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surya bhagwan image hindu dharm में देवी देवताओं और उनसे जुड़े रहस्य एक अलग ही पहचान रखते हैं और उनके हर एक रहस्य में एक सच्चाई होती है. विभिन्न देवी देवता अपनी वेश – भूषा , ताकत और वाहन से पहचाने जाते है. सभी देवी देवताओं के वाहन मे एक खास रहस्य छिपा होता है कि आखिर उन्हें यही वाहन क्यों मिला. जैसे मां दुर्गा का वाहन शेर है, भगवान गणेश का वाहन मूषक है तो इसके पीछे रहस्य छुपे हैं. आज हम pauranik katha में यह जानेंगे कि आखिर भगवान सूर्य क्यों करते हैं सात घोड़ों की सवारी क्यों करते हैं.

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भगवान सूर्य जिन्हें आदित्य, रवि आदि नामों से भी जाना जाता है वे ७ विशाल और मजबूत घोड़ों वाले रथ पर सवार होते हैं. इन घोड़ों की लगाम अरुण देव के हाथ में होती है. लेकिन सबसे अहम् बात आती है कि सात घोड़े ही क्यों , यह ७ की संख्या ही कई सारे रहस्य खड़ी करती है. इसको लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं. आईये उन्ही में से एक dharmik katha के बारे में आपको बताता हूँ.

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दरअसल सूर्य भगवान ११ भाई है, जिन्हें एकत्रित रूप में आदित्य कहा जाता है. सूर्य भगवान के अलावा क्रमशः अंश, आर्यमान, भाग, दक्ष, धात्री, मित्र, पुषण, सवित्र, सूर्या, वरुण, वमन यह उनके भाई हैं. सभी कश्यप और अदिति की संतान हैं. पौराणिक कथाओं में कहीं कही यह संख्या ८ या ९ बताई गयी है तो कहीं १२ भी बताई गयी है. दरअसल भगवान सूर्य के सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते है. उनके घोड़ों का नाम क्रमशः गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगती, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति है. अगर हम इसे साधारण तौर पर देखें तो यह एक खास रोशनी को भी दर्शाते हैं. ऐसी रोशनी जो भगवान सूर्य से आती है. यह तो सभी लोग जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात तरह की किरणे होती हैं जो मिलकर इन्द्रधनुष बनाती हैं. भगवान सूर्य के घोड़ों को इससे जोड़कर देखा जाता है. उसका कारण यह कि भगवान सूर्य के रथ के सभी घोड़े अलग – अलग रंग के हैं , उनके रंग में समानता नहीं है.

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pauranik katha के अनुसार सूर्य भगवान जिस रथ पर सवार हैं उसे अरुण देव द्वारा चलाया जाता है.एक ओर अरुण देव द्वारा रथ की कमान तो संभाली ही जाती है लेकिन रथ चलाते हुए भी वे सूर्य देव की ओर मुख कर के ही बैठते हैं. रथ के नीचे केवल एक ही पहिया लगा है जिसमें 12 तिल्लियां लगी हुई हैं. यह काफी आश्चर्यजनक है कि एक बड़े रथ को चलाने के लिए केवल एक ही पहिया मौजूद है, लेकिन इसे हम भगवान सूर्य का चमत्कार ही कह सकते हैं। कहा जाता है कि रथ में केवल एक ही पहिया होने का भी एक कारण है, यह अकेला पहिया एक वर्ष को दर्शाता है और उसकी 12 तिल्लियां एक वर्ष के 12 महीनों का वर्णन करती हैं.

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एक pauranik उल्लेख के अनुसार सूर्य भगवान के रथ के समस्त 60 हजार वल्खिल्या जाति के लोग जिनका आकार केवल मनुष्य के हाथ के अंगूठे जितना ही है, वे सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। इसके साथ ही गन्धर्व और पन्नग उनके सामने गाते हैं औरअप्सराएं उन्हें खुश करने के लिए नृत्य प्रस्तुत करती हैं. कहा जाता है कि इन्हीं प्रतिक्रियाओं पर संसार में ऋतुओं का विभाजन किया जाता है. इस प्रकार से केवल पौराणिक रूप से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों से भी भगवान सूर्य का यह विशाल रथ जुडा है. कोणार्क के सूर्य मंदिर में इसका विस्तृत रूप से चित्रण और वर्णन मिलता है.

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