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कठिन परिश्रम का परिणाम

कठिन परिश्रम का परिणाम
Written by Abhishek Pandey

कठिन परिश्रम का परिणाम एक बच्चा था. सभी उसे मंद्बुधि , महामूर्ख कहते थे. उसके गुरुजन भी उससे नाराज रहते थे क्योंकि वह पढ़ने में बहुत कमजोर था. उसे कुछ भी याद नहीं रहता था.

 

 

 

कक्षा में उसका प्रदर्शनं औसत से भी कम रहता था. बच्चे भी उसका खूब मजाक उड़ाते थे . उसका स्कूल जाना अब सजा हो गया था. इन सबसे परेशान होकर उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया .

 

 

 

अब वह दिन भर इधर-उधर भटकता और अपना समय बर्वाद करता . एक दिन इसी तरह कहीं से जा रहा था . घूमते – घूमते उसे प्यास लग गयी. वह इधर-उधर पानी खोजने लगा. अंत में उसे एक कुआं दिखाई दिया.

 

 

वह वहां गया और कुएं से पानी खींच कर अपनी प्यास बुझाई. अब वह काफी थक चुका था, इसलिए पानी पीने के बाद वहीं बैठ गया. तभी उसकी नजर पत्थर पड़े उस निशाँ पर गयी जो बार – बार कुएं से पानी खींचने की वजह से पत्थर पर पद गयी थी.

 

 

 

वह मन ही मन सोचने लगा कि जब बार-बार पानी खींचने से इतने कठोर पत्थर पर भी रस्सी का निशान पड़ सकता है तो लगातार मेहनत करने से मुझे भी विद्या आ सकती है. उसने यह बात मन में बैठा ली और फिर से विद्यालय जाना शुरू कर दिया.

 

 

 

अब वह मन लगाकर पढ़ाई करने लगा. कुछ दिन तक लोग उसी तरह उसका मजाक उड़ाते रहे पर धीरे-धीरे उसकी लगन देखकर अध्यापकों ने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया .

 

 

 

उसने मन लगाकर अथक परिश्रम किया. कुछ सालों बाद यही विद्यार्थी प्रकांड विद्वान वरदराज के रूप में विख्यात हुआ, जिसने संस्कृत में मुग्धबोध और लघुसिद्धांत कौमुदी जैसे ग्रंथों की रचना की. इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि आप किसी भी कमजोरी पर जीत हासिल कर सकते हैं , बस जरुरत है कठिन परिश्रम और लगन की.

 

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