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tenali rama stories in hindi

tenali rama stories in hindi
Written by Abhishek Pandey

tenali rama stories in hindi गर्मी का दिन था. भीषण गर्मी पड़ रही थी. महाराज के दरबार में भी काफी उमस थी. सभी पसीने से तर बतर थे. महाराज भी पसीने से नहाए हुए थे. तभी पुजारी जी बोले …सुबह की बाग़ की हवा कितनी शीतल और सुगन्धित होती है न. क्या ऐसी हवा दरबार में नहीं लायी जा सकती महाराज ?

 

वाह राजगुरु..बहुत ही उत्तम उपाय बताया आपने…महाराज खुश होते हुए बोले और फिर दरबारियों से मुखातिब होते हुए बोले ” आप में कोई बाग़ की हवा दरबार में ला सकता है ? उसे अच्छा इनाम दिया जाएगा, लेकिन सभी दरबारियों ने सिर झुका लिए और मन ही मन राजगुरु को कोसने लगे कि कैसी वाहियात उपाय बता दिए महाराज को. राजा ने सभा बर्खास्त कर दी और बर्खास्त के पहले एक बार फिर याद दिलाया कि जो कोई भी बाग़ की हवा लेकर आयेगा उसे बहुत अच्छा इनाम मिलेगा.

 

अगले दिन सभी दरबारी सभा में आये और उत्सुकता से एक – दुसरे की ओर देखने लगे. तभी महाराज दरबार में आये और पूछा क्या हुआ ? कोई हवा लाया . तभी एक दरबारी उठा और कहा ” क्षमा करें महाराज , लेकिन भला हवा को लाया जा सकता है. हवा कोई वाहन तो है नहीं जिसे दरबार की तरफ मोड़ दिया जाए और वह कोई एकत्रित करने वाली वास्तु भी नहीं है , जिसे एकत्र कर के अपने हिसाब से कहीं भी छोड़ा जाए” .

 

चुप रहो..बहाने मत बनाओ…यह कहो कि तुमसे हो नहीं पाया…बैठ जाओ..इतने बड़े – बड़े दरबारी होकर आप लोग यह काम नहीं कर सके

राजा ने क्रोधित स्वर में कहा

 

आप निराश क्यों होते हैं महाराज…मैं बाग़ की हवा कैद्क्कर लाया हूँ…तेनाली अपने जगह पर खड़े होकर बोले

 

उनकी बात सुनकर सभी चौंक पड़े . महाराज खुश होते हुए बोले कहाँ है हवा ? जल्दी छोड़ो. महाराज की आगया पाते ही तेनालीराम ने बाहर खड़े ४ व्यक्तियों को अन्दर बुलाया और महाराज के इर्द गिर्द घेरा डलवा दिया . उन व्यक्तियों के हाथ में खास – खास , चमेली , गुलाब के फूलों से बने बड़े -बड़े पंखे थे जो इत्र से भीगे हुए थे. तेनालीराम का इशारा पाते ही वे पंखे झलने लगे और थोड़ी ही देर में पूरा दरबार महक उठा और महाराज को गर्मी से राहत मिली . महाराज तेनालीराम से बड़े खुश हुए और उन्हें ५००० स्वर्ण मुद्रा दी.

 

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