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Suspense Story

अतीत suspense kahani

अतीत यह कहानी अतीत एक suspense kahani है. अंकल मेरी वाली चाकलेट दीजिये . यह लो बेटा तुम्हारी वाली चाकलेट . बेटा मम्मी आई. नहीं अंकल कहकर हाफ पेंट और लाल टीशर्ट जो कि उसकी फेवरेट टीशर्ट थी पहना ११ साल का शिशिर ख़ुशी से उछलते हुए अपने घर की ओर चल दिया. उसे क्या पता था कि शायद यह चाकलेट उसकी जिंदगी की आखिरी चाकलेट होगी. यह कौन लड़का है. एक आदमी ने उसे घूरते हुए दुसरे से पूछा . यह लोग अभी नए ही आये हैं मोहल्ले में . इसका मामा और इसकी मां दोनों साथ रहते हैं और पास के फैक्ट्री में काम के लिए जाते हैं. अच्छा और इसका पति ..पहले आदमी ने पूछा ….क्या पता , लेकिन पार्टी मालदार है और नौकरी भी अच्छी है ..दुसरे ने कहा

शाम ६ बजे शिशिर की मम्मी अनीता घर आती है . मम्मी आई ..मम्मी आई ..अनीता के दोनों बेटे रघु और शिव उम्र क्रमशः ८ और ६ वर्ष ख़ुशी से उछल पड़े . बेटा शिशिर कहाँ हैं ..अनीता ने पूछा ……मम्मी भैया तो चाकलेट लाने गए थे अभी तक नहीं आये …काफी समय हो गया. काफी समय हो गया ? कहाँ गया होगा ? अनिता तेजी से बाहर आई और शिशिर को इधर – उधर ढूंढने लगी. घर के पास पैसे गाँव के कुछ लोगों से उसने शिशिर की पूछताछ की. आते जाते लोगों से उसने शिशिर के बारे में पूछताछ की. उसकी घबराहट बढाती जा रही थी और यह घबराहट यह इंगित कर रही थी कि अनीता को इस बात का डर पहली से था. तभी विनीत जो उसका मुंहबोला भाई था आता दिखाई दिया. विनीत शिशिर नहीं दिख रहा है. वह चाकलेट लेने गया था और तब से आया नहीं..,….ठीक है ..मैं देखता हूँ और कल से बच्चों को ताले में बंद करके जाया करों .

लगभग एक घंटे बाद विनीत वापस लौटा ……शिशिर मिला…नहीं उसे मैंने हर जगह ढूँढा, लेकिन कहीं दिखाई नहीं दिया….ऐसे कहाँ जा सकता है वह ….. अगले दिन शाम को ६ बजे….बच्चों लो मैं तुम्हारे लिए बिस्किट लायी हूँ…..मम्मी शिशिर भैया कब आयेंगे..शिव ने सवाल किया .
शिव तुम्हारी जबान बहुत चलती है…कम बोला करो और यह बिस्किट खा लो . तभी डोरबेल बजती है…अनीता ने दरवाजा खोला….अरे निकिता तुम ? आओ ..बैठो……नहीं नहीं ….अभी घर पर बहुत काम है …शिशिर कहाँ हैं ? ओ….ओ ..शिशिर को बुखार है . वह सोया हुआ है…निकिता घबराकर बोली …..ठीक है उसके क्लास टीचर ने यह टाइम टेबल दिया है. उसकी छमाही के एग्जाम्स होने वाले हैं…..निकिता टाइम टेबल देकर चली गयी.

अनीता भारी मन से टाइम टेबल लेकर बैठ गयी और फूट – फूट कर रोने लगी . अगले दिन सुबह ९ बजे अनीता के मोबाइल पर एक काल आता है. अनीता फोन उठाती है …हैलो दूसरी तरफ से आवाज आती है शिशिर …अभी दूसरी तरफ की बात पूरी भी नहीं होती है कि तभी अनिता घबराकर बोलती है ” क्या हुआ शिशिर को ? कहाँ है वह ? “…अरे वही पुचने के लिए मैंने भी आपको काल किया है. मैं शिशिर का क्लास टीचर बोल रहा हूँ . अच्छा …अच्छा बात को संभालते हुए अनीता बोली. क्या हुआ शिशिर को ? वह स्कूल क्यों नहीं आ रहा है ? आप इतना घबराई हुई क्यों है ? कोई परेशानी है क्या ? शिशिर के क्लास टीचर ने सवालों की झड़ी लगा दी…..न..न..नहीं कोई बात नहीं है जी. वो क्या है शिशिर की तबियत खराब है सो वह इस बार इग्जाम नहीं दे पायेगा और यह कह कर अनीता ने फोन काट दिया. शिशिर के क्लास टीचर को शक हुआ और उसने यह बात प्रिंसिपल सर को बताई और प्रिंसिपल ने पुलिस को खबर दे दी.

