Suspense Story

आखिरी विश्वास suspense story

आखिरी विश्वास suspense story
आखिरी विश्वास suspense story

आखिरी विश्वास suspense story पाण्डेय जी बहुत ही खुश थे. उनके चहरे की चमक बढ़ गयी थी. उनका आत्मविश्वास का  लेवल भी दिन प्रतिदिन महगाई की तरह बढ़ता ही जा रहा था. जो कोई भी उन्हें देखता बोलता क्या चौका मारा  पाण्डेय जी ने. इस उम्र में जब लोग पोते पोतियों को खिलाते  हैं ये तो छोकरी खिला रहे हैं और तो और जब कोई उनसे कुछ कहता है छेड़खानी करता है तो कहते है “दिल तो बच्चा है जी ” …इसका क्या पता कब किस पर आ जाए….प्यार कोई उम्र  जाति धर्म थोड़े ही देखता है….उनकी इस तरह की बातों को सुनकर पूछने  वाले निरुत्तर हो जाते थे….

एक दिन पाण्डेय जी और उनकी होने वाली पत्नी ३० वर्षीया कुसुम जी…जो की सिर्फ उम्र में ३० वर्ष की थी…उन्हें देखकर कोई २० वर्ष से १ दिन भी ज्यादा कहने की हिमाकत नहीं कर सकता था. खूबसूरती ऐसी कि अप्सरा भी शर्मा जाए. जो भी उन दोनों को साथ देखता उसकी मुंह से अनायास ही निकल जाता ” किस्मत हो तो पाण्डेय जी जैसी “

पिछले जन्म में लगता है पुण्यों का भण्डार लगाकर मरे थे पाण्डेय जी ….जिसका फल इस उम्र में उन्हें मिल रहा है. घर से थोड़ी दूर पर बहने वाली नदी के किनारे रोज दोनों घंटों समय बिताते और प्यार के सागर में गोते लगाते.

देखो ना आज चाँद कितना सुन्दर दिख रहा है…,,पाण्डेय जी के कंधे पर अपना सर रखे हुए कुसुम ने कहा 

ना…ना मेरे चाँद से खुबसूरत नहीं …..पाण्डेय जी ने कुसुम के बालों को हलके से सहलाते हुए कहा 

रात की नीरवता को नदी की कल कल की ध्वनि भंग कर रही….यही ध्वनि अनादी काल से जीवन के गीत बनाकर सभ्यता को  गति और  दिशा दे रहा है. चाँद इठलाते हुए आकाश में खडा था…लेकिन उसकी अकड़ से बेखबर पाण्डेय जी अपने चाँद की खूबसूरती को निहारने में मग्न थे. तभी हवा का एक तेज झोका नदी किनारे अकेले खड़े पेड़ को झकझोर कर चला गया….कुसुम पाण्डेय जी के बाहों में सिमट गयी. अब वह उष्णता महसूस कर रही थी और उसकी साथ ही एक आदम की खलिश गंध भी.

रात काफी हो गयी है……अब हमें चलना चाहिए…..अगल बगल कोई दिखाई नहीं दे रहा है..पाण्डेय जी ने कहा 

हाँ सही बात है….कुसुम ने हाँ में सर सर हिलाते हुये कहा

चाँदनी रात में….सुनसान सड़क पर दोनों अपनी ही मस्ती में चले जा रहे थे. कुछ दूर कुत्तों के भौकने की आवाज रात की खामोशी को तोड़ दे रही थी. हाथों में हाथ पकडे हौले हौले चलते हुए पाण्डेय जी ने कहा ” ये वक्त भी कितना कमीना है..जब मन के अनुकूल हो तो फुर्र से उड़ जाता है और जब प्रतिकूल तो सरकता तक से नहीं.”

पाण्डेय जी अब हमारे जीवन में कभी  भी प्रतिकूल समय नहीं आएगा…..कुसुम ने उनकी ओर प्यार से देखते हुए कहा 

पाण्डेय जी मुस्कुराकर उअनाकी बातों को स्वीकृति दी.

