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basant panchami वसंत पंचमी

basant panchami वसंत पंचमी
Written by Abhishek Pandey

basant panchami वसंत पंचमी सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य की रचना की. अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे. उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र मौन छाया रहता है. विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा… इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ.

 

यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था… अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी. ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया. जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई. जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया. पवन चलने से सरसराहट होने लगी. तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा. सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है. ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं. संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं.

 

बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं. सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका है.. हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं….. इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है…. पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी . इसक्ले बाद भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है….इस दिन विद्यार्थी , संगीत साधक माता सरस्वती की पूजा करते हैं….मित्रों आपको यह प्रसंग basant panchami वसंत पंचमी कैसा लगा जरुर बताएं और इस तरह की और भी पोस्ट के लिए इस ब्लॉग को लाइक, शेयर और सबस्क्राइब जरुर करें और दूसरी पोस्ट के लिए नीचे की लिंक पर क्लिक करें.

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Abhishek Pandey

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