पुलिस जब तक अनीता के घर आती अनीता वहाँ और उसका पूरा परिवार जा चुका था. घर पर ताला लगा हुआ था. तिवारी आस पास पता कीजिये कहाँ गए हैं ये लोग …इन्स्पेक्टर शशिकांत दुबे ने कहा ….कुछ देर बाद सर वे लोग पुरे परिवार के साथ कहीं चले गए. वे बहुत जल्दी में थे और बहुत घबराए हुए थे. तिवारी मामला गड़बड़ है….घर का ताला तोड़ो और भदोरिया आप घर के मालिक का पता लगाओ और उसे बुलाओ …सर घर में तो कुछ नहीं है….एक मिनट सर यह फोटो और कुछ कपडे…शायद यह शिशिर के ही होंगे…लेकिन वे लोग फोटो और कपडे भी नहीं ले गए..तिवारी ने कहा

भास्कर यह फोटो अगल बगल दिखाओ और पता करो कि यह शिशिर के ही फोटो हैं… ओके सर…सर मकान मालिक दयाराम चौधरी आ गए हैं. दयाराम जी कितने दिन हो गए घर भाड़े पर देकर…दुबे ने पूछा…सर तीन महीने हो गए…ठीक है क्या जानते हो इनके बारे में इनका कुछ एड्रेस…आधार कार्ड……नहीं सर..मैंने कई बार माँगा लेकिन वे ताल देते थे. वे भाडा ५०० बढ़ाकर देते थे और मैं लालच में आ गया…अच्छा कल को कोई आतंकवादी ५००० रुपये देगा तो आप उसे भी घर भाड़े पर दे दोगे….तिवारी जी ले जाओ इसे पुलिस स्टेशन..दुबे ने गुस्से से कहा…सर यह फोटो शिशिर के ही हैं…भदोरिया ने कहा

सर अभी कंट्रोल रूम से फोन आया…पास की झाड़ियों में १० – ११ साल के बच्चे की लाश मिली है…कहीं शिशिर तो नहीं …तिवारी ने कहा…चलो चल कर देखते हैं और पूरी टीम झाड़ियों के पास पहुँच गयी…लाश शिशिर की ही थी….बॉडी पोस्टमार्टम को भिजवा दो और आस के गाँव में टीम को लगा दो..दुबे ने कहा

अनीता..यह लो फोन….विनीत ने कहा ..नया फोन…इसकी क्या जरुरत थी…अनीता ने पूछा ….पुलिस मोबाइल से ट्रेस कर सकती है और मैंने सिम भी बदल दिए हैं….विनीत ने कहा..तभी अनिता की नजर विनीत के पास मौजूद आज के अखबार पर पड़ी. वह छीनकर पढ़ने लगी और कुछ देर बाद वह अखबार के साथ एक झटके से बैठ गयी और सिर पटक कर रोने लगी….संभालो….खुद को अनिता…विनीत ने कहा…कैसे संभालू…..आज शिशिर की मृत्यु हो गयी और उसकी जिम्मेदार मैं हूँ …..अनिता यह कह कर फूट – फूट कर रोने लगी और अपने अतीत की बारे में सोचने लगी.

उधर छानबीन में पुलिस को एक सुराग मिला . जिस दूकान से शिशिर चाकलेट लेने गया था उसके मालिक की पत्नी से अनीता की अच्छी मित्रता थी. वह उसे लगभग अपनी सभी बात बताती थी. उसने पुलिस को बताया कि उसका गाँव माधोपुर है . जब पुलिस नी शिशिर के बारे में पूछा तो उसने बताया कि अनीता ने शिशिर के बारे में कुछ नहीं बताया और ना ही वह कभी अपने पति के बारे में बताती थी और ना ही अपने मां-बाप के बारे में. उससे बातों ही बातों में माधोपुर का नाम ले लिया था. नहीं तो वह माधोपुर के बारे में भी नहीं बताती थी. वह अपने अतीत को याद नहीं रखना चाहती थी. उसे अपने अतीत से नफ़रत हो गयी थी.