अच्छा मैं एक बात बताना भूल ही गया…कल कंपनी की डायरेक्टर सर ने हम दोनों को रात के खाने पर बुलाया है…पाण्डेय जी ने चहकते हुए कहा

अच्छा यह तो बड़ी अच्छी बात है…अभी तक तो सिर्फ मैं आपसे उनकी तारीफ़ ही सुनती थी…कल मिलना भी नसीब हो जाएगा …..कुसुम ख़ुशी से बोली

बात करते करते दोनों घर पहुँच गए थे…रात काफी हो गयी…दोनों सो गए……अगले दिन शाम करीब ७ बजे पाण्डेय जी मार्केट से आते ही कहा ..अरे अभी तक आप तैयार भी नहीं हुईं…वहा पहुँचाने में भी ३ घंटे लग जायेंगे….जल्द करों 

आ रही हूँ…बाबा अन्दर से कुसुम की आवाज आई

पाण्डेय जी भी तैयार होने लगे…वे जैसे शीशे की सामने खड़े होकर अपने शर्ट की बटन लगा रहे थे….कि शीशे में एक छवि दिखाई दी…जिसे देख उनके मुंह से अनायास ही निकल गया ” ओह माई गाड…कहीं नजर ना लग जाए”…आज तो जो भी देखेगा जल भुन कर ख़ाक हो जाएगा…..

आखिरी विश्वास suspense story
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अपनी तारीफ़ सुनकर कुसुम शर्मा गयी…इससे उनके गुलाबी गाल और भी लाल हो गए…..मिनी स्कर्ट में वे आफत लग रही थी आफत.

फटाफट पाण्डेय जी ने गाडी निकाली….रास्ते में ट्राफिक होने के कारण उन्हें पहुँचने करीब ११ बज गए थे. उन्होंने डोर बेल बजाई….एक बेहद ही हैंडसम युवक ने दरवाजा खोला और उसकी नजर जब कुसुम पर पड़ी तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया…वह ऊपर से नीचे कुसुम को देखता रहा….तभी पाण्डेय जी ने टोका सर

अरे आईये..आईये पाण्डेय जी…स्वागत है आपका…थोड़ा लेट हो गए आप…..कंपनी डायरेक्टर विकास बहल ने कहा 

अरे नहीं नहीं सर वह क्या हैं ना कुसुम जी को तैयार होने में थोड़ा समय लग गया ……पाण्डेय जी के मुस्कान में एक रहस्य छुपा हुआ था…की शायद यह उसका आखिरी विश्वास होने वाला है…   जिसे कुसुम ताड़ नहीं पायी 

तभी तो इतनी हाट दिख रही है कुसुम जी…..क्यों कुसुम जी सही है ना……विकास ने मुस्कुराते हुए कहा और इस पर कुसुम शर्मा गयी.

खैर खाने पीने का दौर शुरू हुआ…विकास बहल ने खुद ही सबके लिए खाना लगाया..इस पर कुसुम ने कहा कि सर आपकी वाइफ भी आपके साथ ही रहती हैं ना…वह कहीं दिख नहीं रहीं हैं….

हाँ वे फिल्म फिल्म देखने गए हैं….आज सलमान खान की फिल्म आई है ना कोई नयी …..बहल ने कहा

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हाँ… एक आई है नयी और वैसे भी मुझे सलमान खान बहुत पसंद है…कुसुम ने चहकते हुए कहा

तो मैं क्या सलमान खान  से कम हूँ क्या….विकास ने अपने डोले दिखाते हुए कहा और सभी हंसने लगे 

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रात के करीब २ बज रहे थे. रात अपनी पुरे यौवन पर थी. रात की ख़ामोशी को छत बिछत करते हुए एक चीख विकास बहल के घर से उठी….बचाओ…बचाओ…..क्या कर रहे हैं आप और मैं यहाँ कैसे आई ….मैं तो खाना खा रही थी…..खाना अचानक से कुसुम के लव शांत हो गए. 

सही सोच रही हो तुम…..तुम उसी खाने के कारण यहाँ हो…उस खाने में बेहोशी की दवा  मिली हुई थी….जिससे तुम बेहोश हो गयी……विकास ने उसके गोरे बदन पर बेशर्मी से हाथ फेरते हुए बोला

छोड़ दो …..भगवान के लिए छोड़ दो…पाण्डेय जी…पाण्डेय जी…बचाओ

हा हा हा…… पाण्डेय जी…..उसने ही तुम्हे यहाँ छोड़ा है और यहाँ से तुम सीधा रेड लाईट एरिया में…..और इसके बदले में उसे कंपनी के मैनेजर का पद मिला है….विकास यह कहते हुए कुसुम पर टूट पड़ा. कुसुम अब शांत हो गयी थी……उसने मन ही मन कहा यह  आखिरी विश्वास था…….!!

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