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Bhakti Story

vaishno devi katha . vaishno devi story

vaishno devi katha
vaishno devi katha
Written by Hindibeststory

vaishno devi katha आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको जम्मू की vaishno devi की vaishno devi katha . vaishno devi story सुनाने जा रहे हैं. कथा इस तरह है . कटरा के करीब हन्साली ग्राम में vaishno mata के परम भक्त श्रीधर रहते थे. उनके यहाँ कोई संतान न थी. इस कारण वे बहुत ही दुखी रहते थे. एक दिन उन्होंने नवरात्रि पूजन के लिए कुँवारी कन्याओं को बुलवाया. वैष्णो माता भी कन्या रूप धारण करके उनके बीच में बैठीं. भोजन के बाद सभी अन्य कन्याये तो चली गयीं , लेकिन माता वैष्णो देवी नहीं गयीं.

वह श्रीधर से बोलीं-‘सबको अपने घर भंडारे का निमंत्रण दे आओ।’ श्रीधर ने उस दिव्य कन्या की बात मान ली और आस-पास के गाँवों में भंडारे का संदेश पहुँचा दिया. लौटते समय गोरखनाथ व भैरवनाथ जी को भी उनके चेलों सहित न्यौता दे दिया. सभी अतिथि हैरान थे कि आखिर कौन-सी कन्या है, जो इतने सारे लोगों को भोजन करवाना चाहती है?

श्रीधर की कुटिया में बहुत-से लोग बैठ गए. दिव्य कन्या ने एक विचित्र पात्र से भोजन परोसना आरंभ किया. भैरवनाथ को कुछ आभास हुआ. जब कन्या भैरवनाथ के पास पहुँची तो वह बोले, ‘मुझे तो मांस व मदिरा चाहिए.’ आप एक ब्राह्मण के घर भोजन के लियी पधारे हैं और ब्राह्मण के भंडारे में यह सब नहीं मिलता. कन्या ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया. भैरवनाथ ने जिद पकड़ ली किंतु माता उसकी चाल भाँप गई थीं.

वह त्रिकूट पर्वत की ओर उड़ चलीं. भैरवनाथ ने उनका पीछा किया. माता के साथ उनका वीर लंगूर भी था. एक गुफा में माँ शक्ति ने नौ माह तक तप किया. भैरव उन्हें ढूढते हुए वहाँ आ पहुंचे . एक साधु ने उससे कहा, ‘जिसे तू साधारण नारी समझता है, वह तो महाशक्ति हैं.’

भैरव ने साधु की बात अनसुनी कर दी. विनाश काले विपरीत बुद्धि की कहावत चरितार्थ हो रही थी. माता गुफा की दूसरी ओर से मार्ग बनाकर बाहर निकल गईं. वह गुफा आज भी गर्भ जून के नाम से जानी जाती है. देवी ने भैरव को लौटने की चेतावनी भी दी किंतु वह नहीं माने. माँ गुफा के भीतर चली गईं. द्वार पर मान की सुरक्षा के लिये वीर लंगूर था. उसने भरैव से युद्ध किया. बड़ा भयंकर युद्ध हुआ. जब वीर लंगूर निढाल होने लगा तो माता वैष्णो ने चंडी का रूप धारण किया और भैरव का वध कर दिया.

भैरव का सिर घाटी में जा गिरा. जिसे भैरो घाटी कहा जाता है. तब माँ ने उसे वरदान दिया कि जो भी मेरे दर्शनों के पश्चात भैरों के दर्शन करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी. आज भी प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु माता वैष्णों के दर्शन करने आते हैं. गुफा में माता पिंडी रूप में विराजमान हैं.
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