तिवारी यह एक बहुत बड़ा क्लू है. माधोपुर चलने की तैयारी करो…..दुबे ने कहा …ओके सर…माधोपुर २५ घरों का गाँव है . गाँव मध्यम वर्गीय लोगों का है. पुलिस ने आखिर अनीता के माँ – बाप का पता लगा ही लिया…..क्या आन है आपका ?…..त्रिलोचन……अनीता आपकी ही बेटी है ना…तिवारी ने कड़कती आवाज में पूछा…थी..पर अब नहीं है..तिलोचन नने जवाब दिया……सही सही जवाब दे…..दुबे ने गरजकर कहा….नहीं है हमारी बेटी वह…मर गयी हमारे लिए….वह अपने मुंहबोले भाई के साथ भाग गयी….कलंक लगा गयी पुरे खानदान पर…किस मुंह से उसे बेटी कहे….त्रिलोचन एक ही सांस में सब कह दिया…शर्म ना आती तुझे ऐसा सोचते हुए…..विनीत उसकी मदद को उसके साथ में गया था…तिवारी ने त्रिलोचन का कालर पकड़कर उसे दीवाल में सताते हुए बोला…..छोडो तिवारी..क्या कर रहे हो ?..दुबे में कड़क आवाज में बोला

ओ साहब..आप साहब अपने घर के लिए हो….हमारे को छुआ ना ठीक नहीं होगा…..आपको कैसे पता विनीत मदद करने गया था…बुलाओ अभी विनीत को….कहाँ है विनीत….त्रिलोचन की औरत शनिचरी लगभग चिल्लाते हुए बोली….मां जी वो अनीता और विनीत और उसके बच्चे कहीं गायब हैं और शिशिर की ह्त्या हो चुकी है….हम उसकी खोज में आये है…..दुबे ने उन्हें समझाते हुए कहा…तो जाओ गुल्लू के घर….वही किया होगा सबकुछ …अभी दो दिन पहले ही कह रहा था की सबको मार दूंगा…..शनिचरी ने उसी आवाज में कहा……गुल्लू कौन ? दुबे ने पूछा…गुल्लू ..विनीत का बाप..कुछ पता नहीं रहता और चले आते हैं मुंह उठा के …शनिचरी बड़बड़ाती हुई घर में चली गयी और पुलिस घर के बाहर.

तिवारी दिमाग ठिकाने पर है…या वापस जाना है….दुबे ने गुस्से से पूछा …सारी सर ..वो…हाँ ठीक है चलो गुल्लू के घर…..गुल्लू घर में है क्या…अबकी भदोरिया ने मोर्चा संभाला…..बोलिए सर…..विनीत के बारे में पूछताछ करनी है….वो तो मर गया सर…..तेरी तो….तिवारी
उठा इसको डाल जीप में..और त्रिलोचन को भी ला…..इनकी खबर लेता हूँ….दुबे गुस्से में बोले..;…पुलिस लाकअप में…अब मैं जो और जिससे और जितना पूंछू…उतना और सही जवाब देना….नहीं तो यह देख रहे हो दंडक …मारूंगा दस और गिनूंगा जीरो…..अब बता अनिता का पति कहाँ रहता है…जी वह अपने गाँव सोनेरा में रहता है वहाँ उसकी किराने की दूकान है….अनीता उसके साथ क्यों नहीं रहती ?…जी उसका तलाक हो गया है…… वह अपने पति और अपने अतीत से इतना डरती क्यों है ? ….पता नहीं सर …… गुल्लू अब तुम बताओ …..विनीत ने भागने के पहले..आप लोगों को कुछ बताया था…..नहीं साहब….लेकिन उसने अपनी मां से कुछ बताया था, लेकिन लाख पूछने पर उसकी मां नी मुझे कुछ नहीं बताया.

भादोरिया..विनीत की मां को लेकर आओ..सिंह आप अनीता के पति को थाणे लाओ….दुबे ने….लगभग ५ घंटे बाद…मांजी..डरने की कोई बात नहीं है…यहाँ लेडिस पुलिस भी है….मैं बाहर जा रहा हूँ..आप इन्हें सबकुछ सच सच बता दो…देखो अगर आप सच सच बता देंगे तो विनीत जिन्दा बाख जाएगा….आपको कहीं जाने की जरुरत नहीं है…मैं आपको सही..सही बताती हूँ…..अनीता की दो शादी हुई थी….शिशिर पहली शादी से हुआ था और तलाक के बाद उसकी दूसरी शादी जो हुई उससे रघु और शिव हुए थे…..वहाँ उसके पति ने शिशिर को साथ रखने से मना कर दिया….इससे दोनों के बीच खूब झगड़ा होता था….उसने एक दिन शिशिर को जान से मारनी का प्रयास किया…किसी तरह अनिता ने उसे बचा लिया और माधोपुर आ गयी…..इसके बाद उसके पिता ने तलाक दिलव दिया और तीसरी शादी के चक्कर में पड़ गया…उसे शादी के बदले अच्छे पैसे मिलते थे….जिसे वे और पंच आपस मिल बाँट कर खा लेते थे….इस शादियों की कोई लिखा पढ़ी नहीं होती थी…बिलकुल ही सादे समारोह में यह शादी होती थी….. तीसरी शादी की बात सुनकर अनीता डर गयी…वह विनीत को भाई मानती थी…ऐसे में विनीत ने उसकी मदद की और विनीत ने मुझे सबकुछ बताया. वह कभी कभी मुझसे मिलने आता था. अभी दो दिन पहले ही वह मुझे मिला था. अभी वे लोग बगल के गाँव लखिपुर में हैं. अनीता फिर से अपने अतीत में नहीं लौटना चाहती थी.

