की तरफ चल दिये… उन्हें साथ जाता देख झाड़ियों में छुपे हुये बड़े जानवर काे बड़ा आश्चर्य हुआ… वह भी धीरे धीरे छुपकर उनके पीछे चल दिया….
कूयें पर पहुंच कर सियार ने कहा महाराज इसी कूये मे बैठा है वह शेर.. आप कूयें में दहाड़ लगाइये… तब वह आयेगा…. जैसे ही शेर ने कूयें में दहाड़ लगायी… उसकी परछाई ने भी दहाड़ लगायी… इसपर शेर काे गुस्सा आ गया और उसने कूयें में छलाँग लगा दी…. छपाक और खेल ख़त्म….
वह कूयें मे से बचाने की गुहार लगाता रहा और कुछ देर बाद आवाज़ बंद हाे गयी…. इधर बडे़ जानवर ने जंगल में आकर सारी कहानी बता दी… सारे वन में उत्सव मनाया जाने लगा….और सियार का खूब स्वागत सत्कार किया गया…. इस तरह बुद्धिमान सियार ने खुद के साथ कइयाें की जान बचा ली.यह  chalak siyar moral story  कैसी लगी. अन्य good moral stories के लिए इस लिंक तीन गुरु मोरल स्टोरी पर क्लिक करें.


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