Vasai Fort Story in Hindi . जानिये वसई फोर्ट के बारे बहुत कुछ हिंदी में
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Vasai Fort Story in Hindi . जानिये वसई फोर्ट के बारे बहुत कुछ हिंदी में

Vasai Fort History in Hindi वसई किले के बारे में जाने

 

 

 

Vasai Fort Story in Hindi आज इस पोस्ट में मैं आपको वसई फोर्ट अर्थात वसई किला के बारे में बताने जा हूँ।  वसई फोर्ट का बहुत ही ऐतिहासिक महत्व है।  वसई किला को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त है।

 

 

 

यह मुंबई से लगभग ४८ किलोमीटर दूर पालघर जिला के वसई गाँव में है।  यहां आने के लिए आपको वसई रोड स्टेशन पर उतरना होगा।  वसई रोड पश्चिम रेलवे का प्रमुख स्टेशन है।

 

 

स्टेशन से आपको ऑटोरिक्शा बडे ही आराम से मिल जाएगा।  वैसे आप हाइवे नो ८ से वसई फाटा या तुंगारफाटा से वसई गाँव के लिए आ सकते हैं।

 

 

Bassein Fort

 

 

इसे Bassein Fort भी कहा जाता है।  यह वसई पश्चिम में है।  वसई किला बहुत ही विशाल है जो कि १०९ एकड़ में फैला है।  इसे मराठी में ” वसई चा किल्ला ” कहते हैं।  इस किले पर पुर्तगालियों, मराठों, अंग्रेजों और गुजरात के शासकों का कब्ज़ा रहा है।

 

 

 

यहां पुर्तगालियों द्वारा बनवाये गए कैदखाने के अवशेष आज भी मौजूद हैं।  वहाँ के लोग बताते हैं कि यहां कई चर्च थे जिसमें ३ चर्चों के अवशेष अभी भी मौजूद है।

 

 

 

इस किले से पुरे समुद्री क्षेत्र की निगरानी की जा सकती है।  इस किले में ११ दुर्ग है और दो गेट है।  इस किले को बनवाने की शुरुआत गुजरात के सुल्तान Maliq Tughan ने १५३३  में की।

 

 

 

उसके बाद १५३४ में पुर्तगालियों ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे फिर से बनवाना शुरू किया।  उन्होंने इस किले को बहुत ही मजबूत बनवाया और उसके अगल बगल ११ और भी दुर्गों का निर्माण करवाया।

 

 

 

१७३९ में मराठा पेशवा शासक पेशवा बाजीराव के भाई चिमाजी अप्पा ने इस किले को जीत लिया।  वसई को पूर्व और पश्चिम में बाटने वाले रेलवे पुल पर उनकी प्रतिमा उनके सम्मान में लगाई गयी है।

वसई किला का इतिहास

 

पुर्तगालियों के समय वसई व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था।  वसई आज भी बहुत ही विकसित है।  पुर्तगालियों ने अपनी नौसेना को इस किले से मजबूती दी और यह किला समुद्री व्यवसाय का प्रमुख केंद्र था।

 

 

 

यहां समुद्री जहाज़ों का निर्माण होता था।  उन्होंने यहां तमाम चर्च, अनाथालय आदि बनवाया।  नरवीर चिमाजी अप्पा के साथ हुए युद्ध में इस किले को भारी छति  हुई।

 

 

 

नरवीर चिमाजी अप्पा ने ही इस किले में मंदिरों का निर्माण करवाया।  १८०२ में बाजीराव द्वितीय के विरुद्ध यशवंत राव होल्कर ने विद्रोह कर दिया।  इस युद्ध में बाजीराव द्वितीय की हार हो गयी।

 

 

उसके बाद अंग्रेजों और बाजीराव द्वितीय के बीच संधि हुई।  इस संधि को Bassein Sandhi के नाम से जाना जाता है।  इस लिए इस किले को Bassein Fort भी कहते हैं।

 

 

Vasai Fort in Hindi

 

 

 

आज के समय में यह किला ज्यादा भीड़भाड़ का हिस्सा नहीं है।  यहां छुट्टी के दिनों में कालेज के ग्रुप और उसके साथ ही और भी बहुत लोग घूमने आते हैं।

 

 

 

गर्मी के दिनों में यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है।  यह एक लवर पॉइंट भी बन चुका है। शांत और सुरक्षित स्थान होने के कारण यहां प्रेमी जोड़े आते हैं।

 

वसई किला १५५७ में जन्में भारत के पहले सेंट गोंसालो गार्सिया की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्द है।  यह किला चर्च ऑफ़ सेंट पॉल और चर्च ऑफ़ डॉमिनिकंस सहित सात चर्चों के लिए मशहूर है।  अभी इसमें से ज्यादातर ध्वस्त हो चुके हैं या फिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।

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