सर केस तो अब लगभग साफ हो गया है….यह क़त्ल जरुर अनीता के दुसरे पति ने किया है..तिवारी ने कहा…लग तो यही रहा है…लेकिन इसमें उसके होने वाले पति का भी हाथ हो सकता है. क्योंकि शिशिर के वजह से ही वह गाँव छोड़कर चली गयी थी. तीन टीम बनाओ…..एक टीम उसके दुसरे पति को लाएगी ….दूसरी टीम विनीत और अनिता को और तीसरी टीम उसके तीसरे पति को … ओके सर….

सर सभी लोग आ चुके हैं….ओके पहले विनीत और अनीता को लाओ….अनिता..तुमने शिशिर की मौत को क्यों छुपाया….मैं डर गयी थी सर….मैं फिर से इस अतीत में नहीं आना चाहती थी…..मुझे विनीत ने पुलिस की पास जाने को कहा ..लेकिन मैं बहुत डर गयी थी…और अनीता रोने लगी……अच्छा यह बताओ…कौन हो सकता इस ह्त्या के पीछे ? …..मेरा दूसरा पति..उसने एक बार प्रयास किया था…हाँ पता है…ठीक है अभी आप लोग बाहर जाओ….अभी होने वाले पति को लाओ…..क्या नाम है तेरा ? …जी शशि…क्यों मारा तूने शिशिर को ? सर मैं क्यों मारूं…..मुझे तो पता ही नहीं था कि अनीता के तीन बच्चे है…त्रिलोचन ने कहा था कि उसका एक ही बच्चा है….ठीक है बहार बैठ….अभी दुसरे पति को लाओ….क्यों मारा शिशिर को ? ..सर मैं अभी मुंबई में था…कल ही आया हूँ…मुझे शिशिर से नफ़रत थी…वह मेरा बेटा नहीं था…लेकिन जब तलाक हो गया तो बात ख़त्म..अब मैं उसे क्यों मारूंगा ? …ठीक है चल बाहर बैठ

तिवारी…यस सर क्या पता चला…खुनी का पता चल गया है…त्रिलोचन को लाओ…दुबे ने पुरे विश्वास से कहा…सर त्रिलोचन ? …तिवारी लाओ साले को…..त्रिलोचन अब एक बात कान खोलकर सुनो….अभी चुपचाप यह बताओ कि तुमने शशि को झूठ क्यों बोला की अनीता का एक ही बच्चा है ? सर ओ….ओ …सटाक..एक थप्पड़ जोर का तिवारी ने लगाया और त्रिलोचन सारी कहानी बकने लगा….सर उसके पहले तलाक के बाद अनिता की दूसरी शादी से मुझे ७ लाख रूपया मिला था और उसकी तीसरी शादी मैं १२ लाख में तय की थी…जिसका मैंने ५ लाख ऐडवांस ले लिया था…..लेकिन इसी बीच किसी ने शशि के कान भर दिए और उसने शादी से मना कर दिया . मुझे शक हुआ तो मैं कारण पूछा तो उसने कहा कि अनीता के कितने बच्चे हैं ? …मैं बात को ताड़ गया और कह दिया कि एक..उसके बाद तब तक अनिता यहाँ से भाग गयी…लेकिन शशि मुझसे पैसे माँगने लगा और इसी क्रम में मैंने अनिता का पता लगाया और शिशिर का किटनैप कर ह्त्या कर दी..मैं रघु को भी मारना चाहता था लेकिन तब तक अनिता ने रूम बदल दिया था…..मैं लालच में आ गया था…लालच …तूने तो अपनी ही बेटी की जिंदगी उजाड़ दी..उसे अपने अतीत से डर लगानी लगा ….तुझे तो मैं फांसी दिलाऊंगा…….

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