Tungareshwar temple. तुंगारेश्वर महादेव मंदिर वसई. जाने कैसे पहुंचे तुंगारेश्वर मंदिर

Tungareshwar temple. तुंगारेश्वर महादेव मंदिर वसई. जाने कैसे पहुंचे तुंगारेश्वर मंदिर

Tungareshwar Temple Story in Hindi 

 

 

Tungareshwar temple    महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई तालुका के तुंगारफाटा  (  सातीवली )  से लगभग ३-४ किलोमीटर दूर तुंगार पर्वत की हरी-भरी वादियों में स्थित है.

 

 

तुंगार पर्वत  पर स्थित  के कारण इस मंदिर का नाम तुंगारेश्वर  पड़ा. यह मंदिर हाइवे नंबर ८ (मुंबई-अहमदाबाद महामार्ग ) से थोड़ी दूर पर संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित है. अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो लोकल ट्रेन के वसई रोड स्टेशन  पर उतर कर, वहाँ से तुंगारफाटा के लिए सीधा ऑटोरिक्शा ले सकते हैं.

 

 

इसके आलावा आप वसई – विरार नगर पालिका की बस से  भी आप आ सकते  हैं. यह आपको बाप्पा सीताराम तक छोड़ेगी और वहाँ से थोड़ी दूर पर मंदिर है.

 

 

बाप्पा सीताराम से आपको पैदल यात्रा करनी होगी। वैसे आप ऑटो या मोटरसाइकिल से भी जा सकते हैं, लेकिन ऊँची चढ़ाई और पथरीले रास्ते के कारण पैदल जाना ही श्रेयकर होगा।

 

Tungareshwar History

 

 

 

कैसे पहुंचे तुंगारेश्वर 

 

आप प्रकृति के खूबसूरत नज़ारों का आनंद लेते हुए मंदिर की तरफ आगे बढ़ें। वैसे तो तुंगारेश्वर मंदिर हमेशा ही खुला रहता है, लेकिन शाम ७ बजे के बाद वन विभाग के द्वारा मंदिर जाने की मनाही है. क्योंकि मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित है इसलिए यह पाबन्दी है, लेकिन त्योहारों में कुछ छूट दी जाती है.
अगर आप भगवान् शिव के दर्शन   साथ – साथ मानसून का भी लुफ्त उठाना चाहते हैं तो सावन में अवश्य ही तुंगारेश्वर धाम आईये। सावन में लगभग प्रत्येक दिन बाप्पा सीताराम और तुंगारेश्वर मंदिर क्षेत्र में भक्तों के द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता  है. इसमें उपवास वालों के लिए अलग व्यवस्था होती है.
अगर आप सावन या महाशिवरात्रि के समय तुंगारेश्वर आते है तो बाप्पा सीताराम से तुंगारेश्वर तक की यात्रा पैदल ही करें। पुरे जंगल क्षेत्र में नशा की चीजे और अवैध कार्य करने की मनाही है.

Tungareshwar Temple History 

सावन के समय में प्रकृति का नजारा मन को मोहने वाला होता है. इस मंदिर का निर्माण भगवान् परशुराम ने किया है. तुंगार पर्वत बहुत सारे साधू संतों की तपोस्थली रहा है. मंदिर के ऊपरी हिस्से में परशुराम कुंड है जो की वर्ष भर शुद्ध जल से भरा रहता है.
पौराणिक रूप से यह वह स्थान है जहां Bhagwan Parshuram  द्वारा राक्षस के वध का उल्लेख किया गया था। भगवान परशुराम ने भी यहां ध्यान किया था। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने शूपारक के पास एक स्थान पर ध्यान किया था जिसे अब सोपारा या नालासोपारा कहा जाता है।
इस मंदिर के अलावा पवित्र ज्यामिति के कुछ सिंबल भी हैं और मंदिर को विशाल वास्तुशास्त्र के अनुसार बनाया गया है और कहा जाता है कि इस स्थान पर ऊर्जा महसूस की जा सकती है।
यहां आगे बढ़ने पर आपको  के दर्शन होंगे। वहाँ से थोड़ी ही दूर पर तुंगारेश्वर मंदिर  है. आप कुछ ही देर में मंदिर पहुंच जाएंगे। गर्भगृह में भगवान् शिव के दर्शन के बाद आप खोडियार  देवी, भगवान् गणेश और महाबली हनुमान जी के भी दर्शन करें।
यह एक शांत वन्य क्षेत्र है. आप शोरगुल ना करें। सभी गवरमेन्ट नियमों का पालन करें और एन्जॉय  करें. तुंगारफाटा पर कई सारे छोटे और बड़े होटल भी हैं. आप वहाँ रुक भी सकते  हैं.

 

 

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